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डायबिटीज रोगियों का 140/90 mmHg से ऊपर गया बीपी तो हो सकती हैं ये 3 समस्याएं, जानें कौन सी हैं ये समस्याएं
बहुत से लोगों का मानना है कि जिन लोगों को डायबिटीज होती है उन्हें ब्लड प्रेशर की परेशानी जरूर होती है। कोच्चि के अमृता अस्पताल द्वारा कराए गए एक अध्ययन में ये सामने आया है कि 10 में से 6 डायबिटीज रोगियों का ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होता है। इसके अलावा ये भी सामने आया है कि इन 6 में तीन को अतीत में कभी भी हाइपरटेंशन की समस्या नहीं थी। वे डायबिटीज रोगी, जो अनियंत्रित ब्लड प्रेशर की स्थिति से परेशान थे उनमें रेटीनोपेथी, पेरिफेरल न्यूरोपैथी और पेरीफेरल आर्टरियल डिजीज की समस्या अधिक थी।
ये अध्ययन टाइप-2 डायबिटीज के 3 हजार से ज्यादा मरीजों पर किया गया था।
अमृता हॉस्पिटल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. अवस्थी ने डेटा का विश्लेषण करने के बाद ये पाया कि 60 साल की उम्र से अधिक के लोग, जिन्हें डायबिटीज हुए 11 साल से अधिक हो चुके हैं और उनका वजन जरूरत से ज्यादाहै तो उन्हें अनियंत्रित ब्लड प्रेशर का अधिक खतरा होता है।
डॉ. अवस्थी का कहना है कि ये बहुत ही ज्यादा जरूरी है कि मरीज और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को बीपी कंट्रोल करने और उस पर नजर रखने की जरूरत को लेकर ज्यादा जागरूक हो जाना चाहिए। ये चीजें उन्हें रेटीनोपेथी, पेरिफेरल न्यूरोपैथी और पेरीफेरल आर्टरियल डिजीज जैसी डायबिटीज से जुड़ी परेशानियों को हल करने में मदद करेगी।
बता दें कि हाई बीपी ह्रदय स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कारकों को बढ़ाने में काफी मदद करता है।
एर्नाकुलम जिले में ये अध्ययन किया गया था और इस अध्ययन के निष्कर्ष जर्नल फ्रंटियर इन पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुए हैं। इस अध्ययन में डायबिटीज के मरीजों के बीच अनयिंत्रित ब्लड प्रेशर की दर का पता लगाने की कोशिश की गई थी।
उन्होंने कहा कि हाई बीपी होना और डायबिटीज दोनों मिलकर छोटी और बड़ी रक्त वाहिकाओं में जटिलताओं को बढ़ाने का काम करती है, जिसकी वजह से रेटीनोपेथी, पेरिफेरल न्यूरोपैथी और पेरीफेरल आर्टरियल डिजीज होती है। इन सबका मिला-जुला प्रभाव सीधे डायबिटीज रोगी के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
डायबिटीज में अगर रोगी को पहले से हाइपरटेंशन है तो कोरोनरी आर्टरी डिजीजका खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है। वहीं इस बीमारी से मरने और स्ट्रोक का खतरा भी दोगुना हो जाता है। इसके अलावा सभी प्रकार की ह्रदय बीमारियों का खतरा 75 फीसदी तक बढ़ जाता है।
भारत में 20 करोड़ से ज्यादा रोगी हैं और इनमें अभी भी डायबिटीज के होने का पता नहीं चला है। इसलिए बीपी को कम करना डायबिटीज और ह्रदय संबंधी समस्याओं में प्रभावी माना गया है।
डायबिटीज से पीड़ित रोगियों में अगर बीपी 140/90 mmHg के बराबर हो जाता है तो उन्हें एंटी-हाइपरटेंसिव थेरेपी लेनी शुरू कर देनी चाहिए। उन्हें 140/90 mmHg से कम बीपी का लक्ष्य रखना चाहिए। हालांकि डायबिटीज रोगियों को ये लेवल हासिल करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए इन्हें नियमित रपू से बीपी की जांच करते रहना चाहिए।