क्या क्रॉनिक हेपेटाइटिस से बढ़ता है लिवर कैंसर का खतरा? जानें डॉक्टर की राय

क्रॉनिक हेपेटाइटिस B, C और D लंबे समय तक रहने पर लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं और सिरोसिस व लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। जानिए किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और बचाव के लिए क्या करें।

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Written By: Anju Rawat | Published : July 27, 2026 5:57 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Amit Miglani

लिवर... भोजन को ऊर्जा में बदलने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने और कई जरूरी प्रोटीन बनाने का काम करता है। लेकिन, आजकल खराब खान-पान और जीवनशैली की वजह से लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ रहा है। इसमें हेपेटाइटिस भी एक है, जिसमें लिवर में सूजन आ जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कुछ प्रकार के क्रोनिक हेपेटाइटिस का समय पर इलाज कराना बहुत जरूरी है, वरना यह लिवर सिरोसिस बन सकता है। लेकिन, क्या अगर हेपेटाइटिस का इलाज समय पर न किया जाए, तो इससे लिवर कैंसर हो सकता है?

आपको बता दें कि हेपेटाइटिस कई कारणों से हो सकता है। इसमें वायरस, अत्यधिक शराब का सेवन, कुछ दवाओं का दुष्प्रभाव या ऑटोइम्यून बीमारियां शामिल हैं। इसमें लिवर में सूजन हो जाती है और अगर यह सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। आइए, विश्व हेपेटाइटिस दिवस (हर साल 28 जुलाई को मनाया जाता है) के मौके पर एशियन हॉस्पिटल, के डायरेक्टर एंड एचओडी-गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. अमित मिगलानी से जानते हैं कि हेपेटाइटिस रोगियों में लिवर कैंसर का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

हेपेटाइटिस रोगियों में क्यों बढ़ता है लिवर कैंसर का खतरा!

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि लिवर कैंसर के ज्यादा मामलों के पीछे लंबे समय तक रहने वाला वायरल हेपेटाइटिस एक प्रमुख कारण होता है। डॉ. अमित बताते हैं कि अगर हेपेटाइटिस 6 महीने से अधिक समय तक रहता है, तो इसे क्रॉनिक हेपेटाइटिस कहा जाता है और इस स्थिति में लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचने लगता है।

डॉ. अमित मिगलानी बताते हैं कि जब हेपेटाइटिस की वजह से लिवर में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है, तो इसकी कोशिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और नई कोशिकाएं बनती रहती हैं। इस प्रक्रिया में ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जो बाद में कैंसर सेल्स विकसित कर सकते हैं। इस तरह से ही लिवर कैंसर का खतरा बढ़ता है। हालांकि, हर तरह का हेपेटाइटिस, लिवर कैंसर विकसित नहीं करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हेपेटाइटिस B, C और D लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।

इन लक्षणों की न करें अनदेखी

वैसे तो लिवर कैंसर के शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। लेकिन, जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है कई संकेत मिलने लगते हैं। जैसे-

  • लगातार थकान महसूस होना
  • बिना कारण वजन कम होना
  • भूख कम लगना
  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन
  • त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
  • पेट में सूजन होना
  • मतली या उल्टी होना

हालांकि, ये लक्षण अन्य बीमारियों के भी हो सकते हैं। इसलिए लक्षण नजर आने पर समय पर जांच और इलाज बहुत जरूरी है।

क्या लिवर कैंसर से बचाव संभव है?

लिवर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
  • असुरक्षित यौन संबंध बनाने से बचें।
  • अगर हेपेटाइटिस बी या सी का संक्रमण है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीवायरल उपचार लें।
  • शराब पूरी तरह से छोड़ दें, इससे लिवर को नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
  • बैलेंस डाइट लें और रेगुलर एक्सरसाइज या योग भी जरूर करें।
  • ब्लड शुगर लेवल और मोटापे को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है।

Disclaimer: हेपेटाइटिस सिर्फ एक सामान्य संक्रमण नहीं है। अगर इसका समय पर इलाज न कराया जाए, तो इससे लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और लिवर कैंसर तक हो सकता है। इसलिए हेपेटाइटिस के रोगियों को लिवर की सेहत का अतिरिक्त ख्याल रखना बहुत जरूरी है। अगर आपको ऊपर बताए गए या कोई असामान्य लक्षण लंबे समय तक महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और समय पर जांच-इलाज जरूर कराएं।