
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
बच्चे के ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखकर उसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
type 1 diabetes in children: डायबिटीज एक लाइफस्टाइल डिजीज है, जिसका मतलब है कि यह हमारी खराब जीवनशैली से जुड़ी होती है। हमारे देश की बात करें तो ज्यादातर लोग टाइप 2 डायबिटीज के बारे में अच्छे से जानते हैं, लेकिन बहुत ही कम लोग टाइप 1 डायबिटीज के बारे में जानते हैं। टाइप 1 डायबिटीज ज्यादातर मामलों में जेनेटिक कारणों से होती है और कुछ मामलों में यह लाइफस्टाइल से जुड़ी भी हो सकती है। एक जेनेटिक बीमारी बचपन से ही शरीर में होती है और इस कारण से टाइप 1 डायबिटीज ज्यादातर बच्चों में ही पाया जाता है। वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि टाइप 1 डायबिटीज बड़ों से ज्यादा बच्चों को प्रभावित करता है। इस पर एक्सपर्ट्स भी कुछ राय दे रहे हैं। चलिए जानते हैं बच्चों को टाइप 1 डायबिटीज किस प्रकार से प्रभावित करता है और इसकी रोकथाम कैसे की जा सकती है।
ये दोनों बीमारियां डायबिटीज के अलग-अलग प्रकार हैं। इन दोनों बीमारियों में ही मरीज के खून में शर्करा (ब्लड शुगर) की मात्रा बढ़ने लगती है। लेकिन इन दोनों बीमारियां अलग-अलग कारणों से विकसित होती हैं। उदाहरण के तौर पर टाइप 2 डायबिटीज खराब जीवनशैली से जुड़ी होती है जैसे शारीरिक गतिविधियां न करना और सही डाइट न लेना। वहीं टाइप 1 डायबिटीज एक जेनेटिक कंडीशन है और यह बचपन से ही किसी बच्चे में देखी जा सकती है। हालांकि, इतना नहीं है कि यह बीमारी सिर्फ बचपन तक ही सीमित है, इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे को जीवन भर इस से जूझना पड़ता है।
वैसे तो डायबिटीज हर मरीज के लिए खतरनाक है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि टाइप 1 डायबिटीज छोटे बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरा पैदा करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि छोटी बच्चों का शरीर पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होता है और उनकी इम्यूनिटी भी विकसित हो रही होती है। ऐसे में टाइप 1 डायबिटीज उनके शरीर के विकास और इम्यूनिटी पर गहरा असर डालता है। यही कारण है कि बचपन से ही टाइप 1 डायबिटीज का प्रभाव होने के कारण उन्हें हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा होने लगता है।
इस पर एक्सपर्ट्स ने बताया कि जिस प्रकार टाइप 2 डायबिटीज को बिना इंसुलिन के कंट्रोल किया जा सकता है और यहां तक कि कुछ लोग तो सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाकर बिना दवाएं ही इसे कंट्रोल कर लेते हैं। लेकिन टाइप 1 डायबिटीज में ऐसा संभव नहीं है। टाइप 1 डायबिटीज को सिर्फ इंसुलिन की मदद से ही कंट्रोल किया जा सकता है। टाइप 1 डायबिटीज में अग्न्याशय इंसुलिन नहीं बना पाता है या बहुत ही कम मात्रा में बनाता है और इस कारण से ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन इंजेक्ट करना जरूरी होता है।
डॉक्टर्स का मानना है कि अगर आपके घर में टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित बच्चा है, तो आपके घर में दो चीजें होना बहुत जरूरी है। पहली इंसुलिन व इंजेक्टर व दूसरा ग्लूकोमीटर। टाइप 1 डायबिटीज से ग्रस्त बच्चे का समय-समय पर ब्लड शुगर चेक करना और डॉक्टर के अनुसार सुझाई गई इंसुलिन खुराक समय पर देना बहुत जरूरी है। बच्चे के ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखकर उसे सुरक्षित रखा जा सकता है।