
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Updated : December 5, 2023 11:09 AM IST
Diabetes Symptoms In Feet: डायबिटीज एक गंभीर लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है। इस बीमारी में शरीर में पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है। इसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। अगर डायबिटीज को समय रहते कंट्रोल न किया जाए, तो यह शरीर के बाकी अंगों को डैमेज कर सकता है। डायबिटीज होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें वजन कम होना, बार-बार पेशाब आना और ज्यादा प्यास लगना आदि शामिल हैं। इसके अलावा, डायबिटीज होने पर पैरों में भी कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर समय रहते इनकी पहचान न की जाए, तो पैरों की नसें पूरी तरह डैमेज हो सकती हैं। आज इस लेख में हम आपको पैरों में नजर आने वाले डायबिटीज के लक्षण बता रहे हैं।
डायबिटिक न्यूरोपैथी पैरों की नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके कारण पैरों में दर्द या झुनझुनी महसूस होती है। कई बार पैर सुन्न भी हो जाते हैं। इसके अलावा, यह पाचन, यूरिनरी ट्रेक्ट, रक्त वाहिनियों और दिल की सेहत भी प्रभावित करता है। अगर आपको भी अक्सर पैरों में झुनझुनी महसूस होती है या पैर सुन्न हो जाते हैं, तो आपको तुरंत डाक्टर के पास जाकर चेकअप करवाना चाहिए।
डायबीटिक फुट अल्सर एक खुला घाव होता है, जो लगभग 15% डायबिटीज रोगियों को होता है। यह मुख्य रूप से पर के तलवे पर नजर आता है। इसकी वजह से स्किन खुली हुई नजर आती है। वहीं, कुछ गंभीर मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ सकती है। इससे बचने के लिए ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना जरूरी है।
डायबिटीज के कारण पैरों की नसें डैमेज होने से एथलीट फुट की समस्या हो सकती है। यह एक तरह का फंगल इंफेक्शन होता है, जिसके कारण पैरों में खुजली, दरार और रेडनेस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपको पैरों में ये लक्षण नजर आएं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डायबिटीज होने पर ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिसके कारण पैरों में ब्लड फ्लो सही से नहीं हो पाता है। इसकी वजह से पैरों में रेडनेस और सूजन की समस्या हो सकती है। अगर आपके भी लंबे समय से पैरों में सूजन है, तो आपको इससे नजरंदाज नहीं करना चाहिए।
डायबिटीज के मरीजों को नाखूनों में फंगल इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। इसकी वजह से नाखून का रंग बदल जाता है और नाखून मोटे और टेढ़े-मेढे होने लगते हैं। कुछ मामलों में नाखून अपने आप ही टूटने लगते हैं।
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