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गर्दन और उंगलियां चटकाना सिर्फ आदत नहीं, तनाव का संकेत भी हो सकता है

क्या आप भी कभी अपनी उंगलियां तो कभी गर्दन चटकाते हैं? अगर हां तो यह सिर्फ रिलेक्स होने का तरीका नहीं, बल्कि मेंटल प्रेशर को भी दिखाता है। कैसे? आइए विस्तार से जानते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : June 29, 2026 8:35 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

क्या आप काम करते-करते बार-बार अपनी गर्दन चटकाते हैं? या बातचीत, पढ़ाई या सोचते समय अनजाने में उंगलियां चटकाने लगते हैं? ज्यादातर लोग इसे सिर्फ एक आदत या शरीर को आराम देने का तरीका मान लेते हैं। लेकिन इस विषय को लेकर साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि

"कुछ मामलों में यह सिर्फ शारीरिक आदत नहीं, बल्कि मानसिक स्ट्रेस, टेंशन और इमोशनल प्रेशर का भी संकेत हो सकता है। जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है, तो उसका शरीर कई बार अनजाने में ऐसी दोहराने वाली एक्टिविटी करने लगता है, जो उसे कुछ समय के लिए राहत या नियंत्रण का एहसास कराती हैं। गर्दन या उंगलियां चटकाना भी कुछ लोगों में इसी तरह का व्यवहार हो सकता है।” आइए अब हम इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

लोग गर्दन और उंगलियां क्यों चटकाते हैं?

डॉक्टर बताती हैं कि हर व्यक्ति का जॉइंट चटकाने के पीछे का कारण एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग जोड़ों में जकड़न महसूस होने पर ऐसा करते हैं, जबकि कई लोग बिना सोचे-समझे तनाव या बेचैनी के दौरान यह आदत दोहराने लगते हैं। अगर यह व्यवहार सिर्फ कभी-कभार होता है, तो यह सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर यह हर थोड़ी देर में होने लगे और व्यक्ति को खुद भी इसका एहसास न रहे, तो इसके पीछे मानसिक कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए।

तनाव से इसका क्या संबंध है?

जब व्यक्ति तनाव, चिंता या मानसिक दबाव में होता है, तो शरीर में मांसपेशियों का तनाव बढ़ सकता है। खासकर गर्दन, कंधों और हाथों की मांसपेशियां अधिक सख्त महसूस हो सकती हैं। ऐसे में व्यक्ति बार-बार गर्दन घुमाकर चटकाता है,उंगलियां चटकाता रहता है, हाथों को मरोड़ता है, पैरों को लगातार हिलाता रहता है और बार-बार अंगुलियों से कोई वस्तु घुमाता रहता है। ये सभी व्यवहार कई बार तनाव को कम करने की एक अनकॉनसियस कोशिश हो सकते हैं।

किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए?

तनाव बढ़ते ही आदत बढ़ जाना

अगर ऑफिस, परीक्षा, इंटरव्यू या किसी बहस के दौरान आप सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा गर्दन या उंगलियां चटकाने लगते हैं, तो यह मानसिक दबाव का संकेत हो सकता है।

बिना सोचे-समझे बार-बार ऐसा करना

कई लोगों को तब तक एहसास नहीं होता कि वे लगातार उंगलियां चटका रहे हैं, जब तक कोई दूसरा व्यक्ति उन्हें टोके नहीं। यह तनाव से जुड़ी आदतन प्रतिक्रिया हो सकती है।

चटकाने के बाद कुछ सेकंड की राहत महसूस होना

अगर ऐसा करने के बाद थोड़ी देर के लिए आराम, सुकून या तनाव कम महसूस होता है, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर तनाव को संभालने की कोशिश कर रहा है।

इसके साथ अन्य तनाव के लक्षण भी होना

डॉक्टर के अनुसार अगर गर्दन या उंगलियां चटकाने के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई दें, तो मानसिक तनाव की संभावना बढ़ जाती है। जैसे- लगातार चिंता या बेचैनी, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, नींद की समस्या और सिरदर्द या गर्दन में जकड़न।

क्या बार-बार गर्दन या उंगलियां चटकाना नुकसानदायक हो सकता है?

उंगलियां चटकाने से होने वाले नुकसान को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन अगर यह आदत बहुत अधिक हो जाए या इसके साथ दर्द, सूजन या जोड़ों में कमजोरी महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। वहीं, गर्दन को बार-बार जोर से चटकाना सुरक्षित नहीं माना जाता। 

अत्यधिक या गलत तरीके से गर्दन को झटके देना मांसपेशियों, लिगामेंट्स और दुर्लभ मामलों में रक्त वाहिकाओं पर भी असर डाल सकता है। इसलिए गर्दन में लगातार दर्द या जकड़न होने पर स्वयं बार-बार चटकाने के बजाय फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है।

इस आदत को कैसे कम करें?

तनाव के कारण को पहचानें- यह समझने की कोशिश करें कि आप किन परिस्थितियों में सबसे ज्यादा गर्दन या उंगलियां चटकाते हैं। इससे ट्रिगर पहचानने में मदद मिलेगी।

नियमित ब्रेक लें- अगर आप लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं, तो हर 30 से 45 मिनट में कुछ मिनट के लिए उठकर चलें और हल्की स्ट्रेचिंग करें।

रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं- गहरी सांस लेना, ध्यान और हल्की एक्सरसाइज मानसिक तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

शरीर का पोस्चर सुधारें- गलत बैठने की स्थिति के कारण भी गर्दन में जकड़न बढ़ सकती है। सही पोस्चर अपनाने से इस समस्या में राहत मिल सकती है।

जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट से मिलें- अगर यह आदत बहुत बढ़ गई है, तनाव लगातार बना रहता है या इसके कारण दर्द और परेशानी होने लगी है, तो मनोवैज्ञानिक या संबंधित चिकित्सा विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।

डिस्क्लेमर: गर्दन और उंगलियां चटकाना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन अगर यह आदत स्ट्रेस, चिंता या भावनात्मक दबाव के समय अधिक दिखाई देने लगे, तो इसे सिर्फ बुरी आदत कहकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार हमारा शरीर उन भावनाओं का संकेत दे देता है, जिन्हें हम शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। इसलिए अगर यह व्यवहार बार-बार दोहराया जा रहा है, तो सिर्फ आदत बदलने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे कारण को समझने पर भी ध्यान देना जरूरी है।