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इसके ज्यादातर मामले बच्चों में पाए जाते हैं .© Shutterstock
साइटोमेग्लो वायरस महिला, पुरुष या बच्चे को किसी भी उम्र में अपनी चपेट में ले सकता है। इसके ज्यादातर मामले बच्चों में पाए जाते हैं जिसे कॉन्जिनाइटल साइटोमेग्लो वायरस इंफेक्शन कहते हैं। यह इंफेक्शन संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। जिसका जरिया ब्लड, यूरिन, शुक्राणु या ब्रेस्ट मिल्क हो सकते हैं। ऐसे में व्लड ट्रांसफ्यूजन, ऑर्गन ट्रांसप्लांट या यौन संबंध बनाने के दौरान यह वायरस फैलता है। जानते हैं इस बीमारी के बचाव और इलाज के बारे में।
इससे जुड़ी जटिलता
गर्भावस्था में इस वायरस से प्रभावित होने पर पहले तीन माह में गर्भस्थ शिशु को इसका खतरा ज्यादा रहता है और जन्म के बाद ही इसका पता चल पाता है। गर्भ में यदि बच्चे के दिमाग, आंख या कान पर यह वायरस असर करे तो उसका शारीरिक विकास नहीं हो पाता। इसकी वजह से उसमें पीलिया, निमोनिया, त्वचा पर दाने, दौरे पड़ना, लिवर बढ़ना, वजन घटना, सिर का आकार छोटा होने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। कई बार उम्र के बढ़ने पर इसके लक्षण दिखते हैं जैसे की सुनाई न देना, दिखने में परेशानी एवं दिमागी कमजोरी आदि।
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साइटोमेग्लो वायरस के लक्षण
सामान्यत: यह खुद ब खुद 5 से 7 दिन में खत्म हो जाता है। लेकिन एड्स, ट्रांसप्लांट, ऑर्गन डोनेशन नवजात या ऐसे व्यक्ति जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। उनमें इस वायरस के कारण जटिलताएं बढ़ जाती हैं। यह रक्त के जरिए शरीर में फैलकर खासकर आंख, दिमाग, फेफड़े और लिवर को नुकसान पहुंचाता है। जिसकी वजह से बुखार, डायरिया, सांस लेने में तकलीफ, देखने में परेशानी, फेफड़ों में संक्रमण, रेटिनाइटिस (आंख के रेटिना में सूजन), थकान, गले में सूजन व दर्द और मांसपेशियों में बी दर्द होने जैसे लक्षण सामने आते हैं।
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इलाज
आमतौर पर यह बीमारी बच्चों या बड़ों दोनों में कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। लेकिन जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है उनमें वायरस के तेजी से फैलने पर दिमाग, आंख और कान प्रभावित होते हैं। इस वजह से मरीज की हालत गंबीर होने लगती है। इसके लिए एंटीवायरल दवाओं का कोर्श शुरू कर इलाज किया जाता है। इससे वायरस के विकास को रोका जात है।
इसकी जरूरी जांच
ब्लड टेस्ट कर रोग की पहचान करते हैं इसके अलावा गर्भावस्था में यदि इस वायरस की आशंका हो तो महिला की सोनोग्राफी भी की जाती है।
साफ-सफाई का ध्यान
वायरस से बचाव ही रोग की आशंका को घटाता है। हाइजीन और साफ-सफाई को धयान में रखना जरूरी है। साथ ही यदि परीवार में कोई सदस्य अगर इस वायरस से पीड़ित हो तो अन्यको सावधानी बरतनी चाहिए।