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Written By: Jitendra Gupta | Published : February 25, 2022 10:12 AM IST
बच्चों में इन कारणों से हो सकती है डायबिटीक रेटीनोपैथी, जानें कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं इनसे परेशान
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि व्यस्त और खान-पान की खराब आदतों ने लोगों को डायबिटीज जैसी बीमारी का शिकार बना दिया है और इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डायबिटीज आज किसी व्यक्ति के लिए कोई नई बीमारी नहीं है और ज्यादातर लोग जानते हैं कि आगे चलकर ये समस्या ह्रदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ा देती है। डायबिटीज सिर्फ दिल को नहीं बल्कि दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचाती है। डायबिटीज रोगियों को किडनी, न्यूरोपैथी और डायबिटीक रेटीनोपैथी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। यहां बात कर रहे हैं हम रेटिनोपैथी की, जिसमें दुनियाभर के लोगों को डायबिटीज की वजह से अपनी आंखों की रोशनी गंवानी पड़ती है।
डायबिटिक रेटीनोपैथी, आपकी रेटिना के पीछे मौजूद रोशनी के संवेदनशील टिश्यू की रक्त वहिकाओं को प्रभावित करती हैं क्योंकि ये डायबिटीज की अवधि पर ज्यादा निर्भर करती है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, अमेरिका में डायबिटिक रेटिनोपैथी के मामले 2050 तक दोगुना हो जाएंगे।
दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डायबिटीज को सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक माना है और बच्चों में इसके बढ़ते मामले काफी चिंताजनक हैं। बचपन में टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज होने से उन्हें आगे चलकर आंखों की रोशनी कम होने के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। इस स्थिति में बच्चों में डायबिटिक रेटिनोपैथी के जोखिम कारकों की समझना बहुत जरूरी हो गया है। आइए जानते हैं ऐसे कारकों के बारे में, जो बच्चों में भी डायबिटीक रेटीनोपैथी का कारण बनते हैं।
हाई ब्लड शुगर लेवल, डायबिटीक रेटीनोपैथी के सबसे बड़े कारणों में से एक है। समय के साथ-साथ ब्लड में शुगर की बढ़ती मात्रा आगे चलकर आपकी रेटिना को नुकसान पहुंचाती है।
वे बच्चे, जिनके परिवार में लोगों को डायबिटीज रही है उन्हें रेटीनोपैथी होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। कई अध्ययन में ये बताया गया है कि किसी भी तरह की डायबिटिक रेटीनोपैथी में आनुवंशिकता प्रभाव 27 फीसदी तक रहता है जबकि प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी 52 फीसदी तक प्रभावित करती हैं, जो कि इस स्थिति की एडवांस स्टेज है।
जरूरत से ज्यादा वजन बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है। वे बच्चे, जो कम सक्रिय होते हैं उनमें डायबिटीज का खतरा अधिक होता है क्योंकि उनमें अधिक फैटी टिश्यू बनने लगते हैं, उनकी कोशकिाएं इंसुलिन में तब्दील होने लगती हैं, जो डायबिटीज रेटिनोपैथी का कारण बनता है।
अगर आपका बच्चा ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहा है तो उसमें डायबिटीक रेटिनोपैथी का खतरा ज्यादा होता है।