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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 7:53 PM IST
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हल्दी एक ऐसा मसाला है जो हर किचन में आसानी से मिल जाती है और इसके पास हर मर्ज़ का इलाज़ मौजुद है। वैसे तो अब तक इसका इस्तेमाल बदहजमी, कोल्ड-कफ़, ज़ख्म आदि प्रॉलब्म़्स में ज्यादा होता है लेकिन यूनिवर्सिटी न्यूकैसल न्यूट्रास्यूटिकल्स रिसर्च ग्रुप ( University of Newcastle’s Nutraceuticals Research Group) के अग्रणी प्रोफेसर मनोहर गर्ग ने यह बताया है कि हल्दी में एक प्रकार का यौगिक होता है करकूमीन होता है जो ओमेगा-3 के साथ मिलकर फैट को जमने नहीं देता है ओर टाइप- 2 डाइबीटिज को खतरे को रोकता है। पढ़े- करेला मधुमेह को करता है नियंत्रित
हल्दी इन तीन तरीकों से डाइबीटिज़ मरीज़ के लिए फायदेमंद साबित होता है-
1) इम्यून सिस्टेम को बढ़ाती है- डाइबीटिज होने पर इम्यून सिस्टेम पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण हृदय की बीमारी, किडनी की बीमारी, लीवर फंक्शन में प्रॉब्लम आदि समस्याएं आने लगती है। करकूमीन का एन्टीऑक्सिडेंट, एन्टीमाइक्रोबायल, एन्टी-इन्फ्लैमटोरी और एन्टी-ग्लिसैमिक गुण इम्यून सिस्टेम को बेहतर बनाने में बहुत मदद करती है।
2) वेट को मैनेज़ को करने में सहायता करती है- डाइबीटिज के कारण वज़न के बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि इसके कारण पेट की चर्बी बढ़ती है जो इन्सूलिन के उत्पादन में बाधा उत्पन्न करती है। करकूमीन ट्राइग्लिसेराइड, कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने, हजम शक्ति को बढ़ाने, हार्मफूल फैट्स को एकत्र होने से बचाती है। लेकिन हल्दी वेट को मैनेज़ करके डाइबीटिज के खतरे को कम करती है।
3) इन्सुलिन लेवल को कंट्रोल करती है- पैन्क्रीयस या अग्न्याशय इन्सुलिन के लेवल को हैंडल करता है। हल्दी डायट में शामिल करने से अग्न्याशय हेल्दी बनता है। हल्दी एन्टी-ग्लिसेमिक गुण अग्न्याशय को सही तरह से काम करने, इन्सूलिन लेवल को संतुलित और नियंत्रित करके डाइबीटिज के खतरे के संभावना को कम करता है। पढ़े- राजमा से करें वज़न कम और डायबिटीज़ कंट्रोल, जानिये इसके सभी 5 फायदे
हल्दी को कैसे डायट में शामिल किया जाय
हल्दी पावडर, कैप्सूल, टिंचर या ऑयल के रूप में पाया जाता है।
• खाना बनाते हुए हल्दी का इस्तेमाल करना ही बेहतर होता है लेकिन खाना बनाते वक्त एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि खाने को हद से ज्यादा पकाया न जाये, इससे मसाले का गुण नष्ट हो जाता है।
• आप दूध में डालकर हल्दी पावडर का इस्तेमाल करें।
• हल्दी का टुकड़ा चबाने से डाइबीटिज से लड़ने और उसके कारण हुए शारीरिक कॉम्प्लीकेशन्स या परेशानियों को रोकने में सहायता करता है।
हल्दी के विभिन्न रूप का कितना इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है-
• जड़- 1.5-3 ग्राम प्रतिदिन
• पावडर रूट- 1-3 ग्राम प्रतिदिन
• स्टैन्डराइज़्ड पावडर- 400-600 मिलीग्राम दिन में तीन बार
• फ्लूइड एक्सट्रैक्ट- 30-90 बूंद प्रतिदिन
• टिंजर- 15-30 बूंद दिन में चार बार
वैसे तो हल्दी को डाइबीटिज के लिए सेफ माना जाता है लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसको इस्तेमाल न करना ही बेहतर होता है या डॉक्टर से इसकी सलाह लें-
• जब आप हाइपरग्लिसेमिया से ग्रस्त हैं तो यह ग्लूकोज़ के लेवल को अचानक कम कर सकती है।
• अगर आप किसी सर्जरी करने का प्लान बना रहे हैं तो रक्त के पतला होने की प्रक्रिया के कारण हल्दी का सप्लीमेंट कम लेने की सलाह दी जाती है।
• अगर आपको गॉलस्टोन हुआ है या बाइल के पैसेज़ में कोई बाधा उत्पन्न हो रहा है तो हल्दी सेवन कम कर दें।
अपर्याप्त मात्रा में हल्दी लेने से अल्सर, पेट संबंधी समस्या, मुंहासे आदि का प्रॉब्लम शुरू हो जाता है। यहाँ तक कि प्रेगनेंट महिला और दूध पिलाने वाली माँ को भी हल्दी से अतिरिक्त सेवन से बचना चाहिए।
मूल स्रोत-3 reasons turmeric is a boon for diabetics
अनुवादक : Mousumi Dutta
चित्र स्रोत : Shutterstock images
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