
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : February 3, 2026 10:57 AM IST
Medically Verified By: Dr. Bir Singh Yadav
Delhi Ke Pollution Se Khud Ko Kaise Bachaye: दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। मौसम में बदलाव, हवा की कम रफ्तार, निर्माण कार्य और बढ़ते वाहनों की संख्या के कारण हवा में धूल-मिट्टी और प्रदूषक कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।
खासकर दिल्ली में आज की एयर क्वालिटी इंडेक्स की बात करें तो यह 323 तक पहुंच चुका है। सुबह के समय इतनी ज्यादा धुंध कि न गाड़ियां रोड पर चल पा रही हैं और न ही पैदल चलने वाले सही से सांस ले पा रहे हैं। ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि नॉर्मल कपड़े वाला मास्क भी किसी काम का नहीं है। ऐसे में हर कोई खुद को व अपने परिवार को पॉल्यूशन से होने वाले नुकसान से बचाना चाहता है।
आपकी सभी की फैमिली हेल्दी रहे, इसके लिए हमने मदरहुड हॉस्पिटल के पीडियाट्रीशियन डॉक्टर बी.एस यादव से बात की। डॉक्टरों के अनुसार,
'हवा में मौजूद सूक्ष्म धूल कण (PM2.5 और PM10) सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों, दिल और आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खासतौर पर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से सांस, दिल या एलर्जी की समस्या से जूझ रहे लोग अधिक जोखिम में रहते हैं।’ आइए आपको बताते हैं कि डॉक्टर खुद को पॉल्यूशन से बचाने के लिए क्या सलाह देते हैं।
दिल्ली में बढ़ते पॉल्यूशन के कारण लोगों में आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हार्ट डिजीज और फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी सेहत का ध्यान रखें और डॉक्टर की बताई हेल्थ केयर टिप्स को जरूर फॉलो करें।

डॉक्टर बताते हैं कि धूल-मिट्टी में मौजूद बारीक कण इतने छोटे होते हैं कि ये नाक के प्राकृतिक फिल्टर को पार कर सीधे फेफड़ों और खून तक पहुंच सकते हैं। ये कण शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) बढ़ाते हैं और इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकते हैं।
एन-95 या अच्छी क्वालिटी का मास्क धूल और प्रदूषक कणों से काफी हद तक बचाव करता है। सामान्य कपड़े का मास्क पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता।
जब AQI ज़्यादा खराब हो, तब मॉर्निंग वॉक या आउटडोर एक्सरसाइज से बचें। बेहतर होगा कि घर के अंदर ही हल्की एक्सरसाइज या योग करें।
खिड़कियाँ बंद रखें, खासकर जब बाहर प्रदूषण ज्यादा हो। एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है। घर में गीले कपड़े से सफाई करें ताकि धूल न उड़े।
बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोएं और नाक की हल्की सफाई करें, जिससे धूल के कण बाहर निकल सकें।
खूब पानी पीना शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है। विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल-सब्जियां जैसे आंवला, संतरा, अमरूद, पालक और हल्दी को डाइट में शामिल करें।
बच्चों को बाहर खेलने से रोकें और बुजुर्गों को अनावश्यक बाहर जाने से बचाएं। सांस की तकलीफ बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

अगर सांस लेने में ज्यादा परेशानी, सीने में दर्द, लगातार खांसी, आंखों में तेज जलन या चक्कर जैसी शिकायत हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत मेडिकल सलाह लें।
दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण केवल पर्यावरण नहीं बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। ऐसे में सतर्क रहना और डॉक्टरों की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। सही सावधानियों और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके हम प्रदूषण के असर को काफी हद तक कम कर सकते हैं।