OPD और IPD में क्या अंतर है? आम व्यक्ति कैसे पहचानें कि कौन सी बीमार में कब और कहां जाना है?

हर हॉस्पिटल में OPD और IPD विभाग होते हैं। लेकिन, कई बार लोग समझ नहीं पाते हैं कि उन्हें कौन से विभाग में अपना इलाज कराना चाहिए?

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Written By: Anju Rawat | Updated : January 13, 2026 4:50 PM IST

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Medically Verified By: Dr Rakesh Pandit

OPD and IPD: जब कोई व्यक्ति बीमार होता है, तो वह सबसे पहले अस्पताल का रुख करता है। अस्पताल में वह OPD और IPD दो विभाग देखता है और उसे समझ नहीं आता है कि उसे जो दिक्कत या परेशानी हो रही है, उसके लिए उसे कौन-से विभाग में जाना चाहिए? कई बार लोग ओपीडी में चले जाते हैं और वहां से उनकी गंभीरता को देखते हुए आईपीडी में भेज दिया जाता है। वहीं, कई बार लोग आईपीडी में चले जाते हैं और फिर उन्हें वहां से ओपीडी में भेजा जाता है। इससे रोगी का काफी समय खराब होता है और उसका पूरा दिन फालतू निकल जाता है। इसलिए समय बचाने और सही जानकारी के लिए यह जरूर पता होना चाहिए कि कब ओपीडी में और कब आईपीडी में इलाज कराने के लिए जाना चाहिए? आइए, आकाश हेल्थकेयर के इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियरकंसल्टेंट और एचओडी डॉ. राकेश पंडित (Dr. RakeshPandit,SeniorConsultant & HOD - InternalMedicine, AakashHealthcare) से जानते हैं ओपीडी और आईपीडी में क्या अंतर है?

OPD क्या होता है?

ओपीडी या बाह्य रोगी विभाग (OutpatientDepartment) अस्पताल का वह हिस्सा है, जहां बिना भर्ती हुए डॉक्टर से परामर्श, बीमारी का निदान और इलाज मिलता है। ओपीडी में रोगियों की कई तरह की जांचें भी की जाती हैं, जिसमें ईसीजी, एक्स-रे, ब्लड टेस्ट आदि शामिल हो सकते हैं। OPD में सामान्य चेकअप, फॉलो-अप होता है। इसके अलावा, दवाइयां, इंजेक्शन और वैक्सीनेशन भी ओपीडी में ही होता है। डॉक्टर से कंसल्ट करने के बाद रोगी उसी दिन घर लौट सकता है। ओपीडी में पंजीकरण के बाद ही आप डॉक्टर को दिखा सकते हैं या कोई जांच करवा सकते हैं।

IPD क्या होता है?

आईपीडी या अंतर् रोगी विभाग (InpatientDepartment) अस्पताल का वह हिस्सा है, जहां किसी व्यक्ति को ऐसी स्थिति के कारण अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, जहां उसे नियमित देखभाल की जरूरत होती है। सर्जरी, गंभीर संक्रमण, दीर्घकालिक रोग या आपातकालीन चिकित्सा समस्याओं में रोगी को आईपीडी में रखा जा सकता है। इस विभाग में रोगी को भर्ती कर दिया जाता है और उसकी गहन देखभाल की जाती है।

ओपीडी में रोगी की बीमारी का निदान करके उसका इलाज किया जाता है। वहीं, जब रोगी को गहन देखभाल, सर्जरी या भर्ती की जरूरत पड़ती है तो उसे आईपीडी में भेजा जाता है।

विशेषताOPD IPD
पूरा नामबाह्य रोगी विभागअंतर् रोगी विभाग
भर्तीमरीज को भर्ती नहीं किया जाता हैमरीज को भर्ती किया जाता है, कम से कम 24 घंटे के लिए
खर्चाकम खर्चा होता हैज्यादा खर्चा होता है
इलाज की अवधिकुछ समय का इलाज, उसी दिन घर जा सकते हैंलंबे समय का इलाज, भर्ती होना पड़ता है
इलाजसामान्य बीमारियां-जैसे बुखार, सिरदर्द, एसिडिटी, फॉलो अप, वैक्सीनेशन, चेकअप आदिगंभीर बीमारियां जैसे- हार्ट अटैक, एक्सीडेंट, सर्जरी, डेंगू, निमोनिया आदि

आम व्यक्ति कैसे पहचानें कि इलाज के लिए OPD में जाए या IPD में?

  • एक आम व्यक्ति अपनी बीमारी की गंभीरता, अवधि और उसके दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के आधार पर निर्णय ले सकता है कि उसे ओपीडी में दिखाना है या आईपीडी में।
  • अगर हल्का बुखार, खांसी, एसिडिटी या कब्ज जैसी समस्याएं हैं तो ओपीडी में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। जब मामूली से लक्षण महसूस होते हैं, तो ओपीडी में दिखाया जाना चाहिए।
  • वहीं, सांस लेने में तकलीफ, तेज या लंबे समय तक बुखार, अनियंत्रित ब्लड शुगर, पेट में अत्यधिक दर्द, बेहोशी जैसे गंभीर लक्षणों के लिए अस्पताल के आईपीडी में जाना चाहिए। गंभीर मामलों में आपको हमेशा आईपीडी में ही जाना चाहिए।
  • इस विभाग में डॉक्टर आपकी स्थिति को देखकर भर्ती करके आपकी देखभाल और इलाज पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। इस विभाग में तुरंत इलाज मिलता है।

आम व्यक्ति कब OPD और कब IPD में जाए?

  • सामान्य फ्लू, पेट दर्द, रेगुलरचेकअप और फॉलो-अप के लिए ओपीडी में जाए।
  • गंभीर एक्सीडेंट, हार्टअटैक, सर्जरी और गंभीर बीमारियों के लिए आईपीडी में जाए।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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