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ECG और Echo टेस्ट में क्या अंतर है, कौन-सी जांच कब करानी चाहिए?

अक्सर हम में से कई लोग ECG और Echo को एक ही जांच समझ लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह दोनों ही जांचे भले ही हार्ट की स्थितियों को जानने के लिए किया जाता है, लेकिन दोनों ही एक-दूसरे से काफी अलग होती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में-

Written By Kishori Mishra
Updated : July 28, 2026 10:57 AM IST

दिल से जुड़ी बीमारियों का समय पर पता लगाने के लिए अक्सर डॉक्टर्स ECG (Electrocardiogram) और Echo (Echocardiography) कराने की सलाह देते हैं। हालांकि, कई लोग इन दोनों जांचों को एक जैसा मान लेते हैं। जबकि इनके काम और जांच कराने का उद्देश्य अलग-अलग होता है। सही समय पर सही जांच कराने से हार्ट की गंभीर समस्याओं का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है और इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है।

यशोदा हॉस्पिटल्स, सिकंदराबाद के कंसल्टेंट कार्डियोथोरेसिक, मिनिमल इनवेसिव सर्जन डॉ. विशाल खांटे का कहना है कि ECG और Echo दोनों अलग-अलग प्रकार की हार्ट जांच हैं और दोनों का उद्देश्य भी अलग होता है। ECG यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम हार्ट  की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है। इसकी मदद से अनियमित धड़कन (Arrhythmia), हार्ट अटैक के संकेत और अन्य इलेक्ट्रिकल समस्याओं का पता लगाया जाता है। वहीं, Echo या इकोकार्डियोग्राफी अल्ट्रासाउंड टेक्नीक की मदद से हार्ट की तस्वीरें बनाती है, जिससे हार्ट की बनावट, पंपिंग क्षमता और हार्ट वाल्व की स्थिति का आकलन किया जाता है। आइए इस विषय को विस्तर से समझते हैं-

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ECG क्या है?

ECG यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम एक सरल, दर्दरहित और कुछ मिनट में पूरी होने वाली जांच है। इसमें शरीर पर छोटे-छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जो हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधि को रिकॉर्ड करते हैं। इस जांच से डॉक्टर यह जान सकते हैं कि दिल की धड़कन सामान्य है या नहीं, कहीं हार्ट अटैक के संकेत तो नहीं हैं या फिर किसी तरह की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी (Arrhythmia) तो नहीं है।

Echo क्या है?

Echo या इकोकार्डियोग्राफी अल्ट्रासाउंड तकनीक पर आधारित जांच है। इसमें ध्वनि तरंगों की मदद से हृदय की लाइव तस्वीरें बनाई जाती हैं। इस जांच से डॉक्टर यह देख पाते हैं कि दिल का आकार कैसा है, वाल्व सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं, हृदय कितनी क्षमता से खून पंप कर रहा है और कहीं जन्मजात या अन्य संरचनात्मक समस्या तो नहीं है।

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ECG और Echo में क्या अंतर है?

टेबल से समझते हैं इनके बीच का अंतर-

ECG (Electrocardiogram) टेस्टEcho (Echocardiography) अल्ट्रासाउंड
इस जांच में हार्ट की इलेक्ट्रिकल गतिविधि रिकॉर्ड होती है।इस जांच में अल्ट्रासाउंड से हृदय की तस्वीरें नजर आती हैं।
इस जांच से धड़कन की अनियमितता, हार्ट अटैक के संकेत, इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी का पता चलता है।इस अल्ट्रा साउंड से हृदय की बनावट, वाल्व, पंपिंग क्षमता और रक्त प्रवाह का पता चलता है।
यह जांच सीने में दर्द, धड़कन तेज होना, चक्कर, बेहोशी की स्थिति में कराई जाती है।
यह जांच हार्ट मर्मर, हार्ट फेल्योर, वाल्व रोग, सांस फूलना, जन्मजात हृदय रोग होने पर कराई जाती है।
लगभग 5-10 मिनटलगभग 20-40 मिनट
इस जांच में किसी भी तरह का दर्द नहीं होता है।इस जांच में किसी भी तरह का दर्द नहीं होता है।
इसमें किसी भी तरह का रेडिएशन नहीं होता है।इसमें भी किसी भी तरह का रेडिएशन नहीं होता है।

किस स्थिति में ECG कराना चाहिए?

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर ECG कराने की सलाह दे सकते हैं।

  1. सीने में दर्द या दबाव महसूस होना
  2. दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना
  3. अचानक चक्कर आना
  4. बेहोशी आना
  5. हार्ट अटैक का संदेह

कब जरूरी होता है Echo टेस्ट?

Echo की जरूरत तब पड़ती है जब डॉक्टर को दिल की संरचना और उसकी कार्यक्षमता को विस्तार से देखना हो। जैसे-

  1. हार्ट वाल्व की बीमारी का संदेह
  2. हार्ट फेल्योर
  3. दिल का आकार बढ़ना
  4. जन्मजात हृदय रोग
  5. हार्ट मर्मर
  6. हृदय की पंपिंग क्षमता (Ejection Fraction) का आकलन

क्या सिर्फ एक जांच काफी होती है?

डॉ. विशाल खांटे का कहना है कि कई बार सिर्फ ECG या सिर्फ Echo से पूरी जानकारी नहीं मिलती। अगर मरीज में हार्ट डिजीज की आशंका अधिक हो, तो डॉक्टर दोनों जांच एक साथ भी लिख सकते हैं। ECG यह बताता है कि दिल की इलेक्ट्रिकल प्रणाली ठीक से काम कर रही है या नहीं, जबकि Echo यह दिखाता है कि हृदय कितनी अच्छी तरह खून पंप कर रहा है और उसके वाल्व व मांसपेशियां सही स्थिति में हैं।

Dislciamer : ECG और Echo दोनों ही सुरक्षित, दर्दरहित और बेहद महत्वपूर्ण हार्ट टेस्ट हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। यदि आपको बार-बार सीने में दर्द, धड़कन अनियमित होना, सांस फूलना, चक्कर आना या बेहोशी जैसी समस्या हो रही है, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेकर उचि