डिप्रेशन का इलाज सिर्फ दवाएं नहीं बल्कि अपनो से बात करना भी जरूरी है, एक्सपर्ट ने दी सही जानकारी

डिप्रेशन का इलाज करने के लिए दवाएं जरूरी होती हैं या फिर अपनों से बात करना इस बारे में आपका क्या विचार है। इस लेख में हम एक्सपर्ट्स से इस बारे में कुछ जरूरी सलाह लेंगे और जानेंगे आखिर कैसे डिप्रेशन का इलाज किया जा सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 6, 2026 9:01 PM IST

डिप्रेशन एक दिमागी स्वास्थ्य की बीमारी है, जिसमें व्यक्ति हमेशा उदास और थका हुआ महसूस करता है। डिप्रेशन के दौरान व्यक्ति के मन में ऐसी भावनाएं रहने लगती हैं कि जिन कामों में उसका पहले मन लगता था, उनमें भी उसकी दिलचस्पी खत्म हो जाती है। यह बीमारी इंसान के सोचने, समझने, महसूस करने और काम करने की क्षमता को प्रभावित होती है साथ ही में दुनिया को देखने के नजरिया भी पूरी तरह से बदल जाता है। डिप्रेशन का मतलब सिर्फ उदास होना नहीं होता बल्कि इससे व्यक्ति की पूरी भावनाएं प्रभावित हो जाती हैं। इसमें इंसान का किसी से मिलने या बिस्तर से उठने तक का मन नहीं करता, वह लोगों से दूर होने लगता है और ज्यादातर समय अकेला महसूस करता है। डिप्रेशन से जूझ रहा व्यक्ति सब से दूरी बना लेता है। उसे लगता है कि लोग उसे गलत समझ रहे हैं, उसकी कोई कीमत नहीं है, या फिर उसे अपनी इस परेशानी से अकेले ही लड़ना पड़ेगा। यही वजह है कि ऐसे लोगों के लिए दूसरों से बात करना बहुत मुश्किल हो जाता हैं। ऐसे में सवाल आता है कि क्या सिर्फ दवाएं ही हैं डिप्रेशन का इलाज? Lyfsmile की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट स्नेहा शर्मा ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।

क्या सिर्फ दवाएं हैं डिप्रेशन का इलाज

कुछ लोगों को लगता है कि डिप्रेशन का इलाज सिर्फ दवाओं से ही हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। क्योंकि सिर्फ दवाओं डिप्रेशन का इलाज नहीं कर सकती बल्कि उसके साथ-साथ बहुत सी चीजें महत्वपूर्ण हैं जिनमें से एक है अपनों से बात करना। यहां इस बात पर ध्यान देना भी जरूरी है कि अपनों से बात करने का मतलब यह नहीं है कि सिर्फ अपने परिवार वालों से बल्कि अपनों का यहां मतलब उन लोगों से है जिनके सामने व्यक्ति खुद को सुरक्षित, समझा हुआ और खास महसूस करे, बहुत हिम्मत मिलती है।

क्या सिर्फ अपनों से बात करना ही काफी है?

ऐसा भी नहीं है कि कोई व्यक्ति सिर्फ अपनों से बात करके ही अपने डिप्रेशन को ठीक कर सकता है, कुछ मामलों में ऐसा शायद हो भी जाए लेकिन डिप्रेशन के गंभीर मामलों में ऐसा नहीं होता है। इसलिए यह इस बात पर निर्भर करता है कि डिप्रेशन कितना गंभीर है। हल्के से मध्यम स्तर के डिप्रेशन में हमेशा दवा की जरूरत नहीं होती, जबकि गंभीर डिप्रेशन में दवा लेना बहुत जरूरी हो जाता है। लेकिन डिप्रेशन चाहे किसी भी स्तर का हो, अपनों का साथ और प्यार इंसान को जल्दी ठीक होने और जीवन में सकारात्मकता लाने में बहुत मदद करता है।

क्यों जरूरी हैं दोनों चीजें एक साथ

डिप्रेसिव स्टेट से बाहर निकलने के लिए दवा और अपनों से बात करना दोनों ही चीजें जरूरी हैं और ऐसा इसलिए है क्योंकि दवा आपके दिमाग में तनाव पैदा करने वाले स्ट्रेस हार्मोन का संतुलन बनाने में मदद दवाएं ही करेंगी। वहीं दूसरी तरफ, आपकी भावनाओं को संभालने का काम अपनों से बात करके मिलने वाली थेरेपी करती है। ऐसे में अगर आपके पास कोई ऐसा व्यक्ति है जिससे आप दिल की बात कह सकें, तो उससे आपको भावनात्मक सुरक्षा और हिम्मत मिलती है।

अगर आप डॉक्टर के निर्देश के अनुसार नियमित रूप से दवाएं लेते रहेंगे तो आपके दिमाग के अंदर का केमिकल बैलेंस भी ठीक होने लगेगा और अपनों से बात करते हुए आपकी भावनाएं स्थिर होने लगेंगे, जिससे आपके मन में कोई नकारात्मक विचार नहीं आएगा।

डिसक्लेमर: मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा किसी योग्य मनोचिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श लें। आपातकालीन स्थिति में तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और और इसका उद्देश्य केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।