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डायबिटीज एक क्रोनिक स्थिति है जिसके मरीजों को अपना ख्याल जिंदगी भर रखना पड़ता है। कुछ समय पहले नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन द्वारा की गयी एक स्टडी में यह पाया गया कि, डायबिटीज की बीमारियों महिलाओं से अधिक पुरुषों में होती है। इस स्टडी में जहां 1.4% महिलाओं में डायबिटीज पाया गया वहीं 2.3% पुरुषों को डायबिटीज से पीड़ित पाया गया। कुछ स्टडीज में यह अनुमान भी लगाया गया है कि, साल 2025 तक भारत की लगभग एक-तिहाई (लगभग 33%) आबादी को डायबिटीज हो सकता है।
डायिबटीज के कई कारण हो सकते हैं जिनमें खराब जीवनशैली, खाने-पीने की गलत या अनहेल्दी आदतें, आनुवांशिक और पर्यावरण से जुड़ी परिस्थितियां आदि। वहीं, शरीर का बढ़ता वजन और शरीर में इंसुलिन का उत्पादन सही तरीके से ना हो पाने जैसी स्थितिया भी टाइप-2-डायबिटीज का कारण बन सकती है। वर्तमान में भारत में मिडिल एज और कम उम्र के लोगों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या काफी अधिक है। इसमें कामकाजी लोग भी शामिल हैं, और उनमें ऐसे लोग भी हैं जो अपनी नौकरी या व्यवसाय के साथ-साथ अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। ऐसे लोगों के लिए समय पर खाने-पीने, सोने और एक्सरसाइज करने का समय नहीं मिल पाता। ऐसे में उनका ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है और डायबिटीज से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

अगर अगर आपके पिता डायबिटीज के मरीज हैं और आप डायबिटीज मैनेजमेंट में उनकी मदद करना चाहते हैं तो इस तरीके से कर सकते हैं आप उनकी मदद। इस फादर्स डे अपने पापा को उनकी जिम्मेदारियों और काम के बीच ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने और डायबिटीज से जुड़ी परेशानियों का खतरा कम करने के लिए क्या कर सकते हैं, इस बारे में होस्मत हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु के सीनियर कंसलटेंट - इंटरनल मेडिसिन, डायबिटोलॉजी और नॉन-इनवेसिव कार्डियोलॉजी,डॉ. सुनील बोहरा (Dr. Sunil Bohra, Senior Consultant – Internal Medicine, Diabetology and Non-Invasive Cardiology, Hosmat Hospitals, Bengaluru) ने कुछ आसान और महत्वपूर्ण सुझाव दिए जिनके बारे में आप बढ़ सकते हैं यहां इस लेख में आगे।
“टाइप 2 डायबिटीज को मैनेज करने के लिए लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव करने पड़ते हैं, समय पर दवाएं लेना और ब्लड ग्लूकोज का लेवल चेक करते रहना है और इन सभी के लिए प्लानिंग की ज़रुरत होती है।" यह कहना है होस्मत हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु के सीनियर कंसलटेंट - इंटरनल मेडिसिन, डायबिटोलॉजी और नॉन-इनवेसिव कार्डियोलॉजी, डॉ. सुनील बोहरा का। डॉ.बोहरा कहते हैं कि, "डायबिटीज के प्रबंधन में टेक्नोलॉजी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि टेक्नोलॉजी की मदद से डायबिटीज मैनेजमेंट के काम में आसानी हो सकती है। आप एडवांस ग्लूकोमीटर से जहां ब्लड शुगर लेवल से जुड़े सटीक रिल्ट पा सकते हैं वहीं, फोन में दवाइयां लेने का समय और हेल्थ चेकअप्स की तारीखें नोट करना और उनका रिमाइडंर लगाना, ब्लड ग्लूकोज लेवल का ट्रैक रखने में सहायता होती है।"
डॉ. बोहरा कहते हैं कि इन सबके साथ आप कुछ छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखकर अपने प्रि-डायबिटिक या डायबिटिक पिता की स्थिति को बेहतर तरीके से और आसानी से मैनेज करने में सहायता कर सकते हैं।
कई स्टडीज के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों का वजन ज्यादा होता है और इस मोटापे की वजह से उन्हें अथेरोस्क्लेरोसिस से जुड़ी परेशानियां जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों का रिस्क भी बढ़ जाता है। इसीलिए नियमित एक्सरसाइज करना आवश्यक और महत्वपूर्ण है। रोजाना एक्सरसाइज करने के लिए एक समय निश्चित करें और उसी वक्त नियमित एक्सरसाइज करें। रोजाना 15-20 मिनट की एक्सरसाइज भी काफी होगी। तैराकी, साइक्लिंग, जॉगिंग और एरोबिक्स जैसी हल्की-फुल्की और कम समय लेने वाली एक्सरसाइजेस आपके लिए अच्छा पर्याय साबित हो सकती हैं।
हमारे रोजमर्रा के खान-पान में कई रिफाइंड और प्रोसेस्ड फूड का इस्तेमाल बहुत अधिक होता है जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं और ब्लड शुगर लेवल बढ़ा सकते हैं। इससे, डायबिटीज के मरीजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसीलिए इन फूड्स के सेवन से बचना चाहिए। बोतलबंद जूस, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कैंडी, कुकीज और मैदे से बने खाद्य-पदार्थों में रिफाइंड चीनी और प्रोसेस्ड सामग्री की मात्रा बहुत अधिक होती हैं इसीलिए, इनसे पहेज करें।

