Dengue shock syndrome: डेंगू बुखार में बीपी डाउन होना हो सकता है खतरनाक, रहें सावधान!

डेंगू शॉक सिंड्रोम एक खतरनाक अवस्था है। इससे मरीज की जान भी जा सकती है। इसका खतरा सबसे ज्यादा दस वर्ष से कम आयु के बच्चों को होता है। बीपी डाउन होने की वजह से मरीज के मस्तिष्क का तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित होता है।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : September 25, 2019 2:02 PM IST

डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue shock syndrome) एक खतरनाक अवस्‍था है। इससे मरीज की जान भी जा सकती है। इसका खतरा सबसे ज्‍यादा दस वर्ष से कम आयु के बच्‍चों को होता है। बरसात में मच्‍छरों को अधिकाधिक प्रजनन के कारण उनसे फैलने वाली बीमारियों में भी इजाफा हो जाता है। इनमें सबसे ज्‍यादा खतरा डेंगू और मलेरिया का रहता है। डेंगू बुखार को अगर समय रहते काबू कर लिया जाए तो इससे कोई खतरा नहीं।  पर अगर डेंगू शॉक सिंड्रोम हो जाए तो मरीज की जान भी जा सकती है। इसका खतरा सबसे ज्‍यादा दस वर्ष से कम आयु के बच्‍चों को होता है।

क्‍या है डेंगू शॉक सिंड्रोम Dengue shock syndrome

डेंगू शॉक सिंड्रोम अकसर डेंगू बुखार की दूसरी और तीसरी स्‍टेज में होता है। जब कई दिनों तक रहने के बाद बुखार और दर्द बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है। इसमें रोगी का तंत्रिका तंत्र भी बाधित होने लगता है। जिससे वह सदमे की स्थिति में आ जाता है। इसलिए इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है। जबकि रक्‍त धमनियों में रक्‍तस्राव होने के कारण इसे हेमरहेजिक फीवर भी कहा जाता है।

डेंगू शॉक सिंड्रोम के लक्षण

अमूमन डेंगू बुखार होने पर मरीज को तेज बुखार के साथ ही बदन में दर्द होने लगता है। त्‍वचा पर लाल चकत्‍ते उभर आते हैं। इस बुखार के डेंगू शॉक सिंड्रोम में बदलने में थोड़ा समय लगता है। इसमें डेंगू के लक्षण ही और तीव्रता से नजर आने लगते हैं। होंठ नीले पड़ने लगते हैं। बुखार और ज्‍यादा बढ़ जाता है। त्‍वचा पर लाल चकत्‍ते और दाने और ज्‍यादा उभर आते हैं। इसकी सबसे बड़ी पहचान है कि इसमें मरीज की नब्‍ज बहुत धीमे चलने लगती है।

खतरनाक है बीपी डाउन होना

रोगी की नब्‍ज डेंगू शॉक सिंड्रोम के कारण बहुत धीमी चलने लगती है। इसमें ब्‍लड प्रेशर डाउन होना बहुत ज्‍यादा खतरनाक है। यही इसका सबसे बड़ा संकेत भी है। बीपी डाउन होने की वजह से मरीज के मस्तिष्‍क का तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित होता है। जिसकी वजह से वह सदमे में चला जाता है। रक्‍त पहुंचाने वाली धमनियों में स्राव होने लगता है। जिसकी वजह से नाक से और मल से खून आने लगता है। इसलिए इसे डेंगू हेमरहेजिक फीवर (Dengue Hemorrhagic Fever) भी कहा जाता है।

Dengue shock syndrome, Dengue Hemorrhagic Fever, Dengue shock syndrome symptoms, Dengue causes, Dengue fever in kids. treatment, cure from Dengue fever. डेंगू शॉक सिंड्रोम का सबसे ज्‍यादा खतरा दस वर्ष से कम आयु के बच्‍चों को होता है। उनमें कई बार इस सिंड्रोम की पहचान कर पाना भी मुश्किल हो जाता है। © Shutterstock.

छोटे बच्‍चों को ज्‍यादा खतरा

डेंगू शॉक सिंड्रोम का सबसे ज्‍यादा खतरा दस वर्ष से कम आयु के बच्‍चों को होता है। उनमें कई बार इस सिंड्रोम की पहचान कर पाना भी मुश्किल हो जाता है। एक वर्ष से छोटे बच्‍चों की इसके कारण जान भी जा सकती है। इसमें मृत्‍यु का आंकड़ा 30 फीसदी तक है। इसलिए यह जरूरी है कि डेंगू बुखार में तुरंत उपचार शुरू करें और अन्‍य लक्षणों के साथ ही ब्‍लड प्रेशर पर भी नजर बनाए रखें।

बरतें यह सावधानी

डेंगू का अगर समय पर उपचार कर लिया जाए तो यह बहुत ज्‍यादा खतरनाक नहीं होता। डेंगू शॉक सिंड्रोम या डेंगू हेमरहेजिक फीवर से बचने के लिए जरूरी है कि प्रारंभिक अवस्‍था में ही डेंगू का उपचार शुरू कर दिया जाए। इसमें प्‍लेटलेट्स काउंट कम हो जाता है। उसके लिए आयुर्वेदिक उपचारों को भी प्रयोग करें। छोटे बच्‍चों को हमेशा मच्‍छरदानी में सुलाएं। जिससे उन्‍हें मच्‍छर जनित बीमारियों का सामना न करना पड़े।

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