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थायराइड ग्रंथि का आपके शरीर में सांस लेने, शरीर के वजन को बनाए रखने, मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में अहम रोल निभाता है। ग्रंथि द्वारा उत्पन्न दो थायराइड हार्मोन, टी 3 और टी 4 आपके शरीर और अंगों को बनाए रखते हैं। क्या आप जानते हैं थायराइड का खतरा किन चीजों से बढ़ता है? लेकिन कभी-कभी ग्रंथि इन हार्मोन का अधिक उत्पादन कर सकती है जिससे आपको हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म का खतरा हो सकता है। एंडोक्रोबोलॉजिस्ट डॉक्टर शशांक जोशी आपको हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के बीच का अंतर बता रहे हैं। हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के बीच अंतर जब थायरॉयड ग्रंथि अधिक सक्रिय हो जाती है, तो यह बहुत थायराइड हार्मोन पैदा करती है, जो हाइपरथायरायडिज्म का कारण बनता है। लेकिन जब विपरीत होता है, यानि यह तब होता है जब ग्रंथि हार्मोन का उत्पादन करती है, यह हाइपोथायरायडिज्म का कारण बनता है। हाइपरथायरायडिज्म में व्यक्ति का ऊर्जा स्तर अधिक होता है और हाइपोथायरायडिज्म में ऊर्जा के स्तर कम होता है। हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण हाइपरथायरायडिज्म में वजन कम होना, भूख बढ़ना, दिल की धड़कन बढ़ना, और पसीना आना शामिल हैं। इसके अलावा चिंता और नींद की कमी भी इसके लक्षण हैं। हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में वजन बढ़ना, कम ऊर्जा, ड्राई स्किन और नाखूनों का भंगुर होना, महिलाओं में कम मासिक धर्म और अवसाद का अनुभव आदि लक्षण शामिल हैं। हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के कारण हाइपोथायरायडिज्म ज्यादातर एक विरासत में मिली बीमारी है, जो परिवार में एक महिला से दूसरी महिला को हो सकती है। जबकि हाइपरथायरॉडीजम, वंशानुगत नहीं है। ग्रेव डिजीज और थायरायरायटीस जैसी परिस्थितियां अति क्रियाशील थायरॉयड ग्रंथि का कारण हो सकती हैं। हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के उपचार हाइपरथायरायडिज्म का इलाज केस-बाय-केस आधार पर होता है। यह अंडरलाइंग कंडीशन पर निर्भर करता है। इसमें रेडियोएक्टिव आयोडीन और एंटीथॉयड मेडिसिन के साथ आयोडीन थेरेपी शामिल है। दुर्लभ मामलों में, अतिरिक्त थायरॉयड ग्रंथि को सर्जरी से निकाल दिया जाता है। हाइपोथायरायडिज्म का मुख्य रूप से सिंथेटिक थायरायड हार्मोन लेवोथोरॉक्सीन या थायरॉक्सीन दवाओं के जरिए इलाज किया जाता है। यह शरीर में हार्मोन का स्तर सामान्य करने में मदद करती हैं। हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म की ऐसे करें देखभाल हाइपरथायरायडिज्म के लिए आपको अपने थायरॉयड फंक्शन और हार्मोन लेवल की नियमित रूप से जांच जरूरी है। इसके लिए किसी बेहतर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से परामर्श करें। जबकि हाइपोथायरायडिज्म को डायट और एक्सरसाइज़ के जरिए बॉडी वेट द्वारा मैनेज किया जा सकता है। Read this in Englishअनुवादक – Usman Khanचित्र स्रोत - Shutterstock