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Vitamin Deficiency causes of Weak nerves
शरीर में नसों का कमजोर हो जाना एक ऐसी समस्या है जिसकी शुरुआत में आसानी से पता लगाना काफी मुश्किल होता है। लेकिन यह समस्या आगे चलकर काफी गंभीर होती चली जाती है। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो कमजोर हो रही नसों के पीछे कई तरह के स्वास्थ्य कारण हो सकते हैं। जिसमें कुछ विटामिन की कमी को भी कमजोर नसों का कारण बताया गया है। यदि आपकी नसें भी लगातार कमजोर होती जा रही हैं, तो आपको अपने शरीर में विटामिन की मात्रा पर ध्यान देने की बहुत ज्यादा जरूरत है। इनकी पूर्ति के लिए आपको अपनी डाइट में तुरंत कुछ बदलाव करने की जरूरत है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स हमारी नसों की सेहत के लिए अति महत्वपूर्ण विटामिन है। जिसमें विटामिन-बी 1 या थायमिन, विटामिन-बी 6 या पाइरिडोक्सिन और विटामिन-बी 12 या कोबालामिन मुख्य तौर पर शामिल हैं। इन विटामिन की कमी शरीर में हो जाने से हमारा तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम कमजोर होने लगता है। यदि आपको नसों में कमजोरी महसूस हो रही है तो आपको अपने शरीर में विटामिन लेवल को जरूर चेक करा लेना चाहिए।
विटामिन-बी1 जिसे वैज्ञानिक भाषा में थायमिन कहा जाता है। इसका काम हमारे शरीर में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को एनर्जी में बदलना होता है। यह एनर्जी ही हमारी नसों को ऊर्जा देने का काम करती है। इसके अलावा यह हमारे ब्रेन के फंक्शन को बेहतर बनाने का काम करता है। वहीं शरीर की तमाम नसों की कनेक्टिविटी को भी दुरुस्त करने में मदद करता है। इसलिए यदि आप कमजोर हो रही नसों से परेशान हैं तो आपको विटामिन-बी1 की पूर्ति पर ध्यान देना चाहिए।
विटामिन-बी-6 जिसका वैज्ञानिक नाम पाइरिडोक्सिन है। हमारे नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह विटामिन हमारे ब्रेन सेल्स को हेल्दी बनाए रखने में भी काफी मदद करता है। यदि आप कमजोर याददाश्त से परेशान हैं तो आपको अपनी डाइट में विटामिन-बी-6 से भरपूर फूड्स को शामिल करना चाहिए। इस विटामिन की कमी होने पर शरीर में झटके जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए इसकी कमी को हमें बहुत ध्यान से दूर करना चाहिए।
विटामिन-बी-12 जिसे कोबालामिन के नाम से भी जाना जाता है। इसकी कमी शरीर में हो जाने पर हमारी नसों में अकड़न पैदा होने लगती है। नसों के जाम हो जाने से रोजाना का काम काज काफी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह हमारा शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को भी काफी बढ़ा देता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने से हमारा शरीर जल्दी बूढ़ा होने लगता है। जिसके चलते कई और समस्याएं भी हमें घेरने लगती हैं।