हर्ड इम्यूनिटी को कोरोना के खिलाफ बनाया जा सकता है हथियार, जानें कैसे करता है काम
कोरोना वायरस को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक दो भागों में बंटे हुए हैं। एक ग्रुप का कहना है कि कोरोना वायरस से बचना है, तो लॉकडाउन जरूरी है। वहीं, दूसरे ग्रुप का कहना है कि लॉकडाउन से इंसानों को आजादी दो, क्योंकि यही एक तरीका है, जिससे कोरोना वायरस से निपटा जा सकता है।
हर्ड इम्यूनिटी को कोरोना के खिलाफ बनाया जा सकता है हथियार, जानें कैसे करता है काम।
Written by Kishori Mishra|Updated : April 24, 2020 8:51 PM IST
कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से हुए लॉकडाउन ने इंसानों की आर्थिक स्थिति को बिगाड़ कर रख दिया है। इस वायरस का प्रकोप कुछ दिन बाद थम जाएगा या यह वायरस इंसानों की मुश्किलें और बढ़ाएगा, ये कहना बहुत ही मुश्किल है। कोरोना वायरस को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक दो भागों में बंटे हुए हैं। एक ग्रुप का कहना है कि इस वायरस से बचना है, तो लॉकडाउन जरूरी है। वहीं, दूसरे ग्रुप का कहना है कि लॉकडाउन से इंसानों को आजादी दो, क्योंकि यही एक तरीका है, जिससे कोरोना वायरस से निपटा जा सकता है। इन दिनों कई वैज्ञानिक 'हर्ड इम्यूनिटी' की बात कर रहे हैं। जानें, हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) के बारे विस्तार से यहां-
क्या है हर्ड इम्यूनिटी? (What is herd immunity)
कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बैठ गई है। कई लोगों की नौकरियां जाने लगीं हैं। खाने-पीने तक के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। ऐसे में कई लोग डिप्रेशन में आ सकते हैं। इसके लिए कुछ वैज्ञानिकों ने दूसरा रास्ता दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है घर से बाहर जाओ।
वैज्ञानिकों की इस थ्योरी के अनुसार, लॉकडाउन तभी तक कारगर साबित हो सकता है, जबतक लोग घरों में कैद हैं। जैसे ही ये लोग अपने घर से बाहर निकलेंगे, संक्रमण उतनी ही तेजी से दोबारा फैलेगा और लोगों को अपनी चपेट में लेगा। इसलिए, कोरोना वायरस के डर से छुपे नहीं, बल्कि इस वायरस का सामना करें। इस वायरस से जितने अधिक लोग संक्रमित होंगे, मनुष्य के शरीर में इससे लड़ने की ताकत उतनी ही ज्यादा पैदा होगी। इसी ताकत को 'हर्ड इम्यूनिटी' कहते हैं।
कैसे चर्चा में आई
ब्रिटिश सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने मार्च के महीने में ब्रिटेन में तेजी से फैल रही COVID-19 की चुनौती से निपटने के लिए हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) की ओर संकेत दिए थे। इसके बाद अब स्वीडन ने हर्ड इम्यूनिटी पर अपना काम शुरू कर दिया है। अमेरिका में कोरोना वायरस तबाही मचा रहा है, ऐसे में अमेरिका ने इस बात को लेकर मना कर दिया। मना करने के बावजूद स्वीडन अपने देश में हर्ड इम्युनिटी लागू कर रहा है।
हर्ड इम्यूनिटी का तरीका है कि लोग पहले वायरस से इंफेक्टेड हों, फिर उनके शरीर में इस वायरस से लड़के के लिए इम्यूनिटी डेवलप हो। ऐसा खसरा और पोलिया के लिए होता है। एक बार इसका टीका लगाने के बाद दोबारा इसके होने की संभावना खत्म हो जाती है। ऐसे ही कोरोना वायरस के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी डेवलेप हो गई, तो फिर कोरोना वायरस को हराना काफी आसान हो जाएगा।
क्या कहता है अमेरिका
अपने ब्लॉग में अमरीकी हार्ट एसोसिएशन के चीफ मेडिकल अफसर डॉक्टर हर्ड इम्यूनिटी के बारे में समझाने की कोशिश की है। उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा, "इंसानों के किसी ग्रुप (अंग्रेजी में हर्ड) के ज्यादातर लोग अगर वायरस से इम्यून हो जाएं तो झुंड के बीच मौजूद अन्य लोगों तक वायरस का पहुंचना बहुत मुश्किल होता है और एक सीमा के बाद इसका फैलाव रूक जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है।
इसके साथ ही हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) का आइडिया तभी काम करता है, जब किसी टीके की मदद से इंफेक्टेड लोगों को सुरक्षित रखा जा सके। एक अनुमान के मुताबिक, किसी ग्रुप में कोविड-19 के खिलाफ ‘हर्ड इम्यूनिटी’ तभी विकसित हो सकती है, जब उस आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कोरोना से संक्रमित हो चुका है और वे इससे लड़कर इम्यून हो गए हों।
क्या भारत में कारगर है हर्ड इम्यूनिटी?
भारत में अधिकतर लोगों को मलेरिया और बीसीजी के टीके लगे हुए हैं, इसलिए माना जा रहा है कि भारत में भी हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) कारगार साबित हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि भारतीय लोगों की इम्यूनिटी पश्चिमी देशों के मुकाबले काफी मजबूत होती है।
आंकडों के अनुसार, जिन देशों में मलेरिया फैल चुका है, वहां कोरोना वायरस का असर या तो बिल्कुल भी नहीं है या फिर बहुत ही कम है। दरअसल, ऐसा इसलिए है, क्योंकि जिस शरीर में मलेरिया एक बार एक्सपोज हो जाता है, उस शरीर में पाथ वे डेवलप होकर जिंक आयनोस्फेयर पैदा हो जाता है, जिससे ये वायरस कमजोर पड़ने लगता है। लेकिन, हर्ड इम्यूनिटी की थ्योरी भारतीय लोगों पर असर करेगी या नहीं, इस बात को अभी साबित नहीं किया गया है।
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