Diabetes Awareness Month 2021: डायबिटीज से पीड़ित एक तिहाई लोगों में है आंखों से जुड़ी यह समस्या, हो सकते हैं अंधे, एक्सपर्ट से जानें बचाव के उपाय

डायबिटीज के कारण आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है और अंधेपन या विज़न खोने (Vision Loss) का भी खतरा बढ़ सकता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : November 18, 2021 10:27 PM IST

Diabetic Retinopathy : डायबिटीज लाइफस्टाइल से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जो तेज़ गति से दुनियाभर में फैल रही है। आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगभग 77 मिलियन से अधिक है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, मधुमेह के रोगियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। डायबिटिक्स की इसी बढ़ती संख्या के कारण भारत को विश्‍व में डायबिटीज की राजधानी के तौर पर देखा जा रहा है।  रक्त में ब्लड शुगर का लेवल अधिक होने के कारण शरीर के अन्य अंगों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और इससे किडनी और हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है। वहीं, डायबिटीज के कारण आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है और अंधेपन या विज़न खोने (Vision Loss) का भी खतरा बढ़ सकता है।

डायबिटीज में इस स्थिति में जा सकती है आंखों की रोशनी

सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल्‍स, नई दिल्‍ली के मेडिकल डायरेक्‍टर और चेयरमैन डॉ. महिपाल सचदेव इस विषय पर कहते हैं कि, “डायबिटीज के मरीजों की बढ़ती तादाद के साथ यह भी आंकड़े सामने आए कि डायबिटिक रेटिनोपैथी (diabetic retinopathy) मधुमेह से पीड़ित 3 लोगों  में से 1 को प्रभावित करती है।"

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में डायबिटीज  मरीजों बढ़ती संख्या के कारण   लोगों में अंधेपन के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। आंकड़ों की मानें तो, भारत में तकरीबन 1.1 करोड़ लोगों को रेटिना से संबंधित समस्याएं हैं। सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि डायबिटीज से पीड़ित हर 3 में से 1 व्यक्ति में डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या है। बता दें कि, डायबिटिक रेटिनोपैथी एक ऐसा समस्या है जो डायबिटीज के मरीजों में पायी जाती है। डॉ. महिपाल सचदेव के अनुसार डायबिटिक रेटिनोपैथी युवाओं और मिडिल एज वयस्कों में अंधेपन की एक बड़ी और प्रमुख वजह है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचाव के उपाय

डॉ. सचदेव के अनुसार मधुमेह या डायबिटीज के चलते नज़र कमज़ोर होने या अंधेपन को को रोका जा सकता है बशर्ते डायबिटिक्स अपना बहुत ख्याल रखें और कुछ सावधानियां बरती जाएं।  जैसे,

  • जल्द से जल्द इस समस्या का डायग्‍नोसिस और समय रहते इसका इलाज सबसे महत्‍वपूर्ण कदम है।
  • टाइप 1 डायबिटीज या जुवेनाइल डायबिटीज (Type 1 Diabetes) से पीड़ित कम उम्र के लोगों को डायबिटिक रेटिनोपैथी के प्रति संवेदनशील माना जाता है, विशेषर ऐसे लोग जिन्हें  10 साल से अधिक समय से डायबिटीज की बीमारी है।
  • वहीं, टाइप-2 डायबिटीज में भी पीड़ित व्यक्ति में अंधेपन का रिस्क काफी अधिक है। इसीलिए, इस ग्रुप के डायबिटिक्स को भी समय पर जांच और इलाज से जुड़ी सभी सावधानियां बरतनी चाहिए।

डॉ. सचदेव ने कहा कि, “ कोरोना महामारी के दौरान डायबिटीज के मरीजों की समस्याएं काफी अधिक बढ़ गयी हैं और स्थिति पहले की तुलना में अधिक गम्भीर हो चली है। ऐसे में यही सलाह दी जाती है कि डायबिटीज के मरीज नियमित अपनी जांच कराते रहें।”एक्सपर्ट के अनुसार, डायबिटिक रेटिनोपैथी की पुष्टि होने के बाद  हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने और नियमित एक्सरसाइज करनी चाहिए, ताकि इस समस्या को अधिक गम्भीर होने से रोका जा सके।