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Effect Of Diabetes On Male Fertility: आजकल के गलत खानपान और खराब जीवनशैली के कारण डायबिटीज एक आम समस्या बन चुकी है। डायबिटीज होने पर पैंक्रियाज में इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है या बंद हो जाता है, जिसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी शरीर के कई प्रमुख अंगों को डैमेज कर देती है। डायबिटीज का असर न सिर्फ शरीर के दूसरे हिस्सों पर होता है, बल्कि पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। टाइप-1 और टाइप-2, दोनों डायबिटीज पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर, डायबिटीज के कारण पुरुषों में स्पर्म की संख्या और उनकी गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है, जिससे उनकी संतान उत्पन्न करने की क्षमता कम हो सकती है। आज इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि डायबिटीज का पुरुषों के प्रजनन पर क्या असर होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है। तो आइए, जानते हैं विस्तार से -
डायबिटीज से पीड़ित पुरुषों में स्पर्म की संख्या कम हो सकती है। शरीर में बढ़ी हुई शुगर का असर स्पर्म के निर्माण पर पड़ता है। इससे स्पर्म की संख्या घट जाती है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
डायबिटीज के कारण स्पर्म की गति (मोटिलिटी) भी धीमी हो सकती है। स्पर्म को अंडाणु तक पहुंचने के लिए तेज गति की जरूरत होती है। लेकिन डायबिटीज से उनकी गति कमजोर पड़ जाती है, जिससे गर्भधारण मुश्किल हो सकता है।
डायबिटीज के कारण स्पर्म के डीएनए में भी खराबी आ सकती है। खराब डीएनए से भ्रूण (गर्भ में पल रहा शिशु) का विकास ठीक से नहीं होता और गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।
डायबिटीज पुरुषों में हार्मोन का स्तर बिगाड़ सकता है। खासकर, टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को। यह हार्मोन स्पर्म के उत्पादन और यौन इच्छा के लिए जरूरी है। डायबिटीज से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है, जिससे स्पर्म की संख्या और यौन इच्छा कम हो सकती है।
डायबिटीज पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नपुंसकता) की समस्या भी ला सकता है। डायबिटीज के कारण नसों और रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है, जिससे यौन क्षमता कमजोर हो जाती है और प्रजनन में दिक्कत आ सकती है।
शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल रखने के लिए अपने आहार में ज्यादा फाइबर, हरी सब्जियां और फल शामिल करने चाहिए। इसके अलावा, प्रोसेस्ड फूड्स, जंक फूड और मीठे का सेवन न करें।
रोजाना व्यायाम करने से शरीर में ब्लड शुगर का स्तर संतुलित रहता है। इसलिए रोजाना कम से कम 30 मिनट योग और व्यायाम जरूर करें।
अत्यधिक धूम्रपान और शराब के सेवन स्पर्म की गुणवत्ता को कमजोर हो सकती है। ऐसे में, इस तरह के नशीले पदार्थों से दूरी ही बनाकर रखें।
तनाव के कारण ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। नियमित रूप से ध्यान और योग करने से तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे शरीर और मन स्वस्थ रहते हैं।
समय-समय पर अपने ब्लड शुगर की जांच करवाते रहें और डॉक्टर की सलाह से ही उपचार लें। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल ज्यादा है, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां या इंसुलिन लेना बहुत जरूरी है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।