... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
एशिया में लगातार बढ़ रही है डिमेंशिया ग्रस्त लोगों की संख्या।© Shutterstock
अल्जाइमर डिमेंशिया का ही एक रूप है, जिसका असर याददाश्त पर होता है। यह एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जो मस्तिष्क कोशिकाओं के लगातार नुकसान के कारण होती है। इस समय विश्व भर में हालात ये हैं कि हर तीसरे सैकेंड एक व्यक्ति अपनी याददाश्त खो रहा है।
भागती-दौड़ती जिंदगी के तनाव, सही खानपान व कसरत की कमी और बढ़ती उम्र जैसे कई कारण हमारी याददाश्त छीनने में लगे हुए हैं। डिमेंशिया के ही एक प्रकार अल्जाइमर में खासतौर से बुजुर्ग धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगते हैं। हालांकि सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि बच्चे भी इस बीमारी की गिरफ्त में आने लगे हैं। विश्व अल्जामइर दिवस के मौके पर आइए जानते हैं इस खतरे के बारे में।
डराते हैं आंकड़ेें
विश्व भर में 4.68 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैैं। 2030 तक इनकी संख्या 7.47 करोड़ पहुंचने की आशंका है। जबकि वर्ष 2050 तक इनकी संख्या 13.15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है ।
भयावह है स्थिति
चीन-अमेरिका के बाद भारत का नंबर
यह भी पढ़ें - वर्ल्ड अल्जाइमर्स डे : खुशियों का पता तो नहीं भूल गए आप….
देश मरीज (लाख में)
चीन 95
अमेरिका 42
भारत 41
जापान 31
ब्राजील 16
जर्मनी 16
रूस 13
इटली 12
इंडोनेशिया 12
फ्रांस 12
यह भी पढ़ें - जानें क्यों मनाया जाने लगा है विश्व भर में अल्जाइमर दिवस
मध्यम और उच्च आय वाले देशों पर खतरा
68 % मामले मध्यम आय वर्ग देशों में होंगे 2050 तक
58 फीसदी मामले इन्हीं देशों से थे 2015 तक।