क्या होता है जब कोरोनावायरस शरीर में करता है प्रवेश? जानें किस तरह वायरस शरीर के अंगों को पहुंचाता है नुकसान

कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में कई ऐसी चीजें होती हैं, जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं। जानें, विस्तार से कि जब कोरोनावायरस आपके शरीर को संक्रमित करता है, तो शरीर के अंदर और क्या-क्या (Coronavirus Side Effects in Hindi) नुकसान होता है।

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Written By: Anshumala | Updated : December 5, 2020 9:41 PM IST

Coronavirus Side Effects in Hindi: कोरोनावायरस के कारण होने वाली बीमारी कोविड-19 (COVID-19) में सबसे ज्यादा रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को नुकसान पहुंचाता है। रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट मुंह, नाक, गले और फेफड़ों के बीच का वायुमार्ग (Airway) होता है। कोरोनावायरस उसी जगह पर अटैक करता है, जहां कॉमन कोल्ड यानी सर्दी होती है। लेकिन, COVID-19 आपके फेफड़ों सहित आपके रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट (Respiratory tract) में गहराई तक जाकर नुकसान पहुंचाता है। जब आपके शरीर में कोरोनावायरस (Coronavirus in Hindi) अटैक करता है, तो शरीर की इम्यून सिस्टम पलटवार करती है। इसका एक मुख्य संकेत या लक्षण बुखार (Fever) है। इसके साथ ही आपको खांसी (Cough) भी हो सकती है। कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में कई ऐसी चीजें होती हैं, जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं। जानें विस्तार से कि जब कोरोनावायरस आपके शरीर को संक्रमित करता है, तो शरीर के अंदर और क्या-क्या (Coronavirus Side Effects in Hindi) नुकसान होता है।

शरीर पर किस तरह से कोरोनावायरस करता है अटैक?

कोरोनावायरस (Coronavirus) स्वस्थ कोशिकाओं में प्रवेश करके आपके शरीर को संक्रमित (HOW DOES CORONAVIRUS ATTACK YOUR BODY) करता है। वहां, हमला करने वाला (Invader) खुद की कॉपी बनाता है और आपके पूरे शरीर में मल्टीप्लाई होता जाता है। कोरोनावायरस स्वस्थ कोशिकाओं खासकर फेफड़ो में मौजूद स्वस्थ कोशिकाओं पर मौजूद रिसेप्टर्स पर अपनी नुकीली सतह के प्रोटीन को छोड़ते हैं। विशेष रूप से, ACE2 रिसेप्टर्स के माध्यम से वायरल प्रोटीन कोशिकाओं में फैल जाते हैं। एक बार कोरोनावायरस के अंदर पहुंच जाने पर यह स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला कर देता है। अंतत: यह कुछ स्वस्थ कोशिकाओं को खत्म कर देता है।

कैसे आपके शरीर में कोरोनावायरस घूमता है?

स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करते-करते यह वायरस आपके पूरे शरीर में घूमने लगता है। आखिर ऐसा कैसे होता है, आइए जानते हैं...

वायरस एक संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींक या सांस के जरिए निकलने वाले बूंदों (Droplets) के जरिए फैलना शुरू करता है। वे हवा या फिर सतह पर हो सकते हैं। जैसे ही आप वायरस ड्रॉपलेट प्रभावित जगहों को छूते हैं और फिर अपने चेहरे, नाक, मुंह या आंख को छू लेते हैं, तो आपके संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे वायरस (Virus) आपके गले में मौजूद श्लेष्म झिल्ली (Mucous Membranes) में पहुंच जाता है। यदि वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर गया है, तो 2 से 14 दिनों के अंदर आपको नीचे बताए गए लक्षण नजर आने लगेंगे:

बुखार

खांसी

थकान

ठंड या कंपकंपी लगना

सांस लेने में तकलीफ

शरीर में दर्द

गले में खराश

सिरदर्द (Symptoms of coronavirus in hindi)

नाक बहना

स्वाद और गंध ना समझ आना

उल्टी या मतली, दस्त

क्या होता है जब कोरोनावायरस शरीर में करता है प्रवेश?

