वैज्ञानिकों ने कहा कफ की एक बूंद 6.6 मीटर तक कर सकती है यात्रा, कोविड-19 संक्रमण से बचने के लिए मास्क के साथ सोशल-डिस्टेंसिंग ज़रूरी

वैज्ञानिको का दावा है कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से बाहर निकलने वाली कफ की बूंदें 6 मीटर से अधिक दूरी तक फैल सकती है। हाल ही में एक रिसर्च किया गया जिसमें, सामने आया कि खांसी होने पर कफ की एक बूंद हवा में 2 मीटर/ प्रति सेकंड की गति से से 6.6 मीटर तक की यात्रा कर सकती है। जब, हवा में रूखापन अधिक हो तो, कफ की छोटी बूंद इससे भी ज्यादा दूरी तक यात्रा कर सकती है। (Covid-19 Spread in hindi)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 4, 2020 7:44 PM IST

Covid-19 Spread: कोविड-19 संक्रमण के प्रसा से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ है। वैज्ञानिको का दावा है कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से बाहर निकलने वाली कफ की बूंदें 6 मीटर से अधिक दूरी तक फैल सकती है। हाल ही में एक रिसर्च किया गया जिसमें, सामने आया कि खांसी होने पर कफ की एक बूंद हवा में 2 मीटर/ प्रति सेकंड की गति से से 6.6 मीटर तक की यात्रा कर सकती है। जब, हवा में रूखापन अधिक हो तो, कफ की छोटी बूंद इससे भी ज्यादा दूरी तक यात्रा कर सकती है। (Covid-19 Spread in hindi)

कफ की बूंद तय करती हूं  6 मीटर से लम्बी दूरी:

सिंगापुर के रिसर्चर्स ने वायरल ट्रांसमिशन को समझने के लिए द्रव भौतिकी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर गौर किया। इस रिसर्च के परिणामों को जर्नल 'फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स' में प्रकाशित किया गया। इस रिसर्च के दौरान में नन्हीं बूंद के प्रसार पर सिमुलेशन के जरिए अध्ययन किया। इस रिसर्च के लेखक फोंग येव लियोंग ने बताया, " खांसी के साथ कफ की छोटी बूंदों को रोकने के लिए मास्क पहनना कारगर है। लेकिन, साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के तरीके को भी कारगर पाया गया। ऐसा इसलिए, क्योंकि खांसी के साथ किसी व्यक्ति के मुंह से निकली छोटी बूंद का असर कम से कम एक मीटर की दूरी पर खड़े व्यक्ति पर कम होता है।"

कोविड-19 से बचने के लिए मास्क के साथ रखें 7 मीटर की दूसरी :

इसको विस्तार से समझाते हुए बताया कि, जब कोई एक बार खांसता है तो बहुत अधिक म पर बड़ी सीमा में हजारों बूंदों का उत्सर्जन होता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि, गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ज़मीन पर बड़ी-बड़ी बूंदें पड़ी मिलीं, लेकिन खांसने पर बिना हवा के भी बूंदें एक मीटर तक गईं। दरअसल, मध्यम आकार की बूंदें छोटी बूंदों में वाष्पित हो सकती हैं, जो हल्की होने के कारण आसानी से और आगे की यात्रा करती हैं।

लेखक ने आगे कहा, "वाष्पीकृत होने वाली छोटी बूंद में गैर-वाष्पशील वायरल सामग्री होती है इससे वायरल के फैलने का खतरा प्रभावी रूप से बढ़ जाता है। यह वाष्पित बूंदें एरोसोल बन जाती हैं और वे फेफड़ों में गहराई से प्रवेश करने को लेकर अधिक संवेदनशील होती हैं।"

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