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Written By: Jitendra Gupta | Published : October 17, 2022 2:49 PM IST
बच्चे को दस्त लगने पर क्या करना चाहिए? Expert से जानें दस्त में क्या करें ताकि बच्चा रहे ठीक
बदलता मौसम या आपके रहने वाली जगह पर चीजें बच्चे को कभी भी बीमार बना सकती हैं, जिसमें बुखार, उल्टी, दस्त जैसी आम परेशानियां शामिल हैं। अक्सर रात-बेरात दस्त बच्चों की तो हालत खराब कर ही देते हैं लेकिन आपका जीना भी मुहाल हो जाता है। अगर बच्चा छोटा है तो निश्चित रूप से वो सारा बिस्तर गंदा कर देता होगा और अगर डायपर पहनता है तो आपका खर्चा बढ़ना लाजमी है। बच्चे को दस्त इंफेक्शन या फिर साफ-सफाई न होने की वजह से भी हो सकते हैं, जिसमें खराब खाना और खाना बोतल का यूज भी शामिल है। Apollo Spectra, Mumbai, Pediatric Gastroenterologist Dr. Vibhor Borkar बता रहे हैं कि बच्चे को अगर अचानक दस्त हो जाए तो आप इमरजेंसी के रूप में क्या टिप्स फॉलो कर सकते हैं ताकि बच्चे की तबीयत न बिगड़े। तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है एक्सपर्ट की राय।
बच्चे को दस्त होना यानि पैखाना या फिर इलेंद्री पतला होना, ये कई परिस्थितीयों में होता है | इसकी मुख्य परिस्थितियां हैं
1- दूषित पानी
2-दूषित खाना
3- कभी-कभी वायरल या विषाणु से इन्फेक्शन की वजह से भी दस्त होते है।
कभी कभी नवजात शिशुओ में वॉटर फीडिंग या फिर जैसे बॉटल से दूध पिलाते है उसके वजह से भी दस्त की परिस्थिति हो सकती है। दस्त के भी कई कारण होते हैं, जिसमें सबसे पहला कारण, जो ये पाया जाता है इन्फेक्शन का होना। इन्फेक्शन, जीवाणु या फिर विषाणु किसी से भी हो सकता हैं। बहुत बार दस्त फूड पॉइजनिंग यानि बाहर के दूषित खाने की वजह से भी होता है। कई बार दवाई की वजह से भी दस्त हो सकता है, खास कर अगर कोई व्यक्ति यात्रा कर रहा हो तो। इसलिए एक जगह से दूसरी जगह पर जाते वक्त उचित सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
दस्त, एक ऐसी बीमारी हैं ऑर ये नॉर्मल नहीं हो सकती। दस्त हुआ है यानि बच्चे को कोई तो परेशानी है, इसलिए हमें सावधान ऑर अलर्ट रहना बहुत जरूरी है। जब दस्त होता है तब शरीर मैं जो बदलाव होता है, वो है पानी की कमी होना, जो कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात है। दस्त होने के साथ साथ अन्य प्रॉब्लेम भी हो सकती हैंः
1-जैसे पेट में दर्द होना
2- मरोड़ के साथ दर्द होना
3- मल में ब्लड जाना
4- उल्टी
5- शरीर में पानी की कमी
जब दस्त ज्यादा होते हैं या फिर उल्टी ज्यादा होती है तब शरीर में पानी की कमी हो सकती है। शरीर में पानी का एक लेवल से नीचे चले जाना डिहाइड्रेशन कहलाता है। शरीर में पानी की कमी से बच्चों में बेहोशी जैसी स्थिति हो सकती है, जो कि आगे चलकर जानलेना साबित हो सकती है। इसलिए कभी भी दस्त को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
जब दस्त होते हैं तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो अगर शरीर से पानी जा रहा है तो आपको ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की जरूरत है। जो कि इसका सटीक इलाज है। डॉक्टर्स दस्त में ORS का घोल देने की सलाह देते हैं, जो कि WHO प्रमाणित होता है। ओआरएस में जरूरी मात्राएं दी गई होती है ताकी दस्त की वजह से शरीर में एलेक्ट्रोलाइट्स और दूसरी चीजों की कमी को दूर किया जा सके। जैसेः
1- पानी का कम होना
