Delhi-NCR में हर 20वें व्यक्ति को डायबिटीज + बीपी का खतरा? क्यों बढ़ रही है ये 2 बीमारियां?

दिल्ली- एनसीआर में रहने वाले लोगों में डायबिटीज और हाई ब्ल प्रेशर दोनों ही बीमारियों का खतरा कई गुणा ज्यादा हो रहा है। हालही में हुई एक स्टडी में इस बात खुलासा हुआ है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : August 12, 2026 6:24 PM IST

दिल्ली की हवा में सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, कई तरह की बीमारियां भी घूम रही है। ऐसा हम नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि Diabetes and Metabolic Syndrome: Clinical Research and Reviews जर्नल में छपी रिपोर्ट बता रही है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-NCR में हर 20वां वयस्क आज डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों के साथ जी रहा है। इस समस्या को मेडिकल भाषा में डुअल बर्डन कहा जाता है। इसे थोड़ा आसान भाषा में कहें तो अगर आपके ऑफिस में 20 लोग हैं, तो उनमें से 1 शख्स को शुगर भी है और BP भी। सबसे खतरनाक बात यह है कि ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि उन्हें डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की परेशानी है।

क्या कहती है स्टडी

जर्नल में छपी जानकारी बताती है कि यह एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी थी। इस स्टडी में दिल्ली- एनसीआर में रहने वाले 35 से 55 साल के हजारों वयस्कों का टेस्ट किया था। इस टेस्टिंग के दौरान फास्टिंग शुगर, HbA1c, BP और कमर का नाप देखा गया। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि दिल्ली-NCR में रहने वाले लगभग 35% से ज्यादा लोगों का BP हाई निकला, लेकिन उन्हें खुद पता ही नहीं था। बीमारी बिना लक्षण के अंदर ही अंदर नुकसान कर रही है। इस दौरान शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 35 से 55 साल की उम्र के लोगों में डायबिटीज और ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारी की सबसे बड़ी जड़ थी पेट की चर्बी।

ब्लड प्रेशर और डायबिटीज दोनों ही लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है। ब्लड प्रेशर और डायबिटीज दोनों ही लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है।

डबल खतरा डबल नहीं, 3 गुना है

नोएडा के यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. आलोक दुबे बताते हैं कि शुगर और BP अलग-अलग बीमारी बेशक हैं, लेकिन जब यह साथ आती हैं तो एक-दूसरे को और खतरनाक बना देती हैं। दरअसल किसी भी व्यक्ति के शरीर में हाई शुगर खून की नालियों की अंदरूनी परत में लगातार सूजन और जकड़न पैदा करती है। वहीं हाई BP उन कमजोर नालियों पर लगातार दबाव डालता है। वो आगे जोड़ते हैं, जब एक मरीज को डायबिटीज और BP दोनों हों तो दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, किडनी फेल और आंखों की बीमारी का खतरा सिर्फ जुड़ता नहीं है, वो कई गुना बढ़ जाता है। इसे हम माइक्रो और मैक्रो वास्कुलर डैमेज कहते हैं।

दिल्ली- NCR में ही क्यों लोगों पर बढ़ रहा है डबल अटैक

इस स्टडी को करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली, नोएडा और इसके आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों पर मानसिक तनाव ज्यादा है, जिसकी वजह से उनकी लाइफस्टाइल बहुत ज्यादा खराब हो गई है। मुख्य रूप से खराब लाइफस्टाइल ही लोगों में हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा बढ़ा रही है। इसके अलावा नीचे बताए गए कारण भी इन बीमारियों के जिम्मेदार हैं-

जंक फूड में छिपा सोडियम बीमारियों की वजह बन रहा है। जंक फूड में छिपा सोडियम बीमारियों की वजह बन रहा है।

1. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और हाई-सोडियम खाना

पैकेज्ड स्नैक्स, ब्रेड, सॉस, बाहर का खाने को भी इन बीमारियों की जड़ कहा जा सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर पैकेज्ड फूड में छुपा हुआ नमक और रिफाइंड कार्ब्स होते हैं। नमक और रिफाइंड कार्ब सीधे BP और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाते हैं। यह बीमारी की मुख्य वजह है।

2. कुर्सी वाली लाइफ + स्ट्रेस

दिल्ली- एनसीआर में रहने वाले ज्यादातर लोग 10-12 घंटे डेस्क पर बैठना, जिम न जाना, टारगेट का प्रेशर महसूस करते हैं। इससे शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन को बढ़ाता है। यह हार्मोन न सिर्फ शुगर को बढ़ाता है बल्कि खून की नलियों को भी सिकुड़ता है।

3. प्रदूषण

दिल्ली-NCR की हवा में मौजूद बारीक पार्टिकल्स सिर्फ फेफड़े नहीं, पूरे शरीर में सूजन पैदा करते हैं। क्लिनिकल रिसर्च में इसे सीधे इंसुलिन रेजिस्टेंस और BP से जोड़ा गया है।

यह स्टडी हमें बता रही है कि दिल्ली- एनसीआर की सेहत अब क्रिटिकल स्टेज पर है। बीमारी पूरी तरह से साइलेंट है, लक्षण देर से आते हैं। पर शरीर को नुकसान हमेशा के लिए हो जाता है। इसलिए इंतजार मत कीजिए। आज ही अपना BP और शुगर चेक कराएं। अगर 10 से 12 घंटे की नौकरी कर रहे हैं तो समय निकालकर सुबह और शाम को वॉक करें। रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में स्ट्रेस को कम करने की कोशिश करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख Diabetes and Metabolic Syndrome: Clinical Research and Reviews में प्रकाशित स्टडी पर आधारित है। अगर आपको अपने अंदर हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से जुड़ा कोई लक्षण नजर आता है तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।