स्ट्रोक के लिये गोल्डन ऑवर क्या होता हैं ?

स्ट्रोक के समय गोल्डर ऑवर कितने घंटे का होता है?

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Written By: Editorial Team | Published : November 3, 2017 1:09 PM IST

आजकल ज्यादातर लोगों की मृत्यु स्ट्रोक के कारण होती हैं | वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गेनाईजेशन के अनुसार हर साल 65 लाख लोगों की मृत्यु स्ट्रोक के कारण होती हैं| 6 में से 1 व्यक्ति स्ट्रोक से पीड़ित हैं | हर 4 मिनट में व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं | अभी का यह अंदाज हैं की 26 लाख लोग स्ट्रोक से ठीक हो रहे हैं | स्ट्रोक की वह स्थिति जब सही उपचार या मेडिकल मदद मिलने से शारीरिक अवस्था को संभाला जा सकता है उस समय को गोल्डन ऑवर कहते हैं | डॉं. रीमा खन्ना असोसिएट कंसलटेंट-न्यूरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग | डॉं. रीमा ने बताया की क्या हैं स्ट्रोक बीमारी में गोल्डन ऑवर और  गोल्डन ऑवर के समय में इलाज करना कितना हैं जरूरी|

ब्रेन को जब ब्लड नहीं पहुंचता तब स्ट्रोक का खतरा होता हैं | बिना ब्लड के ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंचता हैं और वो मर जाते हैं| स्ट्रोक होने की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि वह ब्रेन के कौन-से हिस्से में हुआ हैं। और कितनी जल्दी इसका इलाज हुआ है इस बात पर मरीज के ठीक होना निर्भर करता हे | स्ट्रोक का परिणाम व्यक्ति को चलने-फिरने , बोलना, सोचना, महसूस और समझने पर होता हैं |

स्ट्रोक में क्या होता हैं गोल्डन ऑवर ? 
 ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण नजर आने के बाद रोगी को तुरंत इलाज मिला या गोल्डन ऑवर में हॉस्पिटल  लेकर जाना जरूरी होता हैं | स्ट्रोक के लिये गोल्डन ऑवर 4.5 घंटों के अंदर होता हैं | हर मिनट में 20 लाख नर्व सेल्स ख़त्म हो जाते हैं ब्लड फ्लो रुकता नहीं| इसलिये रोगी को जल्द से जल्द स्ट्रोक सेंटर पहुंचना होता हैं जरुरी | अगर देर हो गई तो रोगी जान जा सकती हैं |

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अनुवादक – Sushantdeep Sagvekar

चित्र स्रोत - Shutterstock

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