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Written By: Jitendra Gupta | Published : September 30, 2021 4:57 PM IST
कोरोना के किसी भी वेरिएंट को मात देने के लिए मल्टीवेरिएंट वैक्सीन का ट्रायल शुरू, जानें किन देशों में मिली मंजूरी
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि कोविड वैक्सीन ने लोगों को महामारी से सुरक्षित रखने में मदद की है और वापस से जीवन को पटरी पर लाने का काम किया है। हालांकि मौजूदा वक्त में ऐसे कई बूस्टर शॉट्स हैं, जो आपको वायरस के प्रति सुऱक्षा प्रदान करते हैं। कई शोधकर्ता अब एक ऐसी वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं, जो एक साथ कई कई वेरिएंट के लिए कारगर साबित हो सकती है, जिसे मल्टी-वेरिएंट वैक्सीन के रूप में तैयार किया जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि ये वैक्सीन सभी कोरोनावायरस वेरिएंट के खिलाफ काम करेगी।
ब्रिटेन से लेकर भारत तक कुछ देशों ने इस तरह की वैक्सीन को हरी झंडी दे दी है। कुछ देशों में ये वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल पर तैयार की जा रही है तो कुछ देश इसे तैयार करने की योजना बना रहे हैं। आइए जानते हैं कि कैसे COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में मल्टीवेरिएंट वैक्सीन सबसे बड़ा बदलाव ला सकती है।
मल्टीवेरिएंट कोरोनावायरस वैक्सीन एक बहु उद्देश्यीय वैक्सीन है जो एक से अधिक वायरस के विभिन्न वेरिएंट के खिलाफ काम करती है। कोरोनावायरस के नए-नए वेरिएंट ने दुनियाभर में डर और दहशत फैलाने का काम किया है और वर्तमान में कोरोनावायरस वैक्सीन मॉडल की दक्षता को काफी कम कर दिया है। हाल ही में कुछ देशों में बूस्टर वैक्सीनेशन को बढ़ावादिया जा रहा है और एक्सपर्ट का सुझाव है कि मल्टीवेरिएंट COVID-19 वैक्सीन शॉट्स कोरोना वायरस के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। ये वैक्सीन अल्फा, बीटा और सबसे खतरनाक डेल्टा और तो और गामा वेरिएंट के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
बताया जा रहा है कि ये मल्टीवेरिएंट वैक्सीन कोरोनोवायरस के खिलाफ दुनिया की लड़ाई में एक नई उम्मीद साबित हो सकती है क्योंकि अभी भी लोगों को कोरोना वायरस के कई वेरिएंट्स से रिकवरी में बाधा आ रही है। वर्तमान में लोग डेल्टा वेरिएंट के खतरे का सामना कर रहे हैं और ऐसी संभावना हैं कि बदलते वक्त के साथ-साथ हमें नए और अधिक घातक वेरिएंट का भी सामना करना पड़ सकता है, जिसमें म्यू वेरिएंट भी शामिल है। म्यू वेरिएंट के बारे में ये कहा जा रहा है कि ये वेरिएंट वैक्सीन लगे व्यक्तियों में बनने वाली एंटीबॉडी को भी पार कर सकता है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में COVID-19 एक नियमित-फ्लू जैसी बीमारी में बदल जाएगा और वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस महामारी को खत्म करने का एकमात्र तरीका मल्टीवेरिएंट वैक्सीन ही लगवाना सही रहेगा।
शुरुआत में मल्टीवेरिएंट वैक्सीन को नोवेल कोरोनावायरस के कोर स्पाइक प्रोटीन को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये स्पाइक प्रोटीन शरीर में कोशिकाओं को निशाना बनाता है और इम्यून सिस्टम पर हमला करता है। इतना ही नहीं कुछ वेरिएंट वैक्सीन से बचकर इम्यून सिस्टम को निशाना बना लेते हैं और स्पाइक प्रोटीन संरचनाओं में बदलाव ला देते हैं। जबकि मल्टीवेरिएंट वैक्सीन नॉन-स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ भी काम करती है। कुछ वैक्सीन रोगजनक से जुड़ी प्रमुख आनुवंशिक कारणों को दबाकरल आपके इम्यून सिस्टम को वायरस की पहचान करने और उससे लड़ने में मदद करते हैं।
कुछ वैक्सीन टेक्नीक जैसे SaRNA, mRNA वैक्सीन वायरस का अच्छे से पता नहीं लगा पाती लेकिन वायरस की पहचान कर उसके खिलाफ हमला जरूर बोल देती हैं। फ्लू के टीके वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले एकमात्र मल्टीवेरिएंट टीके हैं, जिनका उपयोग विभिन्न फ्लू स्ट्रेन के खिलाफ हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है।