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Dead Bodies Ganga River in Corona: कोरोनावायरस (Coronavirus) का कहर अब शहरों से होते हुए अब गांवों में भी पहुंच चुका है। देश में प्रतिदिन इतनी मौतें हो रही हैं कि लोगों को शवों को श्मशान घाट में जलाने के लिए जगह नहीं मिल रही है। आलम ये हो गया है कि गांव में कोरोना मृत के शरीर को लोग नदियों में बहाने के लिए मजबूर हो गए हैं। ऐसी खबरें गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) और बक्सर (बिहार) में सामने आई हैं। बक्सर में गंगा नदी में बहती लाशें मिलने से प्रशासन इसकी जांच करने में जुट गया है। लेकिन इस तरह से नदियों में लाशों का बहना सेहत के लिहाज से कितना सही है? आइए जानते हैं एक्सपर्ट का क्या कहना है इस बारे में...
बिहार के बक्सर जिले (Buxar news) के चौसा प्रखंड में सोमवार को गंगा नदी में कम से कम 71 शव बरामद (Dead Bodies found in Ganga River in Corona) किए गए, जिससे इस कोरोना काल में क्षेत्र में लोग में भय का माहौल बन गया। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि बरामद शव बह कर आए हैं, जो करीब तीन से चार दिन पहले के बताए जा रहे हैं। बक्सर में अधिकारी इस घटना की जांच कर रहे हैं। जांच के क्रम में यह बात सामने आई है कि गंगा नदी में पाए गए शव तीन से चार दिन पुराने हैं, इस कारण स्पष्ट है कि शव बक्सर जिले के नही हैं।
गाजीपुर (ghazipur) और बलिया जिलों (UP ganga river dead body news) में गंगा नदी से बरामद हुए सभी शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया और यह पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई कि नदी में शवों को कहां से बहाया गया था। आधिकारियों ने शवों की कुल संख्या का खुलासा नहीं किया। हालांकि, ताजा मिली जानकारी के अनुसार, गाजीपुर में 25 लाशें मिली हैं।
गंगा नदी में बहती लाशों (Dead Bodies in Ganga River) का आम लोगों की सेहत पर क्या असर हो सकता है, यह जानना बेहद जरूरी है। क्या इस तरह बहती लाशों से दूसरे लोग भी कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं? इस पर वेबसाइट आजतक डॉट इन (aajtak.in) पर दिए एक इंटरव्यू में आईसीएमआर के चेयरमैन डॉ. बलराम भार्गव ने कहा है कि यह वायरस मृत शरीर में नहीं पनप सकता है। उसके ब्रीडिंग की संभावना कम हो जाती है। वायरस को बढ़ने या पनपने के लिए जिंदा शरीर चाहिए होता है। हालांकि, लाशों का अधिक दिनों तक पानी में पड़े रहने से पानी दूषित होता है, जिससे उस पानी में स्नान करना या उसे पीना सही नहीं है। ऐसे में सतर्क रहना जरूरी है। डॉ. भार्गव के अनुसार, गंगा के पानी में कई एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, लेकिन अब पहले जैसा गंगा का पानी उतना साफ नहीं रहा, कई जगहों पर गंगा के पानी से आचमन भी नहीं किया जा सकता।
कोरोनावायरस से संबंधित अध्ययनों में ये बात अब तक साबित नहीं हुई है कि यह वायरस पानी में पनपता है या एक वाटर बॉर्न या जल जनित बीमारी है। पानी में इस वायरस के जाने से इंसानों पर इसका प्रभाव नहीं देखने को मिलेगा। हालांकि, कोई भी लाश चाहे इंसानों की हो या जानवरों की, उसे किसी भी नदी, तालाब में प्रवाहित करना कहीं से भी सही नहीं है। इससे नदी का पानी तो प्रदूषित होता ही है, इनमें स्नान करने वालों की सेहत भी ऐसी स्थिति में खराब हो सकती है। संभवत: कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाए क्योंकि इस बार यह वायरस कब, कहां, कैसे लोगों को संक्रमित कर रहा है, इसे जान पाना मुश्किल हो रहा है।
शवों को नदियों में बहाने से पानी दूषित होते हैं। पर्यावरण प्रदूषित होगा। लाशों के पानी में कई दिनों तक पड़े रहने से वे सड़ने लगती हैं। उनमें कीटाणु पनपने लगते हैं, बदबू आती है, पानी गंदा होता है। आसपास के लोगों को इससे समस्या हो सकती है। यदि जानवर इस पानी को पीते हैं, तो वो भी बीमार हो सकते हैं। यदि इसी तरह से गंगा नदी या दूसरी नदियों में लाशों के बहाने का सिलसिला जारी रहा, तो यह दूसरी महामारी का को जन्म दे सकता है। हालांकि, आजतक को दिए इंटरव्यू में भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. विजय राघवन ने कहा कि लाश जब पानी में बह रही हो, तो अधिक खतरे की बात नहीं है। जब संक्रमित लाश किसी ठहरे हुए पानी जैसे तालाब में है तो खतरा अधिक होता है। बहते हुए पानी में शवों के बहने से अधिक समस्या नहीं होती और धूप के संपर्क में रहने से उसमें मौजूद हानिकारक चीजें धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं।