गर्मियों में भी नहीं थमेगा कोरोना का प्रकोप, 60 डिग्री तामपान में भी फैल सकता है वायरस

कोरोना वायरस को लेकर कई बार ये दावे किए गए हैं कि गर्मियों में कोरोना वायरस का प्रकोप कम हो जाएगा, क्योंकि अधिक तापमान के कारण संक्रमण निष्क्रिय हो जाता है। लेकिन अब फ्रांस के वैज्ञानिकों के द्वारा हुए शोध में भी इस बात को खारिज कर दिया गया है। दरअसल,  दक्षिणी फ्रांस की एइक्स मार्सियेले यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रेमी शेरेल ने अपनी टीम के साथ एक रिसर्च किया। इस टीम द्वारा कोविड-19 को 60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर टेस्ट किया।

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Written By: Kishori Mishra | Published : April 15, 2020 5:17 PM IST

कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर कई बार ये दावे किए गए हैं कि गर्मियों में कोरोना वायरस (Coronavirus) का प्रकोप कम हो जाएगा, क्योंकि अधिक तापमान के कारण संक्रमण निष्क्रिय हो जाता है। लेकिन अब फ्रांस के वैज्ञानिकों के द्वारा हुए शोध में भी इस बात को खारिज कर दिया गया है। दरअसल,  दक्षिणी फ्रांस की एइक्स मार्सियेले यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रेमी शेरेल ने अपनी टीम के साथ एक रिसर्च किया। इस टीम द्वारा कोविड-19 को 60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर टेस्ट किया।

करीब एक घंटे तक 60 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कोरोना वायरस (Coronavirus) को टेस्ट करने के बाद रेमी और उनकी टीम ने देखा कि कोरोना के कुछ किस्म अब भी संक्रमण फैलाने में सक्षम थीं। इसका मतलब साफ है कि हाई डिग्री टेंम्प्रेचर में भी इस वायरस को निष्क्रिया करना कठिन है।

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भारत में कितना होगा असर?

भारत में कई ऐसे लोग हैं, जो इस बात को मानते हैं कि भारत गर्म देश होने के कारण यहां कोरोना का असर कम होगा। लेकिन यह रिसर्च उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने के समान है। भारत के कुछ ही ऐसे राज्य हैं, जहां का तापमान 50 डिग्री से ऊपर पहुंचता है। ऐसे में अगर इन राज्यों में कोरोना (Coronavirus) फैलता है, तब भी 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में कोरोना वायरस पूरी तरह से निष्क्रिय नहीं हो सकता है। यानि लोगों का ये मान लेना कि भारत में कोरोना वायरस का असर कम होगा, ये बिल्कुल गलत है।

कैसे किया वैज्ञानिकों ने शोध

इस शोध को पूरा करने के लिए सबसे पहले वैज्ञानिकों की टीम ने अफ्रीका में पाए जाने वाले बदरों की एक विशेष प्रजाति लिया। बंदरों की इन प्रजाति के किडनी सेल्स को वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से संक्रमित किया। बंदरों के सेल्स को संक्रमित करने के लिए एक मरीज से वायरस लिया गया था।

शोध में हुआ चौंका देने वाला खुलासा

बंदरों के सेल्स को संक्रमित करने के बाद वैज्ञानिकों ने इस वायरस को दो अलग-अलग ट्यूब में रखा। एक ट्यूब को गंदे परिवेश में रखा और दूसरे को साफ-सुखरे परिवेश में। इसके बाद जब इस वायरस का टेस्ट किया गया तो काफी चौंका देने वाला रिजल्ट सामने आया। वैज्ञानिकों ने देखा कि साफ-सुथरे वातावरण कोरोना वायरस हाई टेंपरेचर में निष्क्रिय हो गया। लेकिन गंदे स्थान पर पनप रहे पनप रहा वायरस अभी भी संक्रमण फैलाने के लिए सक्षम था। हाई टेंपरेचर होने के कारण कोरोना वायरस कमजोर हुआ, लेकिन वह उस वायरस में संक्रमण फैलाने की क्षमता पर्याप्त थी।

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मालूम हो कि पूरे विश्व में कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है। दुनिया के कई वैज्ञानिक इस वायरस से निपटने के लिए शोध कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई है। भारत में भी आंकड़ा काफी तेजी से फैल रहा है। अबतक यहां करीब 377 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 11 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं।

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