बार-बार सीटी स्कैन कराना पड़ सकता हैं महंगा, हो सकता है ब्रेन कैंसर

इसकी वजह से ल्यूकेमिया और ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा ज्यादा होता है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : July 20, 2018 12:36 PM IST

मेडिकल के क्षेत्र में कुछ जांच ऐसी होती है जिंहे हम जिंदगी बचाने में अहम मानते हैं। सीटी स्कैन भी उन्हीं में से एक जांच होती है जो शरीर में छुपे हुए रोगों के बारे में जानने का सबसे अहम जरिया होता है। बीमारी का इलाज उतना महत्वपूर्ण नहीं होता है जितना कि उसका निदान, अगर निदान ही सही तरीके न हो तो सही इलाज भी नहीं हो पाता है।

सीटी स्कैन शरीर के अंदर के अंगों को स्कैन करके यह जानकारी उपलब्ध कराता है कि उसमें कोई बीमारी के लक्षण तो नहीं है। ब्रेन, लंग्स, लीवर और स्टमक में बीमारियों का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन का ही सहारी लिया जाता है।

हाल ही में हुए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि सीटी स्कैन से ब्रेन कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसा तब हुआ है जब मेडिकल क्षेत्र में इसका उपयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। ज्यादातर डाक्टर्स किसी भी बीमारी की शंका होने पर तुरंत सीटी स्कैन कराने की सलाह देते हैं।

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सीटी स्कैन के द्वारा जांच कराने का चलन इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि इसके माध्यम से आसानी से रोगों का नीदान संभव होता है। जब  नीदान बेहतर होता है तो मर्ज का इलाज भी कारगर हो पाता है। लेकिन यह शोध सीटी स्कैन से डर पैदा करने वाला भी है। अगर आवश्यक न हो तो सीटी स्कैन से बचना चाहिए।

शोधकर्ताओं ने अपने शोध में बताया कि सीटी स्कैन से जो खतरा है वह विकिरण के कारण होता है और इसका असर बच्चों पर ज्यादा पड़ता है। बच्चों में विकिरण की वजह से बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। अगर विकिरण से होने वाली बीमारियों की बात की जाय तो इसकी वजह से ल्यूकेमिया और ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा ज्यादा होता है।

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यह शोध नीदरलैंड के कैंसर इंस्टीट्यूट में किया गया। शोध में 1979 से 2012 के बीच बच्चों के हुए सीटी स्कैन डाटा का आकलन व विश्लेषण किया गया। शोध के लिए 1 लाख 68 हजार 394 बच्चों के डाटा का इस्तेमाल किया गया। विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने कैंसर के लक्षण को पाया।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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