2- सोडियम और पोटेशियम का कम होना
इनकी मात्रा को संतुलित करने के लिए ही ORS का घोल बनाया जाता है, इसको देने से ही दस्त की बीमारी में आराम पाया जा सकता है। अगर बच्चे को उल्टी हो रही है और अगर बच्चा मुंह से कुछ भी खा नहीं सकता तो आप ऐसे में उल्टी की दवा भी बच्चे को दे सकते हैं। उसके बाद 15 - 20 मिनट रुकें और उसके बाद ORS का घोल आप बच्चे को दे सकते हैं। लेकिन ये करने के बावजूद बच्चे को उल्टी नहीं रुके तो ऐसे बच्चे को आप घर पर इलाज नहीं कर सकते हैं, ऐसे बच्चे को आपको नजदीकी अस्पताल या फिर बच्चों के डॉक्टरों के पास ले जाना होगा और उचित इलाज कराना होगा।
इस लिहाज से ORS सबसे पहली दवा है, जो आप देंगे, साथ में अगर उल्टी हो रही है तो उल्टी की दवा भी आप दे सकते हैं। ये दो दवाइयां over the counter यानि किसी भी मेडिकल शॉप से ली जा सकती है।
दस्त होने का कारण ये है की उसमें वायरल इन्फेक्शन होते है, वायरल इन्फेक्शन ये सबसे एक कॉमन कारण है दस्त होने के। जैसे हमने कोरोना में देखा पूरी दुनिया को इन्फेक्शन हुआ लेकिन कोई ठोस दवाई इसके उपर नहीं निकल पाई। बहुत ही कम वायरल इंनफेक्शन्स की दवाई होती है। दस्त के जो भी वायरल इंनफेक्शन्स होते है उनमें इतनी एंटीबायोटिक दवाएं नहीं दी जानी चाहिए। ORS और उल्टी की दवाई आप दे सकते है, लेकीन सिर्फ एक कंडीशन में, जिसमें दस्त के साथ मल में खून आ रहा हो। इस परिस्थिती में बच्चो को दस्त बैक्टीरिया की वजह से होता है। ऐसे में एंटी-बायोटिक दीजिए। नहीं तो दस्त के लिए एंटी-बायोटिक यूज करना ये अच्छी बात नहीं है और उससे कोई फायदा नहीं होता और तो और नुकसान भी हो सकता है, इसलिए एंटी बायोटिक यूज नहीं करना चाहिए।
जबतक बच्चे को दस्त हो रहे हैं तब तक आपको ORS देना चाहिए। बच्चा अगर अच्छी मात्रा में पेशाब कर रहा है मतलब शरीर में पानी की मात्रा सही है। लेकिन अगर पेशाब कम हो रहा है यानी ऐसे बच्चों को आपको तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। उल्टी की जो दवाई होती है वो एक या दो दिन के ऊपर लेने की जरुरत नहीं पड़ती। बुखार जब आता है तब बुखार की दवाई दीजिये। बहुत बार डॉक्टर जिंक की दवाई देते है ये दवाई आपने 14 दिन का कोर्स कम्पलीट कर लेना चाहिए।
ज्यादातर दस्त के मामलों में बच्चों को 3 से 4 दिन में ठीक हो जाता है। कभी-कभी 7 दिन भी लग सकते हैं। हालांकि ऐसे बहुत कम मामले होते हैं, जिसमें कभी-कभी 14 दिन भी लग सकते हैं। लेकिन जब दस्त होते हैं तब दस्त के साथ बहुत सारे जीवाणु और विषाणु, जिसकी वजह से ये इन्फेक्शन होता है वो भी बहार निकलते हैं इसलिए दस्त कभी भी बंद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी कोई दवाई न लें और ना ही अपने डॉक्टर से इसके लिए दवाई की मांग करे। अगर कोई इन्फेक्शन या फिर दस्त है जो 14 दिन के ऊपर है तो ये कोई गंभीर स्तिथि हो सकती है और ऐसे केसेस में आपको पेट के स्पेशलिस्ट डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
ORS से जितनी बच्चे की प्यास होती है उतना देना चाहिए। ज्यादातर अगर बच्चा 1 साल के अंदर का है तो 50 से 100 ml तक का ors आप दे सकते हैं। बाकी जो दवाई है वो आपके डॉक्टर की सलाह से वजन के हिसाब से देनी चाहिए और उस उम्र में जिंक की दवाई भी देते है अगर बच्चा छोटा है या फिर 6 महीने के नीचे का तो है दो से ढाई ml उसको दिया जाता है ज्यादातर 14 दिन के लिए बाकि दवाई आप डॉक्टर के सलाह से ही दीजिये।