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डराने वाले  हैं डिमेंशिया के आंकड़ें, पीडि़त लोगों की संख्‍या में भारत तीसरे नंबर पर

एशिया में लगातार बढ़ रही है डिमेंशिया ग्रस्‍त लोगों की संख्‍या।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 21, 2018 11:29 AM IST

अल्जाइमर डिमेंशिया का ही एक रूप है, जिसका असर याददाश्त पर होता है। यह एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जो मस्तिष्क कोशिकाओं के लगातार नुकसान के कारण होती है। इस समय विश्‍व भर में हालात ये हैं कि हर तीसरे सैकेंड एक व्‍यक्ति अपनी याददाश्‍त खो रहा है।

भागती-दौड़ती जिंदगी के तनाव, सही खानपान व कसरत की कमी और बढ़ती उम्र जैसे कई कारण हमारी याददाश्त छीनने में लगे हुए हैं। डिमेंशिया के ही एक प्रकार अल्जाइमर में खासतौर से बुजुर्ग धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगते हैं। हालांकि सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि बच्चे भी इस बीमारी की गिरफ्त में आने लगे हैं। विश्व अल्जामइर दिवस के मौके पर आइए जानते हैं इस खतरे के बारे में।

डराते हैं आंकड़ेें 

विश्‍व भर में  4.68 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैैं। 2030 तक इनकी संख्‍या 7.47 करोड़  पहुंचने की आशंका है। जबकि वर्ष 2050 तक इनकी संख्‍या 13.15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है ।

भयावह है स्थिति  

  • अकेले भारत में ही 40 लाख लोग  डिमेंशिया से पीड़ित हैं, इनमें से 16 लाख  लोग अल्‍जाइमर के शिकार हैं।
  • एशिया में समस्‍या सबसे ज्‍यादा है। यहां  2.29 करोड़ डिमेंशिया के मरीज  हैं ।
  • 98 लाख लोग दक्षिण एशिया में इस बीमारी से ग्रस्त
  • 1.05 करोड़ के साथ यूरोप दूसरे नंबर पर
  • 94 लाख इस बीमारी के शिकार अमेरिका द्वीप में
  • 40 लाख अफ्रीकी भी डिमेंशिया की चपेट में

चीन-अमेरिका के बाद भारत का नंबर

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देश    मरीज (लाख में)

चीन     95

अमेरिका    42

भारत     41

जापान    31

ब्राजील    16

जर्मनी    16

रूस    13

इटली    12

इंडोनेशिया    12

फ्रांस    12

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मध्यम और उच्च आय वाले देशों पर खतरा

68 % मामले मध्यम आय वर्ग देशों में होंगे 2050 तक

58 फीसदी मामले इन्हीं देशों से थे 2015 तक।