इन 5 समस्याओं वाले लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है कोरोना वैक्सीन लगवाना, जानें आप किस कतार में

वैक्सीन लगवाने से पहले आपको इस बात को जानने की जरूरत है कि ये किन लोगों के लिए सेफ है और किन लोगों के लिए नहीं। इस लेख में हम आपको ये बता रहे हैं कि किन लोगों को वैक्सीन से दिक्कत हो सकती है।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : January 8, 2021 9:31 AM IST

भारत सहित दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन (covid-19 vaccine)लगाए जाने को लेकर एक लहर सी चल पड़ी है। हर देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू हो चुका है और कई देशों में ये कार्य प्रगति पर है। वहीं भारत में भी 12 जनवरी से वैक्सीन लगाने का काम शुरू होगा। वैक्सीन किन लोगों को लगाई जाएगी इस बात को लेकर अभी भी बहस चल रही है। इस बीच अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना कोविड ​​-19 टीकों के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी प्रदान कर दी है। जिसमें दोनों टीकों की एक के बाद एक 2 खुराक दिए जाते हैं। इन दोनों वैक्सीन की डोज में मामूली सा अंतर है, जैसे फाइजर वैक्सीन (covid-19 vaccine) को 21 दिनों के अंतराल पर दिया जाता है, जबकि मॉडर्ना वैक्सीन को 28 दिनों के अंतराल पर दिया जाता है। लेकिन वैक्सीन लगवाने से पहले आपको इस बात को जानने की जरूरत है कि ये किन लोगों के लिए सेफ है और किन लोगों के लिए नहीं। इस लेख में हम आपको ये बता रहे हैं कि किन लोगों को वैक्सीन से दिक्कत हो सकती है। तो आइए जानते हैं सीडीसी के मुताबिक, किन लोगों के लिए असुरक्षित है कोरोना वैक्सीन।

एलर्जी से पीड़ित लोग (allergic reaction: covid-19 vaccine)

सीडीसी के मुताबिक, जिन लोगों को COVID-19 वैक्सीन में मौजूद किसी भी इंग्रीडियंट्स से गंभीर एलर्जी है, उन्हें टीका (covid-19 vaccine) नहीं लगवाना चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों को अन्य प्रकार के टीके या इंजेक्शन से गंभीर एलर्जी होती है, उन्हें भी अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए कि उनके लिए सबसे अच्छा क्या होगा।

जिन लोगों को अतीत में फूड, सांप, पालतू जानवर या फिर लेटेक्स से संबंधित एलर्जी है उन्हें भी टीका लगवाने से पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को COVID-19 वैक्सीन के पहले शॉट पर गंभीर एलर्जी होती है तो CDC उन्हें दूसरा शॉट नहीं लेने की सलाह देता है।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं

गर्भवती महिलाओं पर COVID-19 वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर कोई डेटा नहीं है, क्योंकि उन्हें क्लिनिकल ट्रायल से बाहर रखा गया था। सीडीसी ने कहा, "मौजूदा आंकड़ों के आधार पर, विशेषज्ञों का मानना है कि mRNA वैक्सीन से गर्भवती महिलाओं या उनके भ्रूण के लिए किसी प्रकार का खतरा पैदा होने की संभावना नहीं है। लेकिन ब्रिटेन की हेल्थ रेगुलेटरी बॉडी की सलाह इससे बिल्कुल भिन्न है और उन्होंने महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण (covid-19 vaccine) से दूर रहने की सलाह दी है।

कोरोना पॉजिटिव लोग (postive people: covid-19 vaccine)

CDC के मुताबिक, कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति को तब तक वैक्सीन नहीं देनी चाहिए जब तक कि वह गंभीर बीमारी (अगर उसमें लक्षण हैं तो) रिकवर न हो जाए और उसका आइसोलेशन खत्म होने की प्रक्रिया पूरी न हो जाए।

कुछ मेडिकल कंडीशन में

सीडीसी के मुताबिक, क्लिनिकल ट्रायल से ये पता चला है कि जिन लोगों को कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में वैक्सीन (covid-19 vaccine) लगाने से दिक्कत है उन्हें कोरोना वैक्सीन लगवाने से पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए। एक्सपर्ट कहते हैं कि उनके पास इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज्ड रोगियों या एचआईवी वाले रोगियों से जुड़ा कोई डेटा नहीं है। लेकिन इन दोनों प्रकार के रोगों में पीड़ितों को कोरोना के गंभीर रूप का शिकार होने की संभावना है।

बच्चे और किशोर (kids: covid-19 vaccine)

बता दें कि बच्चों पर वैक्सीन के प्रभाव का कोई खास डेटा उपलब्ध नहीं है। एक तरफ जहां मॉडर्ना वैक्सीन 18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों पर उपयोग के लिए अधिकृत है वहीं फाइजर वैक्सीन 16 और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए अधिकृत पाई पाई गई है। इस समय तक बच्चों पर COVID-19 वैक्सीन का कोई अध्ययन नहीं किया गया है।

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