जब कोरोनोवायरस (Coronavirus) आपके शरीर में प्रवेश करता है, तो यह पहले आपके फेफड़ों में दो कोशिकाओं गोबलेट सेल्स जो म्यूकस का निर्माण करती हैं और सिलिया सेल्स जिन पर बाल होते हैं, को बांधता है। इन कोशिकाओं का कार्य आपके फेफड़ों को बाहरी धूल और प्रदूषण से सुरक्षित रखना है। वे आमतौर पर आपके फेफड़ों के अंदर गंदगी और तरल पदार्थ जैसे वायरस, बैक्टीरिया, धूल और पराग कणों को भरने से रोकते हैं।

आपके शरीर में प्रवेश करने के बाद कोरोनोवायरस (Coronavirus Side Effects in Hindi) इन कोशिकाओं पर हमला करता है और उन्हें मारना शुरू कर देता है, इसलिए आपके फेफड़े तरल पदार्थ से भरने लगते हैं, जिससे आपको सांस लेने में मुश्किल होती है। अध्ययनों के अनुसार, कोविड-19 डिजीज (Covid-19 Disease) का यह विशेष चरण लगभग एक सप्ताह तक रहता है।

इस प्वाइंट पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ना शुरू कर देती है। इसी दौरान हमें बुखार होना शुरू होता है। फिर धीरे-धीरे खांसी और बहती नाक के जरिए बलगम (Mucus) बाहर निकलता है। लेकिन, कुछ लोगों में, विशेष रूप से बुजुर्गों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों में प्रतिरक्षा प्रणाली हद से अधिक एक्टिव होकर वायरस को मारने के साथ ही स्वस्थ कोशिकाएं को भी मारने लगता है।

कोरोनावायरस का फेफड़ों पर प्रभाव (Coronavirus effect on lungs)

एक बार जब वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो कई अलग-अलग चीजें होती हैं। COVID-19 एक रेस्पिरेटरी डिजीज है, इसलिए फेफड़े (Lungs) आमतौर पर पहले प्रभावित होते हैं। कई मामलों में, वायरस रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट पर रुक जाता है, लेकिन कभी-कभी यह फेफड़ों में काफी नीचे तक पहुंच जाता है और खुद का निर्माण करने के लिए सभी कोशिकाओं को हाइजैक कर लेता है। इससे इंफ्लेमेशन हो सकता है, जो निमोनिया और एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बनता है। इस स्थिति में फेफड़े सख्त होने के साथ ही लिक्विड से भर जाते हैं। कोरोनावायरस से संक्रमित (Coronavirus infection) होने के शुरुआती लक्षणों (Symptoms of coronavirus in hindi) में बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने की तकलीफ शामिल है। ये वायरस के संपर्क में आने के बाद 2 से 14 दिनों के अंदर दिखाई देते हैं।

कोरोनावायरस का अन्य अंगों पर प्रभाव (Effect of coronavirus on other organs)

फेफड़ों पर सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है, लेकिन कोरोनावायरस शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। डॉक्टर्स के अनुसार, जो लोग गंभीर रूप से बीमार होते हैं, उनमें अंगों के ठीक तरह से काम ना करने की समस्या देखी जाती है।

- कोरोनावायरस पेट और आंतों को भी प्रभावित करता है। कुछ मरीजों में गैस्ट्रोइंटेस्टिनल लक्षण जैसे डायरिया या उल्टी देखे जा सकते हैं।

- कोरोनावायरस दिल (Coronavirus effects on heart) और रक्त की कोशिकाओं पर भी अटैक करता है। जिन लोगों को हृदय रोग है, उन्हें खासकर वायरस से अलर्ट रहना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोरोनावायरस हृदय और रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है, तो अनियमित हार्ट रिदम, ऊतकों को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिलना या लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है।

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