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दिल्ली एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों की हवा इतनी ज्यादा प्रदूषित हो चुकी है, लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बड़ों से लेकर बच्चे सभी को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं। एयर पॉल्यूशन में हवा में मौजूद विषाक्त पदार्थ सांस के साथ फेफड़ों में जाते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। मास्क पहन कर अपने फेफड़ों को तो कुछ हद तक बचाया जा सकता है। लेकिन क्या आपको पता है आपके फेफडों की ही तरह वायु प्रदूषण आपकी आंखों को भी नुकसान पहुंचाता है। प्रदूषित हवा में नाइट्रोजन और सल्फर जैसी हानिकारक गैसें होती हैं, जो आंखों को नुकसान भी पहुंचाती है। मैक्स मल्टी स्पेश्लिटी सेंटल नोएडा में एसोसिएट डायरेक्टर आई केयर स्पेश्लिस्ट व ऑफ्थेल्मोलॉजिस्ट डॉक्टर उद्भव दोरवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण बढ़ना आंखों में जलन पैदा करने वाला एक प्रमुख कारण बन सकता है। आंखें हमारे शरीर का नाजुक अंग है, जो हवा में मौजूद विषाक्त पदार्थों से संपर्क में आकर डैमेज हो सकती हैं।
हालांकि, इस समय दिल्ली का प्रदूषण बाहर बहुत ज्यादा है, इसलिए आपको घर के अंदर का प्रदूषण ज्यादा महसूस नहीं हो रहा होता है। लेकिन जिस प्रकार बाहर वाहन, फैक्ट्रियों और कृषि कार्यों के कारण प्रदूषण हो रहा है, उसी प्रकार घर के अंदर सिगरेट व किचन से निकलने वाले धुएं आदि के कारण भी प्रदूषण बढ़ रहा है।
डॉक्टर उद्भव दोरवाल ने बताया कि अगर आंखें 4 घंटे से ज्यादा देर तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहती है तो इन में जलन होने लगती है। ऐसा आमतौर हाइड्रोकार्बन, खासकर C4 और C5 ओलीफिन्स के कारण होता है। बेंजीन या साइक्लोहेक्सेन जैसे फिनोलिक मूल के अन्य रासायनिक भी आँखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। शहरों में सबसे आम जलने वाले प्रदूषक होते हैं कार्बन मॉनोक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, सीएफसी, आर्सेनिक, बेंजीन, लीड, और अदिलाबद पदार्थ होते हैं।
लंबे समय तक आँखों के संपर्क में रहने से आँखों में जलन, पानी बहना, निकलना, लालिमा, खुजली, रड़कने वाला अहसास और कम या धुंधला दिखने जैसे लक्षण हो सकते हैं। यदि आपको ये लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो जल्द से जल्द आपको एक बार डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। क्योंकि यदि आप लंबे समय तक इन लक्षणों को इग्नोर करते हैं, तो ऐसे में मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और यहां तक कि कभी-कभी तो कैंसर जैसी बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
डॉक्टर उद्भव ने बताया कि खूब मात्र में पानी पीते रहें, आंखों के लिए अच्छी क्वालिटी वाली लुब्रिकेट आई ड्रॉप्स का उपयोग करें, ठंडिया पट्टियां लगाएं। समय-समय पर साफ पानी से आंख धोएं लेकिन बार-बार आंखें धोने की आदत न डालें। बाहर जाने से पहले आंखों को अच्छे से कवर करने वाले गॉगल्स लगाएं। आई मेकअप आदि न करें और समय-समय पर आंखों के एक्सपर्ट्स से सलाह लेते रहें।