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दिनचर्या में की जाने वाली किन बीमारियों के कारण वैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ता है?

हमारे डेली रूटीन की कुछ सामान्य आदतें जिनकी से वैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ रहा है और बहुत ही कम लोगों को इस बारे में जानकारी है। इस लेख में हम एक्सपर्ट्स की मदद से ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में जानेंगे।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : July 18, 2026 9:10 AM IST

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Medically Verified By: Vaibhav Mishra

आज के समय में वैस्कुलर बीमारियों का खतरा भी काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है, लेकिन एक समस्या यह भी है आज भी एक बड़ी संख्या में लोगों को वैस्कुलर डिजीज से जुड़ी पर्याप्त जानकारी नहीं है। किसी भी बीमारी से खुद का बचाव करने के लिए उससे जुड़ी पर्याप्त जानकारी होना बेहद जरूरी होता है। डॉ. वैभव मिश्रा, सीनियर डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के अनुसार वैस्कुलर डिजीज ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की धमनियां या नसें प्रभावित हो जाती हैं।

इस समस्या के कारण अंगों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता है और उसके बाद कई गंभीर समस्याएं पैदा होने लगती हैं। आमतौर पर लोग इसे केवल बढ़ती उम्र की समस्या मानते हैं, जबकि सच यह है कि हमारी रोजमर्रा की कई आदतें इस बीमारी के जोखिम को तेजी से बढ़ा रही होती हैं, लेकिन हमें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। इस लेख में हम आपको ऐसी ही बीमारियों के बारे में बताने वाले हैं, जो इस समस्या का कारण बन सकती है।

धूम्रपान सबसे बड़ा कारण

दुनियाभर के तमाम हेल्थ एक्सपर्ट्स धूम्रपान को वैस्कुलर डिजीज के सबसे बड़े कारणों में से एक मानते हैं। सिगरेट या तंबाकू में मौजूद रसायन रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उनमें रुकावट बनने लगती है। यही कारण है कि धूम्रपान करने वालों में पैरों की धमनियों की बीमारी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सेडेंटरी लाइफस्टाइल

आज के समय में गतिहीन जीवनशैली यानी बहुत ही कम एक्टिव लाइफस्टाइल हमारे स्वास्थ्य काे सबसे बड़े दुश्मनों में से एक बनता जा रहा है। आज का लाइफस्टाइल ऐसा हो गया है कि लोग अपने दिन का ज्यादातर समय कंप्यूटर के सामने या गाड़ी चलाते हुए बिताते हैं, जिस दौरान शरीर कोई एक्टिविटी नहीं कर रहा होता है या फिर बहुत ही कम एक्टिविटी कर रहा होता है। शारीरिक गतिविधि की कमी से मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं बढ़ती हैं, जो वैस्कुलर डिजीज के प्रमुख कारणों में से एक है।

क्रोनिक बीमारियां कंट्रोल नहोना

वैस्कुलर डिजीज के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक डायबिटीज को भी माना जाता है और इशलिए अगर लंबे समय से डायबिटीज कंट्रो नहीं है, तो उससे धीरे-धीरे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच ने लगता है। ऐसी स्थिति में अक्सर पैरों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है और मरीज के घाव भी धीरे-धीरे भरने लगते हैं। ठईक इसी प्रकार हाई ब्लड प्रेशर भी अगर लंबे समय से कंट्रोल नहीं है या भी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो उससे कारण भी रक्त वाहिकाएं अंदर से सिकुड़ने लगती हैं और वैस्कुलर डिजीज का खतरा काफी हद क बढ़ जाता है।

खानपान से जुड़ी खराब आदतें

आज के समय में लोगों की डाइट लगातार अनहेल्दी होती जा रही है, जिसका असर उनकी वैस्कुलर हेल्थ पर भी पड़ रहा है। लोग आजकल अत्यधिक तला-भुना भोजन, प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक, मीठे पेय और ज्यादा मसालेदार खआना पसंद करते हैं। ये फूड्स हो सकता है खाने में स्वादिष्ट लगें लेकिन इनसे शरीर का वजन लगातार बढ़ता है जिससे लाल रक्त वाहिकाएं भी प्रभावित हो जाती हैं।

वैस्कुलर डिजीज के खतरा कम हो सकता है

वैस्कुलर डिजीज के ज्यादातर जोखिम कारकों को कम करना हमारे हाथ में होता है, अगर हम नियमित रूप से इन बातों का ध्यान रखें तो वैस्कुलर डिजीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है -

  • नियमित 30-45 मिनट की पैदल चलें
  • रोजाना पोषक तत्वों से भरपूर और संतुलित भोजन अपनाएं
  • अपने शरीर का वजन बढ़ने से रोकें और स्वस्थ वजन बनाए रखें
  • धूम्रपान व शराब बंद कर दें
  • शुगर, रक्तचाप तथा कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहें

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल वैस्कुलर डिजीज के बढ़ते खतरों के बारे में जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।