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हड्डियों से जुड़ी कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनके नाम आपस में काफी मिलते जुलते हैं, जो पहले बार सुनने वाले कोई लोगों को लिए उलझन में डाल देने वाले हो सकते हैं। लेकिन इन बीमारियों के नाम के साथ इनकी सही पहचान होना बहुत जरूरी है, क्योंकि इनके सिर्फ नाम मिलते हैं, इनके इलाज की दवाएं, बचाव के तरीके और लक्षण आदि बहुत सी चीजें अलग-अलग हो सकती हैं। इसी प्रकार अर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस दोनों के नाम एक दूसरे से मिलते झुलते होने के बावजूद भी ये बीमारियां दोनों से अलग हैं। इन दोनों बीमारियों की सही पहचान होना जरूरी है, ताकि सही दवा की मदद से इनका इलाज शुरू किया जा सके। इस लेख में हम आपको अर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस दोनों के बीच अंतर के बारे में बताने वाले हैं। लेकिन पहले जान लेते हैं इनके बीच क्या समानताएं हैं और फिर जानेंगे इनके बीच के अंतर के बारे में।
अर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस के बीच सबसे प्रमुख समानता यही है कि ये दोनों ही बीमारियां प्रमुख रूप से हड्डियों के जोड़ों को ही प्रभावित करती है। अर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस दोनों में ही जोड़ों में सूजन, जकड़न व दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन इन सब के बावजूद इनमें कुछ असामान्यताएं भी हैं, जिनका पता लगाना जरूरी होता है।
आर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस के बीच सबसे बड़ा जो अंतर है, वह है इनका प्रकार। रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जबकि जोड़ों में सूजन व जलन पैदा करने वाली सभी बीमारियों को अर्थराइटिस कहा जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो रूमेटाइड अर्थराइटिस भी अर्थराइटिस का ही एक प्रकार है। इसके अलावा भी अर्थराइटिस के कई प्रकार हैं जिनमें ओस्टियोआर्थराइटिस भी शामिल है।
अर्थराइटिस का इलाज स्थिति के कारण के अनुसार ही किया जाता है, जिनमें अर्थराइटिस के कुछ प्रकार ऐसे हैं, जिनका इलाज किया जा सकता है। जबकि रुमेटाइट जैसे कुछ प्रकार ऐसे भी हैं जिनका कोई इलाज नहीं है। रूमेटाइड अर्थराइटिस के लिए उपलब्ध दवाओं की मदद से सिर्फ इसके लक्षणों को ही कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि इसके अलावा कुछ घरेलू उपाय व जीवनशैली के कुछ बदलाव भी हैं, जिनकी मदद से रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षणों को कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
अर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस दोनों के ही ज्यादातर लक्षण एक समान होते हैं और इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहली पहचान यह है कि अगर पेन किलर दवाएं लेने के कुछ समय बाद फिर से दिक्कत दर्द होने लगता है तो यह रूमेटाइड अर्थराइटिस हो सकता है। जिन लोगों को परिवार में पहले से ही किसी को रूमेटाइड अर्थराइटिस है, तो उसे अर्थराइटिस के किसी और प्रकार की बजाय रूमेटाइड अर्थराइटिस होने का खतरा ज्यादा रहता है।