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वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे: बुजुर्गों में डिप्रेशन की 5 बड़ी वजहें!

डिप्रेशन को नियंत्रित करने की ओर पहला कदम यही है कि जल्द से जल्द उसकी पहचान की जा सके।

वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे:  बुजुर्गों में डिप्रेशन की 5 बड़ी वजहें!
एक साधारण वयस्क व्यक्ति की तुलना में, एक बुज़ुर्ग व्यक्ति को भावनात्मक सपोर्ट की अधिक ज़रूरत पड़ती है। © Shutterstock

Written by Sadhna Tiwari |Published : October 8, 2018 9:59 PM IST

डिप्रेशन भी एक ऐसी समस्या है जिसका सामना बुज़ुर्गों को करना पड़ता है। एक साधारण वयस्क व्यक्ति की तुलना में, एक बुज़ुर्ग व्यक्ति को भावनात्मक सपोर्ट की अधिक ज़रूरत पड़ती है। अक्सर ज्यादातर बुज़ुर्गों में विभिन्न प्रकार के विचारों के कारण डिप्रेशन अनियंत्रित हो जाता है, जो कि स्थिति को और भी बदतर बना देते हैं। डिप्रेशन से जूझ रहे बहुत कम लोगों के सही इलाज मिल पाता है और इसकी वजह खुद को अच्छी तरह से न समझना, अकेलेपन या छोड़े जाने के डर, सपोर्ट की कमी या किसी और कारण की वजह से बात करने की अनिच्छा है। जहां ज़्यादातर शारीरिक समस्याओं की जांच और इलाज आसानी से किया जाता है, वहीं ज़्यादातर मामलों में मानसिक तकलीफ को कम करने और अच्छे जीवन के लिए निरंतर देखभाल और ध्यान देने की ज़रूरत पड़ती है। डिप्रेशन को नियंत्रित करने की ओर पहला कदम यही है कि जल्द से जल्द उसकी पहचान की जा सके। डॉ. एम उदय कुमार मैया (मेडिकल डायरेक्टर,पोर्टिआ मेडिकल) ने बतायी बुजुर्गों में डिप्रेशन की विभिन्न वजहें-

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  1. असुरक्षा- साधारण लोगों की तुलना में अधिक कमज़ोर होने के कारण, ज्यादातर वरिष्ठ अपनी सुरक्षा के संबंध में निरंतर चिंतित रहते हैं। यह ज़रूरी है कि उन्हें भावनात्मक और शीरीरिक रुप से सुरक्षा का आश्वासन दिलाया जाए।। इसके लिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि घर और बुज़ुर्गों के आसपास का वातावरण हर समय सुरक्षित रहेगा।
  2. ध्यान– बच्चों की तरह बुज़ुर्गों को भी देखरेख और हमारे ध्यान की ज़रूरत होती है। क्योंकि वे दुनिया की रफ्तार के साथ चल नहीं पाते। इसीलिए अपने बुज़ुर्गों की देखरेख का पूरा ख्याल रखें। उनकी खुशी इस बात पर निर्भर करती है कि वे आपके लिए अहम हैं और इसीलिए आप उनका ख्याल रख रहे हैं।
  3. आर्थिक स्वतंत्रता - भले ही आप उनका काफी ख्याल रखते हैं और उनकी सहायता करते हैं। लेकिन फिर भी अधिकांश बुजुर्गों को अब भी उनके जीवन पर कुछ स्वायत्तता या नियंत्रण चाहिए। जो काम वे खुद कर सकते हैं, उन कार्यों के लिए स्वतंत्रता देना महत्वपूर्ण है इसलिए, उन्हें रोज़मर्रा के छोटे-मोटे काम करने दें। इस तरह उन्हें घर का बड़ा-ज़िम्मेदार व्यक्ति होने और कुछ चीज़ों पर अपना नियंत्रण होने की खुशी देगा।
  4. भावनात्मक जुड़ाव- खुद की कीमत कम मानकर खई बुज़ुर्ग खुद को अपने आसपास के सभी लोगों से अलग कर लेते हैं। इसीलिए बुज़ुर्गों की देखभाल करनेवाले लोगों को बुज़ुर्गों और अपने बीच भावनात्मक जुड़ाव फिर से स्थापित करने के लिए पहल करनी चाहिए और ताकि बुजुर्ग महसूस कर सकें कि आपको उनकी ज़रूरत है।
  5. दोस्ती और आत्मीयता– किशोर और नौजवानों की ही तरह, बुज़ुर्गों को भी एक भरी-पूरी ज़िंदगी के लिए प्यार और दोस्ती की ज़रूरत होती है। इसीलिए हमेशा अपने बुजुर्गों को – उन जगहों पर ले जाकर नए दोस्त बनाने का मौका दें जहां उनके आयु वर्ग के अन्य लोग मिलते-जुलते हैं।