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पोलियो एक ऐसी वायरस जनित संक्रामक बीमारी है जो शरीर के नर्वस सिस्टेम पर आक्रमण करके कुछ ही घंटों में शरीर को पैरालाइसिस कर देने की क्षमता रखती है। ये वायरस मुँह और आंतों के द्वारा शरीर में दाखिल होता है।
पोलियो के प्राथमिक लक्षण-
• बुखार या फीवर
• थकान
• सिर दर्द
• उल्टी
• गर्दन में अकड़न
• लिम्ब्स (limbs) में दर्द आदि
ज्यादातर समय इस मामले में पैर पैरालाइसिस हो जाते हैं लेकिन 5% से 10% क्षेत्रों में जब ब्रीदिंग मस्लस गतिहीन हो जाते हैं तब मृत्यु की संभावना बन जाती है।
किस उम्र में पोलियो होने का खतरा ज्यादा रहता है?
पोलियो होने का खतरा मूलतः पाँच वर्ष से कम बच्चों को होता है।
रोकथाम
इस बीमारी की सबसे बुरी बात ये है कि एक बार हो जाने पर इसका कोई इलाज नहीं हो सकता, न ही ये ठीक हो सकता है सिर्फ पोलियो वैक्सीन लगाकर इससे बचा सकता है । इसलिए पाँच वर्ष तक बच्चों को बार-बार पोलियो वैक्सीन देकर इस बीमारी से उनकी रक्षा की जाती है।
पोलियो और भारत
कुछ ही वर्ष पहले भारत सरकार ने पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए अपना कदम उठाया और इस पथ पर अडिग रहकर भारत को पोलियो फ्री बनाने में अपनी अहम् भूमिका निभाई। यहाँ तक कि भारत ने सरहद पार बांग्लादेश और पाकिस्तान को भी इस निर्मम बीमारी से वैक्सीन के द्वारा बाहर निकलने का रास्ता दिखाया।
वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल
1988 में 41 वां वर्ल्ड हेल्थ एसेम्ब्ली में पूरे दुनिया से पोलियो उन्मूलन का प्रस्ताव पारित किया गया। ये प्रस्ताव राष्ट्रीय सरकारों के नेतृत्व में वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल (GPEI), डब्ल्यूएचओ, रोटरी इंटरनेशनल, अमेरिका के डिज़ीज़ कंट्रोल एण्ड प्रीवेन्शन (सीडीसी), यूनिसेफ और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन सहित प्रमुख सहयोगियों द्वारा समर्थित किया गया।
इसलिए कभी भी बच्चों को पोलियो वैक्सीन लगाने में न देर करें और न ही आलसपन दिखायें। अगर अपने बच्चे को रखना है पोलियो फ्री तो पाँच वर्ष तक लगातार समय पर पोलियो ड्रॉप देना न भूलें।
मूल स्रोत- Polio: Do you know about the disease?
अनुवादक: Mousumi Dutta
चित्र स्रोत: ShutterStock
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