
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : June 26, 2018 4:18 PM IST
ऑफिस और घर के कामों की भाग-दौड़ के बीच अक्सर हमें सिरदर्द, बदन दर्द या हल्के बुख़ार की शिकायतें होती हैं और इसका सबसे आसान इलाज समझकर लोग एक पेन किलर खा लेते हैं। लेकिन जैसा कि हम सभी जानते हैं कि दवाओं के भी साइड इफेक्ट्स होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेन किलर खाने से हमारे शरीर पर किस तरह के प्रभाव पड़ते हैं। पेन किलर्स के साइड-इफेक्ट्स जानने के लिए पढ़ें यह पूरा आर्टिकल:-
ड्रग एडिक्शन: यह एक ऐसी समस्या है जिससे पूरी दुनिया में लोग परेशान हैं, तो वहीं अमेरिका में पेन किलर के गलत इस्तेमाल की वजह से कई बड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। दवाइयों का बेधड़क सेवन लत में तब्दील हो सकता है जिसका इलाज आगे चलकर डॉक्टरों के लिए भी काफी मुश्किल बन जाता है।
किडनी को नुकसान: आप जो भी दवाई लेते हैं वो आपके खून में मिल जाती है और फिर किडनी से फिल्टर होने के बाद ही शरीर से निकली है। इस प्रक्रिया में, ये ड्रग किडनी तक हो रहे खून के बहाव को प्रभावित कर सकता है जिससे कि एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है या किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। एक अध्ययन के मुताबिक, इस तरह की दवाओं के कारण ही 20 प्रतिशत से ज्यादा किडनी फेलियर के मामले होते हैं।
डिप्रेशन: जी हां, पेनकिलर भी आपके डिप्रेशन का कारण हो सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि ओपिऑड जैसे पेन किलर्स का लंबे वक्त तक इस्तेमाल करने से डिप्रेशन हो सकता है। एक अध्ययन के मुताबिक ओपिऑड बहुत दिनों तक खाने से डिप्रेशन का खतरा 53 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
सिरदर्द और फ्लू: नेशनल इंस्टिट्यूटफॉर हेल्थ एंड क्लीनिकल एक्सीलेंस (एनआईसीइ) के अनुसार सिरदर्द के लिए पैरासिटामोल, एस्प्रिन और नॉन स्टीरॉइडल एंटी-इनफ्लेमेटरी ड्रग जैसे कि इबूप्रेन (एक महीने में 15 दिन से ज्यादा) आदि खाने वाले लोग ओवयूज़ कर रहे होते हैं। कुछ समय बाद ऐसे लोगों के और ज्यादा सिरदर्द होने लगता है। प्रॉसीडिंग्स ऑफ दि रॉयल सोसाइटी बी में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, फ्लू फीवर को ठीक करने के लिए पेनकिलर खाने से स्थिति और खराब हो सकती है। पेनकिलर फ्लू के बढ़ने के 5% चांस और बढ़ा देती हैं।
हार्ट अटैक: कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल, डेनमार्क के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में ये पाया कि इबूप्रोफेन के अधिक इस्तेमाल से ऐसे लोगों का मृत्यु का जोखिम बढ़ता है जिन्हें कभी हार्ट अटैक हो चुका हो। ऐसे मरीज़ों का ख़तरा, ये दवा खाने के बाद 59% तक बढ़ जाता है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.