कोरोना रोगी हैं तो इस 1 काम को करने से शरीर में कम बनेंगी एंटी-बॉडी! आज से ही बंद कर दें ये काम

अगर कोई व्यक्ति कोरोना रोगी है और वो ये काम कर रहा है तो उसके शरीर में एंटी-बॉडी का निर्माण कम होगा, जिससे ठीक होने की प्रक्रिया लंबी हो जाएगी।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : May 31, 2021 4:35 PM IST

दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग तम्बाकू का नशा करते हैं। तम्बाकू में मुख्य रूप से नशाला पदार्थ निकोटीन पाया जाता है जिसके सेवन से शरीर में एड्रिनलिन ज़्यादा बनने लगता है। इससे शरीर में डोपामाईन की मात्रा भी बढ़ती है जिसे दिमाग का ‘‘हैप्पी’ कैमिकल कहते हैं। तम्बाकू के सेवन से गंभीर बीमारियों जैसे सांस (फेफड़ों का कैंसर, टीबी और सीओपीडी) और दिल की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में तंबाकू या धूम्रपान को छोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है, किंतु आज के दौर में यह और भी अधिक ज़रूरी हो जाता है क्योंकि धूम्रपान करने वाले कोविड-19 के मरीज़ों में कोविड के लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। इसक अलावा धूम्रपान करने वाले लोग अक्सर अपने मुंह को बार-बार छूते हैं, ऐसे में कोविड की चपेट में आने की संभावना भी बढ़ जाती है।

साथ ही, तंबाकू का सेवन बंद करने से फेफड़ों और कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन्स पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अगर व्यक्ति को कोविड-19 इन्फेक्शन हो भी जाए तो उसमें गंभीर लक्षणों की संभावना कम हो जाती है और मरीज़ जल्दी ठीक होता है।

धूम्रपान करने से कम बनती हैं एंटी-बॉडीज

धूम्रपान करने से एंटीबॉडी के लिए शरीर की प्रतिक्रिया कम हो जाती है। इसके अलावा पाया गया है कि धूम्रपान नहीं करने वालों की तुलना में धुम्रपान करने वालों में टीका लगने के बाद एंटीबॉडीज़ जल्दी खत्म हो जाते हैं। नींद में कमी एवं तनाव के कारण भी एंटीबॉडी का उत्पादन कम हो सकता है। इसलिए अच्छा होगा कि टीका लगवाने से पहले दो रात आप अच्छी नींद लें।

तंबाकू से फेफड़ों पर पड़ने वाला प्रभाव

अध्ययनों से यह भी पता चला है कि धूम्रपान का श्वसन तंत्र, खसतौर पर फेफड़ों पर बुरा प्रभाव होता है। यहां तक कि कोई अन्य बीमारी जैसे डायबिटीज़ या हाइपरटेंशन नहीं होने के बावजूद भी धूम्रपान करने वालों में कोविड-19 की संभावना अधिक होती है और इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

तंबाकू का सेवन करने वालों पर कोविड-19 का प्रभाव

तंबाकू का सेवन करने वालों पर सबसे ज़्यादा मनोवैज्ञानिक प्रभाव होता है। कोविड-19 उन्हें ज़्यादा चिंता और तनाव देता है। अध्ययनों से पता चला है कि लोग अक्सर नकारात्मक भावनाओं को कम करने के लिए तम्बाकू का सेवन करते हैं। अगर बीमारी गंभीर होने पर मरीज़ को अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो तंबाकू न मिलने के कारण व्यक्ति का तनाव और अधिक बढ़ जाता है। इस तरह तम्बाकू छोड़ना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

इसके अलावा अन्य प्रभावों में शामिल हैं:

  • वायरल निमोनिया
  •  एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रैस सिन्ड्रोम
  •  क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़
  •  अस्थमा
  •  कोविड के कारण होने वाले जटिलताओं के चलते ऐसे मरीज़ों को लम्बे समय तक ऑक्सीजन थेरेपी की ज़रूरत पड़ सकती है और अक्सर इन्हें ठीक होने में ज़्यादा समय लगता है।
  •  मृत्यु

तम्बाकू के सेवन से शरीर की इम्युनिटी यानि बीमारियों से लड़ने की ताकत कमज़ोर हो जाती है, जिसके चलते किसी भी बीमारी से लड़ना शरीर के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में तम्बाकू का सेवन करने वालों में कोविड-19 इन्फेक्शन की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा धूम्रपान करने से फेफड़ों की क्षमता कम होती है और कोविड के चलते सांस की बीमारियों की संभावना और अधिक बढ़ जाती हैं यही कारण है कि तम्बाकू का सेवन करने वालों के लिए कोविड-19 टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है।

लेकिन इस बात पर भी ध्यान देना ज़रूरी है कि तम्बाकू के सेवन से वैक्सीन की प्रभाविता कम हो जाती है। तम्बाकू के कारण शरीर एंटीबॉडी के लिए ठीक से प्रतिक्रिया नहीं कर पाता। ऐसे में तम्बाकू के सेवन से टीकाकरण अप्रभावी हो जाता है और इनकी इम्युनिटी पहले से कम होती है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो तम्बाकू के सेवन से एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो सकती है।

इनपुटः (डॉ. निखिल मोदी, सीनियर कन्सलटेन्ट, रेस्पीरेटरी एण्ड पल्मोनरी केयर, इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली )

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