Coronavirus Pandemic: यूरोप में बच्चों में बढ़े कावासाकी सिंड्रोम के मामले, जानें क्या इसका है कोरोना वायरस से संबंध

पिछले कुछ हफ्तों में कई बच्चों को कावासाकी डिज़िज़  के कारण यूके, अमेरिका, फ्रांस, इटली, स्पेन और स्विट्जरलैंड में इटेंसिव केयर यूनिट्स में दाखिल किया गया है। अब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (World Health Organisation) यह पता लगाने की कोशिशें कर रहा है कि क्या कावासाकी और कोरोना वायरस एक-दूसरे से जुड़े हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 4, 2020 8:27 PM IST

Coronavirus Pandemic: अभी तक यही माना जाता रहा है कि कोविड-19 (Covid-19 Sydrome) के ख़तरे से कम उम्र के लोग सुरक्षित हैं। क्योंकि, कोविड इंफेक्शन की वजह से अस्पताल जाने वाले और मरनेवाले लोगों में अधिक उम्र के लोग ही ज़्यादा हैं।  लेकिन, पिछले कुछ हफ्तों में कई बच्चों को कावासाकी डिज़िज़  के कारण यूके, अमेरिका, फ्रांस, इटली, स्पेन और स्विट्जरलैंड में इटेंसिव केयर यूनिट्स में रखना पड़ा है। अब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (World Health Organisation) यह पता लगाने की कोशिशें कर रहा है कि क्या कावासाकी और कोरोना वायरस एक-दूसरे से जुड़े हैं। (Coronavirus Pandemic in hindi)

क्या है कावासाकी सिंड्रोम (Kawasaki Syndrome):

यह एक ऐसी बीमारी है जिसके कारणों का पता नहीं है। कावासाकी सिंड्रोम में ब्लड वेसल्स और दिल के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों पर भी असर पड़ता है। कावासाकी सिंड्रोम के आम लक्षणों में तेज़ बुखार, लो ब्लड प्रेशर, रैशेज़ और सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानियां होती हैं। यह समस्या 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ज़्यादा दिखायी पड़ता है। हालांकि, भारत में इससे प्रभावित होने वाले बच्चों में से एक तिहाई बड़ी उम्र के हैं। रूमेटिक फीवर (rheumatic fever) के बाद यह दिल की बीमारियों का सबसे आम कारण हैं।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) इस बीमारी से जुड़ी समस्याओं के बारे में सर्विलेंस स्टडी करने की बात कर रहा है। ताकि,  स्थिति और इसके प्रभाव का पता लगाया जा सके। ग्लोबल कार्डियोलॉजी साइंस और प्रैक्टिस में छपी एक स्टडी के अनुसार, कावासाकी सिंड्रोम की दर 5 वर्ष से छोटे बच्चों में एक लाख में से 150 पीड़ितों की है। लेकिन, भारत में इसकी जांच नहीं हो पाती, इसीलिए इसके आंकड़ें सही तरीके से पता नहीं पाए हैं।   इसके अलावा लड़कों में इस समस्या की दर अधिक देखी जाती है। (Coronavirus Pandemic)

बच्चों में कोविड-19 के लक्षण कैसे दिखायी पड़ते हैं (Symptoms of Covid-19):

जहां बच्चे कोविड-19 से पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। वहीं, उनमें माइल्ड लक्षण ही दिखायी पड़ते हैं। चीन द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा में कहा गया कि, एक-दूसरे से सम्पर्क के कारण फैले  कोविड-19 इंफेक्शन के 13 प्रतिशत कन्फर्म्ड केसेस में किसी प्रकार के लक्षण नहीं दिखायी पड़े। लेकिन,  जब कन्फर्म और संदिग्ध केसेस को एकसाथ देखा गया। तो,  6-10 साल के बच्चों में एक तिहाई ऐसे ही केसेस मिले जिनमें,  कोई लक्षण नहीं दिखायी पड़ रहे थे।

भले ही, बच्चों में कोविड-19 के गम्भीर लक्षण नहीं दिखायी पड़ते। लेकिन,  बच्चे भी वायरस के पोटेंशियल कैरियर होते हैं और अपने आसपास के लोगों को भी संक्रिमित कर सकते हैं। इसीलिए,  उन्हें ऐसे लोगों से दूर रखना चाहिए जिन्हें कोविड-19 इंफेक्शन का ख़तरा अधिक है। बुज़ुर्गों को अस्थमा, डायबिटीज़, हायपरटेंशन, किडनी डिज़िज़ेज़ और डायबिटीज़ जैसी बीमारियां होती हैं और इनकी वजह से उनके लिए  कोविड-19 का ख़तरा अधिक होता है। इसीलिए, इंफेक्टेड बच्चों को अपने दादा-दादी वगैरह से दूर रखना चाहिए।

जर्मनी में हुई एक स्टडी में बताया गया है कि, बच्चों से भी इंफेक्शन फैलने का ख़तरा उतना ही होता है जितना कि बड़ों से है। बर्लिन में इस तरह के मामलों को ध्यान में रखते हुए यह निष्कर्ष निकालागया कि वायरस फैलने का खतरा हर उम्र के लोगों  एक समान था। (Coronavirus Pandemic in hindi.)

बच्चों में कावासाकी सिंड्रोम के संकेत (Symptoms of Kawasaki Syndrome in Kids):

  • स्किन की रंगत बदलना
  • हाथ पैर ठंडे महसूस होना
  • सांस लेने में परेशानी औऱ रूकावट, आवाज़ में घुरघुराहट
  • होंठो का नीला पड़ना
  • चक्कर आना
  • बहुत अधिक रोना
  • थकान, सुस्ती
  • रैशेज़
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