किडनी और आंखें ही नहीं दिमाग को भी बर्बाद कर सकता है डायबिटीज, इन लोगों की मेंटल हेल्थ बिगड़ती है सबसे पहले

World Diabetes Day 2024: डायबिटीज शरीर के अंदरूनी अंगों को ही नहीं बल्कि आपके ब्रेन को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 14, 2024 1:47 PM IST

Diabetes can harm patient's brain: डायबिटीज से पीडित कई लोगों को तनाव, चिंता या डिप्रेशन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। डायबिटीज से पीड़ित युवाओं में मानसिक, भावनात्मक या व्यवहार संबंधी विकार या विकासात्मक या भाषा संबंधी विकार होने की संभावना मधुमेह से पीड़ित लोगों की तुलना में लगभग दोगुनी होती है। मधुमेह से पीड़ित 2 से 11 वर्ष की आयु के युवाओं में मधुमेह से पीड़ित न होने वाले समान आयु के युवाओं की तुलना में एमबीडीडी की संख्या दोगुनी से भी अधिक थी।

दिल्ली स्थित अपोलो डायग्नोस्टिक के कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट डॉ. तनिश मंडल  बताते हैं कि, डायबिटीज की बीमारी तब होती है जब शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन करने में असमर्थ होता है या इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है। इंसुलिन एक हार्मोन है जो आपके शरीर में रक्त में ग्लूकोज या शुगर के स्तर को नियंत्रित करने मे मदद करता है। इंसुलिन के बिना, आपका ब्लड शुगर लेवल चिंताजनक स्तर तक बढ़ सकता है जिसके परिणामस्वरूप गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स और हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।

डायबिटीज से इन ऑर्गन्स को पहुंचता है नुकसान

बता दें कि, मधुमेह या डायबिटीज के दो प्रकार होते हैं, टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज।  बच्चों और युवाओं में टाइप 1 डायबिटीज अधिक पाया जाता है।  टाइप 2 डायबिटीज, जो अक्सर जीवनशैली से जुड़े  कारणों से होता है। डायबिटीज की बीमारी में हार्ट डिजिज, किडनी डैमेज, आंखों से जुड़ीं समस्याएं और संक्रमण जैसी समस्याओं का रिस्क बढ़ जाता है। वहीं, डायबिटीज के लक्षणों की बात की जाए तो इसमें लोगों को घाव भरने में भी बहुत लम्बा समय लग जाता है जिससे उन्हें घाव की जगह पर कुछ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

इमोशनल और मेंटल हेल्थ पर पड़ता है डायबिटीज का गम्भीर असर

डॉ. मंडल के अनुसार, डायबिटीज न केवल शारीरिक रूप से बल्कि भावनात्मक स्तर पर भी कई गम्भीर प्रभाव डालता है। खासकर डायबिटीज मरीजों की मेंटल हेल्थ पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ सकता है। डायबिटीज से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों से निपटना बच्चों और युवाओं के लिए तनावपूर्ण हो सकता है। यह निराशा, उदासी, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, तनाव और डिप्रेशन जैसी  भावनाएं पैदा कर सकता है। इन समस्याओं से बचने के लिए एक डिसिप्लिन्ड लाइफस्टाइल बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसमें व्यक्ति को समय-समय पर अपने ब्लड शुगर लेवल को चेक करना, खान-पान पर ध्यान देना और समय पर दवाएं लेने जैसे नियम फॉलो करने चाहिए।

डॉ. मंडल कहते हैं, हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर लेवल ) या हाइपरग्लाइसीमिया (हाई ब्लड शुगर लेवल) जैसी स्थितियां बार-बार बनने से डायबिटीज मरीजों में हमेशा डर बना रहता है। इससे, उनकी मेंटल हेल्थ पर भी गम्भीर असर पड़ सकता है। वहीं, धीरे-धीरे डायबिटीज मरीजों में लोगों से अलग-थलग रहने, इटिंग डिसॉर्डर्स और आत्मविश्वास कम होने जैसे भावनात्मक बदलाव  भी देखे जा सकते हैं। वहीं, डायबिटीज की वजह से  लोगों के रिश्ते अपने परिवार, दोस्तों और जान-पहचान वालों के साथ भी बदल सकते हैं।

डायबिटीज में मेंटली हेल्दी रहने के लिए क्या करना चाहिए?

  • डायबिटीज को मैनेज करने की प्रक्रिया में अपनी भावनाओं और डर के बारे में अपने  दोस्तों, परिवार के सदस्यों और डॉक्टर से  बात करें और उनकी मदद लें।  यह आपको इमोशनल सपोर्ट पाने में मदद कर सकता है जो आपके तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकता है।
  • अपनी हेल्थ की जिम्मेदारी लें और डायबिटीज से जुड़ी अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें और खुद को अपडेटेड रखें। सही जानकारी मिलने से आपको खुद को शांत और स्ट्रेस-फ्री रखने में मदद हो सकती है।
  • योग, ध्यान,  प्राणायाम और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज का अभ्यास करने से तनाव को कम करने और अपनी भावनात्मक कमजोरी को कम करने में मदद हो सकती है।
  • अपने खान-पान और डाइट की आदतों पर भी ध्यान दें। हेल्दी  और संतुलित भोजन खाएं। मीठी चीजों और शक्कर से बनने वाले फूड्स का सेवन करने से बचें।
  • अपने डॉक्टर के पास जाना न छोड़ें। अच्छे रिजल्ट्स के लिए लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव करें।
  • अपना ब्लड शुगर लेवल रेग्यूलर लेवल पर चेक करें और उसमें होने वाले बदलावों पर ध्यान दें।
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