Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
-
- हिंदी
Heart Hole : दिल में छेद (Heart Hole) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल की दीवारों में कोई छेद या कमी हो सकती है। यह स्थिति शरीर में ब्लड फ्लो को प्रभावित करता है। यह समस्या जन्म के समय से या बाद में किसी बीमारी के कारण उत्पन्न हो सकती है। मुख्य रूप से दिल में छेद 2 तरह के होते हैं, जिसमें एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) और वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) शामिल हैं। इसके अलावा जन्म के समय एक और स्थिति होती है, जिसे पेटेंट फोरामेन ओवले (PFO) कहा जाता है। हालांकि, यह जन्म के समय होने वाली सामान्य छेद है, जो आमतौर पर अपने आप बंद हो जाती है। लेकिन एएसडी और वीएसडी जैसी स्थिति के कारण कई गंभीर परेशानी हो सकती है। इस विषय की अधिक जानकारी के लिए हमने पटपड़गंज स्थित मैक्स हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर कार्डियक साइंसेस के डॉ. वैभव मिश्रा से बातचीत है। आइए जानते हैं डॉक्टर वैभव से जानते हैं दिल में छेद कितने तरह के होते हैं और कौन सी स्थिति खतरनाक होती है?
यह दिल के ऊपरी हिस्से में यानी दाहिने और बाएं अटरिया के बीच छेद होता है। इससे ऑक्सीजनयुक्त और ऑक्सीजनरहित ब्लड एक साथ मिल सकते हैं, जिससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हालांकि, कई बार यह समस्या बिना किसी बड़े लक्षण के होती है और व्यक्ति जीवनभर बिना किसी परेशानी के रह सकता है। लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर हो सकता है और इससे दिल की गति, ब्लड प्रेशर और शरीर के अन्य अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है।
यह छेद दिल के निचले हिस्से में यानी दाहिने और बाएं वेंट्रिकल्स के बीच होता है। यह छेद अधिक गंभीर हो सकता है, क्योंकि इस स्थिति में शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजनयुक्त ब्लड नहीं मिल पाता है। वीएसडी की स्थिति में शरीर में ब्लड का फ्लो असामान्य हो जाता है और इससे दिल की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
डॉक्टर वैभव मिश्रा का कहना है कि Ventricular Septal Defect (VSD) को आमतौर पर सबसे खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह ब्लड के असंतुलित प्रवाह का कारण बन सकता है और इसके परिणामस्वरूप दिल पर अधिक दबाव पड़ता है। यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो दिल की कार्यप्रणाली और शरीर के अंगों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जो जीवन के लिए खतरा हो सकता है।
इन समस्याओं का निदान समय पर किया जाना आवश्यक है। डॉक्टरों के मार्गदर्शन से इनका उपचार संभव है और इनकी जटिलताओं से बचा जा सकता है।