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कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक, भारत में दिल की बीमारियों से अचानक होने वाली मृत्यु (Sudden Cardiac Deaths) भारत में बढ़ रही हैं। जवान लोग इस स्थिति का सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं। भारत की कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी, एक ऐसी संस्था जिसमें भारत के लगभग 5000 से ज्यादा कार्डियोलॉजिस्ट शामिल हैं, एक मेगा एजुकेशनल ड्राइव को लॉन्च करने जा रही है जो कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) स्किल्स पर आधारित होगा।
दिल की बीमारियों से अचानक होने वाली मृत्यु (SCD) के कारण बेहोश होकर गिरने वाले लोगों के पास जीवित करने के लिए सिर्फ ढाई मिनट का समय होता है। जिन लोगों को इसके लक्षणों का पता है और ऐसे किसी व्यक्ति के साथ होता देखते हैं तो तुरंत सीपीआर करवाएं। ऐसा करने की बजाए हम लोगों की भीड़ जमा कर देते हैं। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य लोगों को एससीडी के लक्षणों से अवगत करवाना है। इग्नोरेंस की वजह से किसी की भी मृत्यु नहीं होनी चाहिए। किसी भी तरह का सीपीआर, सीपीआर के न होने से बेहतर है।
WHO के मुताबिक विश्व में मृत्यु का मुख्य कारण अब हृदय रोग बनते जा रहे हैं। 85% मृत्यु हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हो रही हैं।
सीपीआर ट्रेनिंग प्रोग्राम में किसी भी शिक्षा संस्थान, शॉपिंग मॉल या फिर सोसायटी आदि में फिजिकल कियोस्क सेट करना है और सीपीआर के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसे एक लाइफ स्किल के तौर पर माना जायेगा। जो लोग ऐसा सच में कर दिखाएंगे उन्हें बैज ऑफ ऑनर भी मिलेगा। इसके बाद वह कार्डियोलॉजिस्ट से सीपीआर के बारे में और ज्यादा सर्टिफाइड कोर्स सीखने में सक्षम हो सकेंगे।
अधिकतर प्रदूषण के कॉन्टैक्ट में आने से, ज्यादा शुगर का सेवन करने से और शारीरिक गतिविधि न करने की वजह से हमारा शरीर ज्यादा प्रभावित होता जा रहा है और हम अन हेल्दी जीवन जीने की ओर जा रहे हैं जो हृदय रोगों का मुख्य कारण बनता जा रहा है। इसलिए इन कारणों को अवॉयड करने की ही कोशिश करें।
सीपीआर को कार्डियो पल्मोनरी रीससिटेशन कहते हैं जो एक जीवनरक्षक तकनीक है. यह हार्ट अटैक जैसी मेडिकल इमरजेंसी में उपयोगी होता है। यह ऐसी स्थिति होती है, जब किसी व्यक्ति का सांस चलना या हृदय की धड़कन रुक जाए, इस दौरान जान बचाने के लिए समय पर सहायता देना सबसे महत्वपूर्ण होता है और अक्सर यह जीवनरक्षक साबित होता है।