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Delhi-NCR air pollution: दिल्ली-एनसीआर इस समय जहरीली हवा की चपेट में है। स्थिति यह है कि यहां कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का स्तर गंभीर(severe category) श्रेणी में आ गया है। यानी कि इस इलाके का AQI Index 500 के पार है और आप मान के चलिए कि आप जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। इसलिए, कल दिल्ली-एनसीआर के इलाके के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सरकार ने कुछ सख्त नियम और सुझाव लागू किए हैं। जिसमे कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए स्कूलों को बंद कर दिया गया है और ऑनलाइन क्लासेज चलाने की अनुमति दी गई है। साथ ही कई निर्माण कार्यों का बंद कर दिया गया है और प्रशासन भविष्य की कार्रवाई पर विचार कर रहा है। लेकिन, इसी बीच तमाम एक्सपर्ट वायु प्रदूषण के व्यापक असर पर बात कर रहे हैं।
बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर एक्सपर्ट का डर है कि कहीं ये शरीर के अंगों को धीमे-धीमे व्यापक नुकसान न पहुंचा दे। दरअसल, वायु प्रदूषण सिर्फ हमारे फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचता बल्कि ये हमारी किडनी, आंखे, दिल और दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कैसे, जानते हैं
वायु प्रदूषण के चलते सांस की बीमारी जिसमें निमोनिया, छाती में संक्रमण और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) बढ़ सकती हैं और लोगों को लंबे समय के लिए प्रभावित कर सकती हैं।
PM2.5 या इससे ज्यादा के प्रदूषण के कण आपकी खून में मिल कर किडनी फिल्ट्रेशन के काम को भी बाधित कर सकते हैं। ये किडनी को अंदर से डैमेज कर सकते हैं और इसके काम काज को बाधित कर सकते हैं।
वायु प्रदूषण के कण आपकी ब्रेन को भी नुकसान पहुंचा सकती है। दरअसल, जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है कि फाइन पार्टिकुलेट मैटर के हर एक माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (ug/m3) बढ़ने पर ब्रेन और खास कर मेमोरी को नुकसान होता है और डिमेंशिया का खतरा 3% बढ़ जाता है।
वायु प्रदूषण के कण खून में मिल कर धमनियों और नसों में रुकावट पैदा कर सकते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को खराब कर सकते हैं। इससे हाई बीपी और ब्लड क्लोटिंग की समस्या बढ़ सकती है और आप दिल की बीमारी के शिकार हो सकते हैं।
तो, इस तरह हमें समझना होगा कि वायु प्रदूषण अब व्यक्तियों को बहुत दूर तक प्रभावित करने लगा है। साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह खतरा है। साथ ही युवा पीढ़ी में दिल का दौरा बढ़ सकता है, जो कि लगभग एक प्रकार का काल है।