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What is Bronchitis in hindi :ब्रोंकाइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें ब्रोन्कियल ट्यूब में सूजन हो जाती है। ये ट्यूब फेफड़ों तक हवा पहुंचाने का काम करती है। इसमें खांसी बहुत होती है साथ ही बलगम की समस्या भी बढ़ जाती है। ब्रोंकाइटिस में सांस लेते समय पीड़ित व्यक्ति को घरघराहट होने के साथ ही सीने में दर्द, बेचैनी, हल्का बुखार, सांस की तकलीफ भी हो सकती है।
तीव्र (एक्यूट) और पुरानी (क्रोनिक) ये दो प्रकार के ब्रोंकाइटिस होते हैं। संक्रमण या फेफड़े के परेशानियों का कारण तीव्र ब्रोंकाइटिस होती है। यह 2 से चार सप्ताह तक रहता है। इसका उपचार भी संभव है। क्रोनिक ब्रोंकाइटिस फेफडों की लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है। यह फेफड़ों में होने वाले रोगों जिन्हें सीओपीडी या लंबे समय तक रहने वाले अवरोधक क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज कहते हैं, में से एक है। इससे हुई क्षति कई बार समय के साथ बदतर होती जाती है, जिसका इलाज नहीं हो पाता है।
1- बार-बार खांसी होना।
2- थकान महसूस करना।
3- खांसते या गहरी सांस लेते समय सीने में दर्द।
4- सांस लेते समय आवाज होना।
5- सांस फूलना।
6- बदन दर्द।
7- बुखार या ठंड लगना।
8- गले में तकलीफ।
9- नाक बहना या बंद होना।
1- बैक्टीरिया या विषाणु संक्रमण।
2- स्मोकिंग।
3- वायु प्रदूषण।
4- वायु में किसी चीज से एलर्जी जैसे पराग कण।
5- फेफड़ों का रोग जैसे दमा अथवा वातस्फीति (emphysema)।
यदि आपको ऐसे कोई भी लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से बिना देर किए संपर्क करें। इसके लिए सांस लेने में आपकी मदद करने वाली दवाएं और सांस के व्यायाम शामिल हैं। यदि आपको लंबे समय तक रहने वाला ब्रोंकाइटिस है तो आपको ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही इन बातों का भी ध्यान रखें-
1-सर्दी और फ्लू से बचें।
2- बलगम पतला रखने के लिए अधिक मात्रा में पेय पदार्थ का सेवन करें।
3- ह्यूमिडिफायर (नमी रक्षक) या वेपराइजर का प्रयोग करें।
4- आपके फेफड़ों से बलगम निकालने के लिए उचित स्थिति में बैठना और थपकी देना।
लंबे समय तक रहने वाले ब्रोंकाइटिस से होने वाली क्षति को धीमा करने का एकमात्र तरीकाधूम्रपान छोड़ना है। शराब न पिएं। इससे वायु मार्ग को साफ करने के लिए खांसने और छींकने की इच्छा कम होती है। यह आपके शरीर में द्रवों की कमी करता है जिससे आपके फेफड़ों में बलगम सख्त हो जाता है तथा उसके निकलने में मुश्किल होती है। ऐसी चीजों से बचें जो आपके फेफड़ों के लिए हानिकारक है जैसे वायु प्रदूषण, धूल और गैस। अपने शरीर का ऊपरी हिस्सा उठाकर सोएं। अपना सिर बिस्तर से ऊंचा रखने के लिए फोम के बड़े टुकडों का प्रयोग करें।
1-- जब बहुत ठंड लग रही हो या 101 डिग्री से ज्यादा बुखार हो।
2- सांस लेने में तकलीफ हो और इनहेलर या सांस उपचार की ज्यादा जरूरत पड़ रही है।
3- बलगम अधिक है, रंग भी अलग हो और बाहर निकलने में अधिक मुश्किल हो रही है।
-4 आपके नाखूनों या उंगलियों की त्वचा या मुंह में नए या बढ़ते नीले या भूरे धब्बे पड़ रहे हैं।