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Sepsis Infection in Hindi: जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर है या जो लोग पहले से ही किसी गंभीर रोगों से ग्रस्त हैं, उनके लिए कोरोना से संक्रमित होना गंभीर साबित हो रहा है। डब्ल्यूएचओ (WHO) ने 8 सितंबर 2020 में जारी किए अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि कोरोना संक्रमित होने पर सेप्सिस (Sepsis) होने का खतरा बढ़ जाता है। सेप्सिस उन लोगों को आसानी से हो सकता है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। यदि कोई व्यक्ति पहले से ही किसी संक्रामित रोग से ग्रस्त हो, तो सेप्सिस होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। जानते हैं क्या है सेप्सिस, इसके लक्षण और कारण (Sepsis Causes and Symptoms in Hindi)...
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में सेप्सिस (Sepsis Infection in Hindi) के कारण होने वाली मौत का आंकड़ा है 20 फीसदी। सेप्सिस होने पर शरीर के अंग अपना काम करना बंद कर देते हैं, साथ ही खून को भी नुकसान पहुंचता है। सेप्सिस खून से संबंधित एक गंभीर बीमारी है। इसे सेप्टिसीमिया (Septicemia) भी कहा जाता है। सेप्टिसीमिया एक गंभीर रक्तप्रवाह संक्रमण है। इसे रक्त विषाक्तता (Blood poisoning) के रूप में भी जाना जाता है। सेप्टिसीमिया तब होता है, जब बैक्टीरियल इंफेक्शन शरीर में कहीं भी जैसे फेफड़े या त्वचा आदि के रक्तप्रवाह (Bloodstream) में प्रवेश करता है। सेप्सिस (Sepsis) बहुत खतरनाक स्थिति है, क्योंकि बैक्टीरिया और उनके टॉक्सिन रक्तप्रवाह के जरिए आपके पूरे शरीर में पहुंच जाता है।
WHO का कहना है कि सेप्सिस बीमारी किसी भी उम्र को किसी को भी हो सकती है। हालांकि, जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनमें इसके होने की संभावना अधिक होती है। शिशुओं, बच्चों, बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं या किसी संक्रामक रोग, एड्स, कैंसर, किडनी रोग, लिवर सिरोसिस आदि से ग्रस्त लोगों में सेप्सिस होने की अशंका अधिक होता है। ऐसे में ये लोग यदि कोरोना से संक्रमित होते हैं, तो उनमें सेप्सिस (What is Sepsis Infection in Hindi) होने के चांसेज काफी हद तक बढ़ जाते हैं।
सेप्टीसीमिया या सेप्सिस शरीर के किसी अन्य भाग में संक्रमण के कारण होता है। यह संक्रमण (Sepsis Infection in Hindi) आमतौर पर गंभीर होता है। कई प्रकार के बैक्टीरिया सेप्टिसीमिया को जन्म दे सकते हैं। संक्रमण का मुख्य स्रोत क्या है, इसे आसानी से नहीं बताया जा सकता है। सबसे कॉमन इंफेक्शन, जो सेप्टीसीमिया का कारण बनते हैं, इस प्रकार हैं।
मूत्र मार्ग में संक्रमण (urinary tract infections)
निमोनिया जैसे फेफड़ों में संक्रमण (Lung infections)
गुर्दे में संक्रमण (kidney infections)
पेट में संक्रमण (infections in abdominal)
इन संक्रमणों से बैक्टीरिया रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं और तेजी से खुद को मल्टीप्लाई करते जाते हैं, जिससे लक्षण बहुत जल्दी नजर आने लगते हैं। जिन लोगों की हॉस्पिटल में सर्जरी हुई हो, उनमें भी सेप्सिस का खतरा रहता है। इसके अलावा, गंभीर घाव, जख्म, जल जाने से भी सेप्टीसीमिया हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सेप्सिस होने पर निम्न लक्षण नजर आते हैं-
बुखार (Fever)
कंपकंपी (Chills)
सांस लेने में तकलीफ या सांस तेज होना
हार्ट बीट बढ़ जाना
मानसिक समस्याएं, बेचैनी महसूस करना
असामान्य ब्लड प्रेशर
शरीर पर लाल धब्बे
डायरिया, मतली, उल्टी
पेशाब कम होना
शरीर में दर्द रहना।
इन सभी लक्षणों को यदि समय रहते डॉक्टर से दिखाया जाए, तो आप काफी हद तक सेप्टिक शॉक (Septic shock) की अवस्था में पहुंचने से बच सकते हैं वरना यह मौत का कारण बन सकता है।
यदि आप किसी भी संक्रामक रोगों से ग्रस्त हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, तो कोरोना होने पर सेप्सिस होने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में जरूरी है अपनी इम्यूनिटी मजबूत बनाना। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन सी (Vitamin-C Boosts Immunity) से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। अपने आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें। गंदगी के कारण भी संक्रमण फैलता है। दूषित पानी ना पिएं। खाना बनाने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें। ताजा खाना खाएं। पार्याप्त मात्रा में पानी पिएं। कोरोनावायरस (Coronavirus) के प्रकोप से खुद को बचाने के लिए मास्क पहनना ना भूलें।
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