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बदलते मौसम में अचानक से बढ़ने लगे डिहाइड्रेशन के मामले, डॉक्टर ने बताया क्यों हो रही शरीर में पानी की कमी

Health problems in weather change: अचानक से मौसम में फिर परिवर्तन फिर हुआ बारिश की ठंड रहने के बाद फिर से गर्मी हुई है और कम पानी पीने के कारण लोगों में डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ता है। जानें कैसे बीमार कर रहा है बदलता मौसम।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : September 9, 2023 8:16 AM IST

Dehydration caused by change in the weather: मानसून के मौसम में हर कोई पानी की सही मात्रा का सेवन नहीं करने के कारण बहुत से लोगों को डिहाइड्रेशन की समस्या हो रही हैं। बारिश के मौसम में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बदलते मौसम बार-बार बारिश होने के कारण पानी के संक्रमित होने का खतरा भी रहता है। जिसके कारण पेट को गंभीर बीमारी, कॉलेरा, डिहाइड्रेशन और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जैसी समस्याओं का सामना करना पडता हैं। इसके अलावा डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा भी रहता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मौसम में अचानक बदलाव आया है, बारिश के बाद फिर से गर्मी का मौसम हुआ है और तापमान बढ़ने के कारण फिर से लोगों को डिहाइड्रेशन होने का खतरा बढ़ रहा है।

किस उम्र में ज्यादा खतरा

निर्जलीकरण सभी उम्र के लोगों के लिए खतरा पैदा करता है, लेकिन यह छोटे बच्चों और बड़े वयस्कों के लिए विशेष रूप से गंभीर खतरा पैदा करता है। छोटे बच्चों में निर्जलीकरण के पीछे गंभीर दस्त और उल्टी प्राथमिक कारण हैं, जबकि पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना किसी भी उम्र के व्यक्तियों में निर्जलीकरण का कारण बन सकता है। निर्जलीकरण उम्र के आधार पर अलग-अलग तरीकों से प्रकट होता है। गर्मी के कारण दाद, खाज, खुजली और लाल चकत्ते की समस्या को लेकर भी मरीज डॉक्टर के पास पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि बार-बार पेशाब आना, सिरदर्द, गहरे रंग का पेशाब, थकान और चक्कर आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

मानसून में हाइड्रेट रहना बहुत जरूरी

झायनोव्हा शाल्बी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. उर्वी महेश्वरी ने कहा कि, “मानसून के दौरान शरीर को हाइड्रेट रहना काफी जरूरी हैं। अचानक होने वाली बारिश और उच्च आर्द्रता के स्तर के कारण, कई लोग यह मान लेते हैं कि उन्हें बार-बार पानी पीने की जरूरत नहीं है या वे निर्जलीकरण के संकेतों पर ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि, इस गलतफहमी के कारण मानसून के दौरान निर्जलीकरण के मामलों में वृद्धि हुई है। पिछले कुछ दिनों से ओपीडी में आमतौर पर रोजाना 8 से 10 मरीज डिहाइड्रेशन के आ रहे हैं। इसके अलावा, कई लोग वायरल संक्रमण, चक्कर आना और उल्टी से पीड़ित हैं।”

ज्यादा पसीना आने से बढ़ रही गंभीरता

डॉ. महेश्वरी के अनुसार इस मौसम में निर्जलीकरण में योगदान देने वाला एक कारक अत्यधिक पसीना आना है। उच्च आर्द्रता हमें संक्षिप्त शारीरिक परिश्रम के बाद भी गर्म और असहज महसूस कराती है। इसके अलावा, बारिश के पानी के बार-बार संपर्क में आने से पेशाब करने की इच्छा बढ़ सकती है और शरीर में जलयोजन स्तर को नियंत्रित करने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे आवश्यक खनिजों की हानि हो सकती है। बरसात के मौसम में तापमान गिर जाता है। इसलिए बहुत से लोग कम पानी पीते हैं. हालांकि, पिछले कुछ दिनों से गर्मी बढ़ने के कारण कई लोगों को डिहाइड्रेशन की समस्या होने लगी है।

मौसम बदलने के कारण हो रही कई समस्याएं

अपोलो स्पेक्ट्रा मुंबई की जनरल फिजिशियन डॉ छाया वाजा ने कहा, “मानसून के दौरान वातावरण ठंड होता हैं, लेकिन अब तापमान में अचानक बदलाव के कारण, कई लोग निर्जलीकरण, चक्कर आना, उल्टी और वायरल संक्रमण से पीड़ित हैं। ऐसे माहौल में अपनी सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। हाइड्रेट रहने के लिए पूरे दिन खूब पानी पिएं। आप जहां भी जाएं नियमित रूप से पानी पीने की याद दिलाने के लिए अपने साथ एक रिफिल करने योग्य पानी की बोतल ले जाएं। अपने आहार में हाइड्रेटिंग खाद्य पदार्थों को शामिल करें। खीरे, तरबूज, संतरे और स्ट्रॉबेरी जैसे फलों और सब्जियों में पानी की मात्रा अधिक होती है। ये शरीर में तरल पदार्थ की पूर्ति करने में मदद करते हैं। इसके अतिरिक्त, नारियल पानी, छाछ या निम्बू पानी शरीर को फिर हाइड्रेट करने में सहायता कर सकते हैं।