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डायबिटीज़ में आंखों का यूं रखें ख्याल, एक्सपर्ट टिप्स!

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में डायबिटीज़ के मामले 2030 तक और बढ़ सकते हैं।

डायबिटीज़ के मरीज़ों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण भारत में इस बीमारी की समस्या बहुत गंभीर होती जा रही है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में डायबिटीज़ के मामले 2030 तक और बढ़ सकते हैं। यह सच है कि डायबिटीज़ वाले लोगों को बाकी लोगों की तुलना में अंधेपन का ख़तरा अधिक होता है, लेकिन यह भी सच है कि डायबिटीज़ वाले अधिकांश लोग इन समस्याओं का खतरा कम कर सकते हैं। नई दिल्ली के फोर्टिस हॉस्पिटल में एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अजय अग्रवाल बता रहे हैं इसी के बारे में विस्तार से।

डायबिटीज़ में आंखों का यूं रखें ख्याल-

  • हाई ब्लड शुगर लेवल डायबिटीज़ से जुड़ी आंखों की सभी बीमारियों के लिए जिम्मेदार है। इसीलिए ब्लड शुगर को नॉर्मल रेंज में बनाए रखें। एचबीए1सी लेवल साल में कम से कम 2 बार टेस्ट कराना चाहिए और इसका लक्ष्य 7 प्रतिशत से कम होना चाहिए।
  • डॉक्टर से बार-बार मिलें। जब किसी व्यक्ति में डायबिटीज़ का पता लगाया जाता है, तो यह ज़रूरी हो जाता है कि वह हर साल अपनी नज़र और आंखों का टेस्ट कराए।
  • शराब से दूर रहना और धूम्रपान बंद करना बेहतर होता है। क्योंकि नुकसानदायक केमिकल आंखों के लिए जोखिमभरे साबित हो सकता है और नतीज़तन, डायबिटीक रेटिनोपैथी का कारण बन सकता है।
  • अपने डॉक्टर से डायबिटीज़ से संबंधित दवाओं, डायट प्लान, एक्सरसाइज़ और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए ब्लड ग्लूकोज़ मॉनिटरिंग के बारे में बात करें। आपका डॉक्टर आपको इंसुलिन की सलाह भी दे सकता है, अगर आपका एचबीए1सी लेवल 7.5% से ज़्यादा हो या बीमारी का पता लगाने के समय ओएडी लेने के बाद भी अगर यह 9% से ज़्यादा हो। डायबिटीज़ कॉम्पिलकेशन एंड कंट्रोल ट्रायल यह साबित करता है कि औसत ब्लड शुगर लेवल में हर बार होनेवाली 10% की कमी, एचबीए1सी लेवल में भी दिखायी पड़ती है। यह डायबिटीज़ रेटिनोपैथी के जोखिम को 60% तक कम करता है और पहले से मौजूद डायबिटीक रेटिनोपैथी के जोखिम को बढ़ने की संभावना 43% तक कम करता है।

डायबिटीज़ पर कंट्रोल करने से न केवल आपकी आंखों को हेल्दी रखने में मदद होती है साथ ही डायबिटीज़ से जुड़ी सभी समस्याओं को रोकने में भी मदद होती है । इसीलिए  डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए एक  हेल्दी लाइफस्टाइल ज़रूरी है। एक हेल्दी डायट, नियमित एक्सरसाइज, वेट लॉस और सही दवाएं लेना, ये सभी फायदेमंद हैं। नोवो पेन, पतली सुइयों और होम ब्लड ग्लूकोज डिलीवरी डिवाइस जैसी आधुनिक इंसुलिन डिलीवरी उपकरणों ने डायबिटीज़ के प्रबंधन को काफी आसान बना दिया है। मधुमेह को कंट्रोल करें, अपनी आंखों की नियमित जांच कराएं और अपनी नज़र को बचाएं।

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