सिगरेट या तम्बाकू के सेवन से उत्पन्न होने वाले विषैले पदार्थ डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकते हैं। स्मोकिंग या धूम्रपान से ग्लूकोज का लेवल बढ़ सकता है और इससे धमनियों को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसीलिए, डायबिटीज को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए स्मोकिंग से परहेज करना चाहिए।
डायबिटीज की बीमारी को नियंत्रण में रखने के लिए सबसे जरूरी है आपके रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को संतुलित रखना। इसीलिए, डायबिटीज मरीजों को अपने ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव पर नजर रखने की सलाह उनके डॉक्टरों द्वारा दी जाती है। अपने डॉक्टर से परामर्श करें और अपने लिए किसी बेहतर शुगर चेकिंग डिवाइस का चयन करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, सवेरे खाली पेट और दिन में भोजन के बाद अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करें और किसी डायरी में इसे लिखकर भी रखें। ब्लड ग्लूकोज लेवल पर ध्यान देनें से आपको अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करने, सही तरीके की एक्सरसाइज चुनने और रक्त में शर्करा के लेवल को नियंत्रित करने वाली डाइट की प्लानिंग करने में सहायता हो सकती है।

किसी भी पिता के लिए रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों की वजह से होने वाले तनाव और चिंता से बच पाना मुश्किल ही होता है। अपने दफ्तर में काम से जुड़े तनाव के अलावा बच्चों की पढ़ाई, उनकी स्कूल फीस, बच्चों का स्वास्थ्य और बच्चों के साथ-साथ परिवार के भविष्य की प्लानिंग से जुड़ा तनाव या चिंता हर पिता के जीवन हमेशा बनी रहती है। इन सारी चीजों के लिए कड़ी मेहनत करते हुए आप अपनी मेंटल हेल्थ के लिए थोड़ा समय जरूर निकालें। गौरतलब है कि तनाव की वजह से शरीर में विभिन्न प्रकार के हार्मोन्स का निर्माण होता है जो ब्लड शुगर लेवल को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकते हैं। इसीलिए, अपने पिता को तनाव से बचने और उनका तनाव कम करने में सहायता करें। तनाव कम करने के लिहाज से योगऔर मेडिटेशन या ध्यान करना लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही 8 घंटे की भरपूर नींद सोने और खुली हवा में टहलने के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित करें।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गयीं बीमारी से संबंधित सभी जानकारियां और डाइट टिप्स सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी हैं। किसी भी सुझाव पर अमल करने या किसी बीमारी के इलाज से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले अपने डॉक्टर या किसी एक्सपर्ट का परामर्श लें।)