बार-बार इंजेक्शन लगाने से मिलेगा छुटकारा? किडनी ट्रांसप्लांट के बाद एनीमिया में कारगर दिखी ये गोली

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को एनीमिया होने का खतरा रहता है, जिसे दूर करने के लिए अबतक इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन अब एक नई रिसर्च आई है, जिसमें एक खास तरह की दवा से एनीमिया को दूर किया जा सकता है। आइए जानते हैं-

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Written By: Kishori Mishra | Published : May 4, 2026 12:28 PM IST

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद नई किडनी के साथ तालमेल बैठाने में कुछ समय लगता है। यह स्थिति किसी भी मरीज  के लिए चुनौती से कम नहीं होता है। इस स्थिति में कई बार उन्हें एनीमिया होने का खतरा रहता है। इस दौरान मरीजों को काफी ज्यादा थकान, कमजोरी, सांस फूलना और रिकवरी की रफ्तार धीमी होने जैसी परेशानियां होने लगती हैं। जल्दी रिकवरी के लिए डॉक्टर्स इंजेक्शन लगाने की सलाह देते हैं। लेकिन अब किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों के लिए एक अच्छी  खबर सामने आई है। एक नई स्टडी में डेसिडुस्टैट नाम की दवा को इस समस्या के इलाज में असरदार पाया गया है। यह इंजेक्शन नहीं, बल्कि खाने वाली गोली है, जिससे मरीजों का इलाज ज्यादा आसान हो सकता है।

क्या है पोस्ट-किडनी ट्रांसप्लांट एनीमिया?

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद भी कई मरीजों में खून की कमी बनी रह सकती है। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जो निम्न हैं-

  • शरीर द्वारा पर्याप्त रूप से एरिथ्रोपोइटीन हार्मोन न बनना
  • आयरन की कमी न होना
  • इम्यूनोसप्रेसेंट दवाओं का असर
  • शरीर में सूजन या इंफ्लेमेशन
  • किडनी फंक्शन का पूरी तरह सामान्य न होना, इत्यादि।

एनीमिया की वजह से मरीज अक्सर कमजोरी महसूस करते हैं और उनकी रिकवरी प्रभावित हो सकती है।

स्टडी में क्या सामने आया?

जर्नल नेफ्रोलॉजी में प्रकाशित इस रिसर्च में पाया गया कि डेसिडुस्टैट लेने वाले मरीजों में हीमोग्लोबिन लेवल में अच्छा सुधार देखा गया। इसका असर पारंपरिक इलाज एरिथ्रोपोइटीन (EPO) इंजेक्शन के बराबर पाया गया। साथ ही, शॉर्ट-टर्म फॉलोअप में इसकी सहनशीलता भी अच्छी रही।

कैसे काम करती है यह दवा?

एरिथ्रोपोइटीन शरीर में ऐसे बायोलॉजिकल सिग्नल्स को एक्टिव करती है, जो प्राकृतिक रूप से EPO हार्मोन बनने में मदद करते हैं। यही हार्मोन बोन मैरो को ज्यादा रेड ब्लड सेल्स बनाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे हीमोग्लोबिन बढ़ता है और एनीमिया में सुधार होता है।

क्यों खास है यह इलाज?

इस दवा की सबसे बड़ी खासियत इसकी ओरल फॉर्म है। अभी तक एनीमिया के कई इलाज इंजेक्शन के जरिए दिए जाते हैं, जिनमें अस्पताल विजिट और बार-बार इंजेक्शन लेने की परेशानी होती है। ऐसे में डेसिडुस्टैट मरीजों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है, जैसे-

  1. इससे इंजेक्शन की जरूरत कम होगी।
  2. घर पर आसानी से दवा लेना आसान हो सकता है।
  3. इलाज के दौरान बेहतर सुविधा मिलेगी।
  4. मरीजों की दवा लेने की नियमितता बढ़ सकती है।
  5. क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर हो सकती है।

क्या आगे और रिसर्च की जरूरत है?

एक्सपर्ट का कहना है कि शुरुआती नतीजे काफी अच्छे हैं, लेकिन लंबे समय तक इसके असर और सुरक्षा को समझने के लिए बड़े स्तर पर और रिसर्च की जरूरत है। फिर भी, पोस्ट-किडनी ट्रांसप्लांट एनीमिया के इलाज में यह एक पेसेंट फ्रेंडली ऑप्शन बनकर उभर सकती है।

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद एनीमिया मरीजों की रिकवरी पर बड़ा असर डाल सकता है। ऐसे में एरिथ्रोपोइटीन जैसी ओरल दवा इलाज को आसान, सुविधाजनक और असरदार बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।

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