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What mistakes increase the risk of infertility: निःसंतानता के लिए अक्सर लोग महिलाओं को दोषी ठहराते हैं लेकिन अगर आप रिपोर्ट्स की बात करें तो इसके लिए महिलाएं जितनी जिम्मेदार होती हैं उतने ही पुरुष भी। महिलाओं में निःसंतानता का कारण हॉर्मोनल असंतुलन, मोटापा, अव्यवस्थित जीवनशैली, अधिक उम्र, आदि हो सकता है। वहीं पुरुष निःसंतानता का कारण शराब, सिगरेट जैसी नशीली पदार्थों का सेवन, तनाव, या किसी तरह की अनुवांशिक समस्या हो सकती है। इस मामले में किसी भी निर्णय तक पहुँचने से पहले आपको जागरूक होना पड़ेगा तभी समस्या की जड़ तक पहुँच कर उसका समाधान ढूंढा जा सकता है।
आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा ने बताया कि हाल फिलहाल में इनफर्टिलिटी की समस्या और भी बढ़ गई है। जिसका एक कारण अधिक उम्र में शादी करना भी है। पहले के समय में लोग 20 से 25 की उम्र तक शादी कर लेते थे जिससे फैमिली प्लानिंग के लिए उनके पास काफी समय होता था लेकिन आधुनिक दौड़ में करियर की टेंशन के कारण महिला और पुरुष दोनों पहले आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहते हैं उसके बाद शादी करते हैं। इन सब में उनकी उम्र 30 से ज्यादा हो जाती है और बढ़ती उम्र का असर उनकी प्रजनन क्षमता पर देखा जा सकता है। जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है फर्टिलिटी घटने लगती है, जिसके परिणास्वरूप निःसंतानता की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
केवल बढ़ती उम्र ही नहीं बल्कि खानपान के तौर तरीके और अव्यवस्थित जीवनशैली भी निःसंतानता का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। डॉ चंचल शर्मा ने बताया कि 30 की उम्र के बाद महिलाओं का ओवेरियन रिजर्व कम होने लगता है। उनके क्लिनिक आशा आयुर्वेदा में रोजाना कम से कम 20 ऐसे पेशेंट्स आते हैं जिन्हें निःसंतानता की समस्या होती है। इसमें से ज्यादातर लोग समाज के उस तबके से आते हैं जो महंगे उपचार के लिए सक्षम नहीं होते हैं लेकिन आयुर्वेदिक उपचार द्वारा बिना किसी साइड इफेक्ट्स के उन्हें सफलता मिलती है।
निःसंतानता जैसी दिक्कत होने पर आपको पहले किसी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि डॉक्टर जांच करके यह पता लगा सकते हैं कि उपचार की जरुरत किसको है - पुरुष पार्टनर को या महिला पार्टनर को? एक बार जब कारण का पता चल जाता है तब उसका आयुर्वेदिक उपचार करना आसान हो जाता है। आयुर्वेद में पंचकर्म थेरेपी के माध्यम से मरीज को गर्भधारण के लिए तैयार किया जाता है। एक बार जब आपका शरीर गर्भधारण के लिए तैयार हो जाता है तब कन्सीव करना आसान हो जाता है और प्रेगनेंसी के नौ महीने में उचित देखभाल की मदद से आप एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकते हैं।
डॉ चंचल शर्मा बताती हैं कि निःसंतानता का आयुर्वेदिक उपचार बहुत प्रभावकारी होता है। उनके यहाँ करीब 80 प्रतिशत मरीजों को साकारात्मक परिणाम मिले हैं। आयुर्वेदा समस्या के मूल कारणों का इलाज करता है जिसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।