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Dengue Chikungunya : इस टूल से पैदा ही नहीं होंगे बीमारी फैलाने वाले मच्‍छर

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने गहन शोध के बाद एक ऐसा टूल खोज निकाला है जो डेंगूू, चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों को पैदा ही नहीं होने देगा।

Dengue Chikungunya : इस टूल से पैदा ही नहीं होंगे बीमारी फैलाने वाले मच्‍छर
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने गहन शोध के बाद एक ऐसा टूल खोज निकाला है जो डेंगूू, चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों को पैदा ही नहीं होने देगा। © Shutterstock

Written by Yogita Yadav |Published : July 27, 2019 1:30 PM IST

मॉनसून में सबसे ज्‍यादा डर मच्‍छरों से फैलने वाली बीमारियों (Dengue Chikungunya) से होता है। इनमें भी डेंगू और चिकनगुनिया (Dengue Chikungunya) के कारण हर साल लाखों लोग दुनिया भर में बीमार होते हैं। इसकी रोकथाम के लिए वैज्ञानिक लगातार परीक्षण कर रहे हैं। इस श्रृंखला में अमेरिकी वैज्ञनियों ने एक नया टूल ढूंढ निकाला है। जो बीमारी (Dengue Chikungunya) को ही जड़ से खत्‍म कर देगा।

ऐसे फैलता है डेंगू-चिकनगुनिया  (Dengue Chikungunya)

डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है। मच्‍छरों से फैलने वाली अन्‍य बीमारियां जैसे चिकनगुनिया, मलेरिया आदि के फैलने का भी यही समय होता है। इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता।

वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका (Dengue Chikungunya)

वैज्ञानिकों ने इन वायरस का संक्रमण फैलाने वाले मादा एडीज एजिप्टी मच्छर को नियंत्रित करने का तरीका ढूंढ़ लिया है। उन्होंने एक ऐसा टूल बनाया है जो अंडे देने के लिए जगह तलाश रही मादा मच्छर को अपना निशाना बनाएगा।

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क्‍या है यह नया टूल (Dengue Chikungunya)

शोधकर्ताओं का कहना है कि ऑटोसाइडल ग्रेविड ओवीटै्रप टूल (एजीओ) की मदद से चिकनगुनिया को हराया जा सकेगा। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेशन के वैज्ञानिक ने कहा कि इस रसायन मुक्त टूल से चिकनगुनिया के संक्रमण से सुरक्षा मिलेगी। प्यूर्टोरिको में इस टूल का परीक्षण किया गया था, जो सफल रहा।

इस तरह किया गया परीक्षण (Dengue Chikungunya)

अध्ययन के लिए 639 घरों को चुना गया था जिसमें 290 घरों में एजीओ ट्रैप उपलब्ध कराए गए। फिर, जिन घरों में एजीओ ट्रैप दिए गए थे उनमें से 175 व्यक्तियों और अन्य घरों के 152 लोगों के रक्त के नमूने की जांच की गई। एजीओ ट्रैप वाले घर के केवल उन 10 फीसदी लोगों में ही चिकनगुनिया के लक्षण मिले जो ज्यादातर समय बाहर रहते थे। अन्य घरों के करीब 48.7 फीसदी लोगों में इसके लक्षण मौजूद थे।

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