डिजिटल डिटॉक्स से बेहतर होती है मेंटल हेल्थ, जानें इसके फायदे

पिछले कुछ दिनों में कई बॉलीवुड हस्तियों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद कर दिए हैं। सेलिब्रिटीज़ का यह फैसला उनकी मेंटल हेल्थ के लिहाज से अच्छा माना जा सकता है। क्योंकि, डिजिटल वर्ल्ड हमारी सेहत पर कई नकारात्मक प्रभाव डालता है। जानते हैं कैसे डिजिटल डिटॉक्स आपकी मानसिक सेहत सुधारने में मदद कर सकता है। (Digital Detox Benefits)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 30, 2020 6:06 PM IST

Digital Detox: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा सा मच गया। कई स्टार्स को ट्रोल किया गया तो कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा और भड़ास निकालने का काम किया। सोशल मीडिया पर चल रही इस हलचल के बीच फिल्मी हस्तियों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलिट कर दिए। सोनाक्षी सिन्हा जैसे कुछ लोगो ने बयान दिया कि वो उस नेगेटिविटी से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया (Social Media) पर फैली हुई है। सेलिब्रिटीज़ का यह फैसला उनकी मेंटल हेल्थ को ध्यान में रखते हुए अच्छा माना जा सकता है। क्योंकि, डिजिटल वर्ल्ड हमारी सेहत पर कई नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिसमें डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी शामिल हैं। जी हां, डिजिटल डिटॉक्स का यह तरीका आपकी मानसिक सेहत को सही रखने में बहुत मदद कर सकता है। (Digital Detox Benefits)

क्या है डिजिटल डिटॉक्स ?

एक्सपर्ट्स के अनुसार दिन-रात फोन, मोबाइल और कम्प्यूटर पर रहने वाले लोगों की मेंटल हेल्थ पर इसका असर पड़ता है। तनाव, उदासी और एंग्जायटी जैसी परेशानियां सोशल मीडिया पर रहने की वजह से हो सकती है। ऐेसे में  ‘डिजिटल डिटॉक्स’ थेरेपी की मदद ली जा सकती है। इस थेरेपी में लोग एक निश्चित अवधि तक खुद को फोन, टीवी और कम्प्यूटर जैसे माध्यमों से दूर रखते हैं। वर्चुअल वर्ल्ड से इस दूरी को ही डिजिटल डिटॉक्स कहते हैं। अब जब धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी में सोशल मीडिया बहुत बड़ा हिस्सा बनता जा रहा है। ऐसे में लोगों को फोन एडिक्शन (Phone Addiction) हो जाता है। अल्कोहल और तम्बाकू जैसी चीज़ों के एडिक्शन की तरह ही फोन की लत भी बुरी होती है। इसीलिए, डिजिटल डिटॉक्स बहुत ज़रूरी है ।

डिजिटल डिटॉक्स के फायदे

ब्रेन करता बेहतर तरीके से काम

कुछ स्टडीज़ में कहा गया है कि दिमाग के लिए एक समय में कई चीज़ों पर फोकस करना संभव नही है। ब्रेन के लिए 'मल्टीटास्किंग' आसान नहीं होती। कई लोग खाना खाते समय ऑनलाइन रहते हैं। इसी तरह फोन पर बात करते हुए कम्प्यूटर पर काम करना, पढ़ाई करने और टीवी देखने जैसे भी काम करने की कोशिश करते  हैं कई लोग। लेकिन, इससे दिमाग पर नेगेटिव असर होता है। जब आप डिजिटल डिटॉक्स अपनाते हैं तो, आप एक समय एक ही काम पर ध्यान देते हैं। इससे, आपको तनाव भी कम होता है और दिमाग को काम करने में आसानी भी होती है।

अनिद्रा की समस्या होगी कम

ज़्यादातर लोग अपने फोन को अपने तकिए के नीचे या बिस्तर के पास रखकर सोते हैं। फोन पर आने वाले मैसेज़ेस और नोटिफिकेशन्स की वजह से बार-बार नींद खुलती है। धीरे-धीरे यह परेशानी अनिद्रा (Insomnia) में बदल जाती है और आपके लिए सो पाना बिल्कुल मुश्किल हो जाता है। लेकिन जब आप डिजिटल डिटॉक्स पर रहते हैं तो, आपका दिमाग शांत रहता है और आप आराम से सो पाते हैं। इससे, अनिद्रा की समस्या भी धीरे-धीरे ठीक होने लगती है।

रिश्ते भी बनते हैं बेहतर

जब आप फोन और वर्चुअल वर्ल्ड पर कम समय बिताते हैं, तो आपका यह बचा हुआ समय परिवार और अपने कलीग्स को देते हैं। इससे, आपके पार्टनर, माता-पिता, साथ काम करने वाले लोगों और बच्चों के साथ आपके रिश्ते भी बेहतर बनते है। जिससे, तनाव, अकेलापन और उदासी जैसे भावनात्मक समस्याएं कम होती हैं।

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